कचरा प्रोसेसिंग के लिए नया नियम ; ज्यादा कचरे पर देना होगा नगर निगम कर
NEWS IN SHORT
- रायपुर में कचरा प्रोसेसिंग के लिए नए नियम लागू होंगे।
- 100 किलो से ज्यादा कचरा उत्पन्न करने वालों को प्रोसेसिंग खुद करनी होगी।
- नगरपालिका ने इसके लिए शुल्क वसूलने का निर्णय लिया है।
- कॉलोनियों, सोसाइटीज, मॉल्स और संस्थानों को कचरा प्रोसेसिंग पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा।
- कचरे को गीला, सूखा, सैनेटरी और खतरनाक कचरे में विभाजित करना अनिवार्य होगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के अनुसार, पहले केवल गीला और सूखा कचरा कलेक्ट किया जाता था, अब चार अलग-अलग प्रकार के कचरे को अलग करना होगा। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनेटरी कचरा और खतरनाक कचरा शामिल हैं। इससे कचरे की प्रोसेसिंग में सुधार होगा और उसे रिसाइक्लिंग के योग्य बनाया जा सकेगा।
रजिस्ट्रेशन के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट
सभी कॉलोनियों, सोसाइटीज, मॉल्स, अस्पताल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल, ईपीआर (Extended Producer Responsibility) पर रजिस्टर करना होगा। इसमें संस्थान को अपने कचरे की प्रोसेसिंग, मात्रा, तकनीक और नियमों के पालन की जानकारी देनी होगी। नगर निगम इस रजिस्ट्रेशन की वेरिफिकेशन के बाद सर्टिफिकेट जारी करेगा।
कचरा प्रोसेसिंग के लिए कॉलोनियों को खुद करना होगा काम
नए नियमों के तहत, कॉलोनियों को कचरा प्रोसेसिंग के लिए अपनी यूनिट स्थापित करनी होगी। गीला कचरा घर के किचन से निकलता है, जैसे कि सब्जी-फल, जिसे कंपोस्ट या बायोगैस में बदला जा सकता है। सूखा कचरा, जैसे प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु, रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
परिवारों के हिसाब से कचरा उत्पन्न
विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति से रोजाना करीब 500 ग्राम कचरा निकलता है। यदि एक परिवार में पांच सदस्य हैं, तो रोजाना तीन किलो कचरा उत्पन्न होता है। ऐसे में यदि एक कालोनी में 50 परिवार हैं, तो 150 किलो कचरा रोजाना उत्पन्न होगा। इन कॉलोनियों को बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर के रूप में चिह्नित किया जाएगा और उन्हें कचरा प्रोसेसिंग के लिए प्रेरित किया जाएगा।
शुल्क वसूली
अगर कॉलोनियों ने कचरे की प्रोसेसिंग नहीं की तो नगर निगम प्रति टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए शुल्क वसूलेगा। रायपुर में करीब 1500 कवर्ड कैंपस, कॉलोनियां और अपार्टमेंट्स हैं, जिन पर यह नियम लागू होगा। इसके अलावा कई कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, मॉल्स और होटल्स भी इस नियम के तहत आएंगे।
वार्डवार सूची तैयार की जा रही
नगर निगम इस नए नियम को लागू करने के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है। सभी जेडएचओ को वार्डवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर्स को चिह्नित कर उन्हें कचरे की प्रोसेसिंग के लिए प्रेरित किया जा सके।
निष्कर्ष
रायपुर में नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत अब कॉलोनियों और संस्थानों को कचरा प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। 100 किलो से ज्यादा कचरा उत्पन्न करने वालों को नगर निगम द्वारा शुल्क वसूला जाएगा। यह नियम पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा और कचरे के उचित निपटान को सुनिश्चित करेगा।
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