छत्तीसगढ़ के चार जिलों में प्रभारी एसपी की तैनाती, रायपुर ग्रामीण की कमान मनीषा ठाकुर को
Raipur. छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में एक अहम प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम ने चार जिलों में प्रभारी पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि इन जिलों के वर्तमान एसपी इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद रवाना हो रहे हैं। पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
ये जाएंगे ट्रेनिंग पर:
छत्तीसगढ़ कैडर के चार आईपीएस अधिकारियों श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, पंकज चंद्रा, वेदव्रत सिरमौर और विजय पांडेय का चयन इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए हुआ है। ये सभी अधिकारी वर्तमान में अलग-अलग जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं। श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा रायपुर ग्रामीण, विजय पांडेय जांजगीर-चांपा, पंकज चंद्रा कोंडागांव और वेदव्रत सिरमौर गरियाबंद जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
4 नए प्रभारी एसपी:
इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में कानून-व्यवस्था पर कोई असर न पड़े, इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने चार नए प्रभारी एसपी की नियुक्ति की है। रायपुर ग्रामीण जिले की कमान अब मनीषा ठाकुर रावटे को सौंपी गई है। वहीं जांजगीर-चांपा जिले में विमल कुमार बैस को प्रभारी एसपी बनाया गया है। कोंडागांव जिले की जिम्मेदारी त्रिलोक बंसल को दी गई है, जबकि गरियाबंद में नीरज चंद्राकर को प्रभारी एसपी के रूप में नियुक्त किया गया है।
ट्रेनिंग से लौटने तक प्रभार:
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यह सभी नियुक्तियां अस्थायी हैं और संबंधित जिलों के मूल एसपी के ट्रेनिंग से लौटने तक प्रभावी रहेंगी। इस दौरान नियुक्त किए गए प्रभारी एसपी अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षक के सभी प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े दायित्वों का पूर्ण रूप से निर्वहन करेंगे।
यहां होगी ट्रेनिंग:
इंडक्शन ट्रेनिंग का आयोजन हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में किया जा रहा है, जो देश के आईपीएस अधिकारियों के लिए एक प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान है। यह ट्रेनिंग 6 अप्रैल से शुरू होकर 15 मई तक चलेगी, जिसमें देशभर से चयनित आईपीएस अधिकारी हिस्सा लेंगे।
ये सीखेंगे अफसर:
इंडक्शन ट्रेनिंग को आईपीएस अधिकारियों के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों, अपराध नियंत्रण के नए तरीकों, आंतरिक सुरक्षा, साइबर क्राइम, इंटेलिजेंस मैनेजमेंट और प्रशासनिक दक्षता से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दी जाती है। साथ ही, उन्हें बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश के अनुरूप पुलिसिंग के नए आयामों से भी परिचित कराया जाता है।
ट्रेनिंग में व्यवहारिक ट्रेनिंग:
करीब डेढ़ महीने तक चलने वाली इस ट्रेनिंग का उद्देश्य अधिकारियों की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाना है, ताकि वे अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी ढंग से संभाल सकें। इस दौरान उन्हें विभिन्न सिमुलेशन, केस स्टडी और फील्ड एक्सरसाइज के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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