वेदांता ब्लास्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर 23 पहुंची, 13 मजदूर अब भी जिंदगी और मौत के बीच
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे ने अब और भयावह रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों में तीन और गंभीर रूप से घायल मजदूरों की मौत हो गई, जिससे कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। यह हादसा 14 अप्रैल को सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के कारण हुआ था।
मौत का आंकड़ा बढ़ा, कई अब भी जिंदगी से जूझ रहे
रायपुर के कालड़ा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उमेंद्र शाह और मध्यप्रदेश निवासी किस्मत अली ने दम तोड़ दिया। वहीं रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती पश्चिम बंगाल के मजदूर सुब्रोतो जेना, जो 80-90% तक झुलस चुके थे, की भी मौत हो गई। इस हादसे में कुल 36 मजदूर झुलसे थे, जिनमें से अब भी 13 का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
लापरवाही के आरोप, FIR दर्ज
घटना के बाद कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट प्रबंधन सहित 10 लोगों के खिलाफ डभरा थाने में FIR दर्ज की गई है। जांच में शुरुआती तौर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है।
औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच के अनुसार प्रोडक्शन दोगुना करने की जल्दबाजी में बॉयलर पर अत्यधिक लोड डाला गया। चेतावनी संकेत मिलने के बावजूद काम नहीं रोका गया। मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई।
हादसे की तकनीकी वजह
जांच में पाया गया कि बॉयलर फर्नेस के अंदर अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो गया था, जिससे दबाव तेजी से बढ़ा। यह दबाव मात्र 1-2 सेकंड में इतना बढ़ गया कि सिस्टम को बंद करना संभव नहीं हो पाया। बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। पीए फैन में बार-बार खराबी आ रही थी, अनबर्न फ्यूल से प्रेशर बना, पाइपिंग सिस्टम फेल हुआ और बैकअप सिस्टम समय पर काम नहीं कर पाया। इन सभी कारणों ने मिलकर इस विनाशकारी विस्फोट को जन्म दिया।
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। वहीं एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है।
FIR पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने FIR की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को FIR की कॉपी नहीं दी जा रही और पुलिस “ऊपर से आदेश” का हवाला दे रही है। उन्होंने पूछा कि यह “ऊपर” कौन है और रायपुर में किससे बात करनी होगी।
मजिस्ट्रियल जांच में क्या होगा शामिल?
जांच में निम्न बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा:
- हादसा कब और कैसे हुआ
- जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था
- तकनीकी बनाम मानवीय कारण
- उस दिन ड्यूटी पर मौजूद मजदूरों की सूची
- प्रशासनिक निरीक्षण और पहले की खामियां
- भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के उपाय
निष्कर्ष
वेदांता प्लांट हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और उत्पादन बढ़ाने की होड़ का गंभीर परिणाम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई से यह साफ होगा कि जिम्मेदारी किसकी तय होती है, लेकिन फिलहाल कई परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया है और कई मजदूर अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
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