छग के बिजली बाजार में टाटा की एंट्री: चार तहसीलों में सप्लाई लाइसेंस का आवेदन

VINAY VERMA | Aug 26, 2026, 17:56 IST
छग के पावर सेक्टर में नया मोड़
छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण के क्षेत्र में टाटा पावर की एंट्री की तैयारी है। कंपनी ने रायपुर समेत चार तहसीलों में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। 1 अक्टूबर को नियामक आयोग में जनसुनवाई होगी। फैसले से प्रदेश के बिजली सेक्टर में बड़ा बदलाव संभव है।

Raipur। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण के क्षेत्र में पहली बार किसी बड़ी निजी कंपनी ने सीधे दस्तक दी है। टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। कंपनी की नजर फिलहाल रायपुर जिले के चार इलाकों पर है। आयोग 1 अक्टूबर को इस आवेदन पर जनसुनवाई करेगा। इसके साथ ही प्रदेश में सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था के सामने निजी क्षेत्र की एंट्री को लेकर बहस तेज हो गई है।



चार इलाके, क्यों?

टाटा पावर ने रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में बिजली वितरण की अनुमति मांगी है। इन इलाकों का चयन महज संयोग नहीं माना जा रहा। रायपुर शहर के आसपास औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। धरसींवा और आसपास बड़े उद्योग हैं। अभनपुर और मंदिर हसौद क्षेत्र में भी औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।



यही वजह है कि इन क्षेत्रों को बिजली कारोबार के लिहाज से आकर्षक माना जा रहा है। उद्योगों की बिजली खपत घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में काफी ज्यादा होती है। ऐसे उपभोक्ता निजी वितरण कंपनी के लिए बड़ा कारोबारी आधार बन सकते हैं।



पहली बार निजी लाइसेंस

टाटा पावर ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 14 और 15 तथा संबंधित लाइसेंसिंग विनियमों के तहत आवेदन किया है। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण का बड़ा हिस्सा अब तक सरकारी कंपनियों के हाथ में रहा है। ऐसे में निजी कंपनी का लाइसेंस आवेदन प्रदेश के बिजली सेक्टर में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।



लाइसेंस मिल गया तो टाटा पावर उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए अपना नेटवर्क तैयार कर सकती है। दूसरा विकल्प मौजूदा सरकारी नेटवर्क का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए राज्य की वितरण और पारेषण कंपनियों को निर्धारित व्हीलिंग और उपयोग शुल्क देना होगा।



1 अक्टूबर को सुनवाई

आयोग 1 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे अपने कार्यालय में जनसुनवाई करेगा। सूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर आम लोग और संस्थाएं आवेदन पर आपत्ति, सुझाव या संशोधन प्रस्ताव दे सकती हैं। आपत्तिकर्ता को अपनी आपत्ति की प्रति टाटा पावर को भी भेजनी होगी।



जनसुनवाई के बाद आयोग अपनी अनुशंसा सरकार को भेजेगा। हालांकि अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर होगा। यानी 1 अक्टूबर की सुनवाई इस पूरे मामले का निर्णायक पड़ाव तो होगी, लेकिन उसी दिन लाइसेंस मिलने का फैसला नहीं होगा।



सरकारी नेटवर्क सबसे बड़ा सवाल

छत्तीसगढ़ में सरकारी बिजली वितरण कंपनी का नेटवर्क पहले से बड़े हिस्से में तैयार है। राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता करीब 2978 मेगावाट है, जिसमें लगभग 2840 मेगावाट थर्मल और करीब 138.7 मेगावाट जल विद्युत क्षमता शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय और निजी संयंत्रों को मिलाकर प्रदेश की कुल उत्पादन क्षमता करीब 30 हजार मेगावाट तक पहुंचती है।



प्रदेश में बिजली की मांग कई बार 5500 से 7000 मेगावाट के आसपास पहुंचती है। एनटीपीसी समेत निजी और केंद्रीय क्षेत्र के संयंत्र भी उत्पादन कर रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले समय में बिजली की खपत और बढ़ने की संभावना है।



बस्तर की तरफ भी जा सकता है मामला

जानकारों के मुताबिक रायपुर और आसपास के उन इलाकों में निजी वितरण लाइसेंस देना आसान नहीं होगा जहां सरकारी वितरण नेटवर्क पहले से मजबूत है। ऐसे में भविष्य में बस्तर जैसे क्षेत्रों का विकल्प सामने आ सकता है, जहां गांव-गांव तक वितरण ढांचा विकसित करने की जरूरत अभी भी है। हालांकि इसके लिए टाटा पावर को नए सिरे से आवेदन और नियामकीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।



दर टाटा नहीं तय करेगी

लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं कि कंपनी उपभोक्ताओं से मनमाना बिजली बिल वसूल सकेगी। टैरिफ तय करने का अधिकार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास ही रहेगा। यानी निजी कंपनी वितरण करेगी, लेकिन बिजली की दरों पर अंतिम नियंत्रण नियामक का होगा।



अभियंता संघ का विरोध

टाटा पावर के आवेदन ने बिजली विभाग के अभियंताओं के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत अभियंता संघ ने आपात बैठक कर निजी वितरण व्यवस्था का विरोध किया है। संघ के महासचिव मनोज वर्मा का कहना है कि बिजली आवश्यक सार्वजनिक सेवा है। इसका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और लगातार बिजली उपलब्ध कराना होना चाहिए।



संघ ने साफ किया है कि जनसुनवाई में वह तकनीकी और तथ्यात्मक आपत्तियां आयोग के सामने रखेगा। कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की जाएगी।



सवाल जो 1 अक्टूबर से पहले उठेंगे

क्या निजी कंपनी को सरकारी नेटवर्क वाले इलाके में वितरण लाइसेंस देना उचित होगा? क्या उद्योगों को प्राथमिकता देने से घरेलू उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा? क्या निजी कंपनी सरकारी नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी या अरबों रुपये खर्च कर अपना नेटवर्क बनाएगी? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या रायपुर के बाद निजी बिजली वितरण का रास्ता प्रदेश के दूसरे जिलों के लिए खुलेगा?



सरकार के फैसले पर नजर

टाटा पावर का आवेदन सिर्फ एक कंपनी का लाइसेंस मामला नहीं है। यह छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण के भविष्य से जुड़ा फैसला बन सकता है। 1 अक्टूबर की जनसुनवाई में आपत्तियों की तस्वीर साफ होगी। इसके बाद आयोग की अनुशंसा और सरकार के निर्णय से तय होगा कि छत्तीसगढ़ के बिजली बाजार में निजी क्षेत्र के लिए दरवाजा खुलता है या नहीं।



FAQ

  1. टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए कहां आवेदन किया है?
    टाटा पावर ने रायपुर जिले की रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
  2. टाटा पावर को बिजली वितरण लाइसेंस मिलने के बाद क्या बिजली की दरें कंपनी तय करेगी?
    नहीं। बिजली की दरें तय करने का अधिकार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास रहेगा। टाटा पावर सिर्फ बिजली वितरण का काम करेगी।
  3. टाटा पावर के बिजली वितरण आवेदन पर फैसला कब होगा?
    छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग 1 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे जनसुनवाई करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अनुशंसा सरकार को भेजेगा। अंतिम फैसला सरकार लेगी।

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