लाल आतंक पर वार: 5 लाख का इनामी नक्सली मुठभेड़ में ढेर, डेडलाइन के 48 घंटे शेष

Aishwarya Dwivedi | Mar 29, 2026, 19:37 IST
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सुकमा के पोलमपल्ली जंगल में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने 5 लाख के इनामी नक्सली मूचाकी कैलाश को ढेर कर बड़ी सफलता हासिल की। वहीं कांकेर में तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

NEWS IN SHORT

  • जंगल में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़
  • मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 5 लाख के इनामी नक्सली को किया ढेर
  • सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सली का शव और हथियार बरामद
  • मूचाकी कैलाश प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर
  • कांकेर में तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के सुकमा और कांकेर में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले के पोलमपल्ली क्षेत्र के जंगलों में नक्सली मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने 5 लाख के इनामी नक्सली PPCM मूचाकी कैलाश को ढेर कर दिया। डीआरजी जवानों द्वारा चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान यह कार्रवाई हुई, जिसमें मौके से हथियार भी बरामद किए गए।



मूचाकी कैलाश प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर था और उस पर ग्रामीणों की हत्या, सुरक्षा बलों पर हमले और IED ब्लास्ट की साजिश जैसे गंभीर आरोप थे। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं।



पुलिस ने कराया भोजन

इधर, कांकेर जिले में आत्मसमर्पण की एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई। परतापुर एरिया कमेटी के तीन नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया। बताया गया कि सरेंडर से पहले वे जंगल में भूखे-प्यासे घूम रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था की। इसके बाद तीनों नक्सलियों ने दो SLR और एक भरमार बंदूक के साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनु पद्मा शामिल हैं।



मुख्यधारा में लौटने की अपील

बस्तर रेंज आईजी ने नक्सलियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए अब बहुत कम समय बचा है। उन्होंने माओवादी कैडरों से इस अवसर का लाभ उठाने और शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की अपील की है।



निष्कर्ष

सुकमा मुठभेड़ में इनामी नक्सली के मारे जाने से सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। लगातार अभियानों से नक्सल नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है और उनकी गतिविधियां कमजोर हो रही हैं। कांकेर में नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि वे मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास का रास्ता अब सबसे बेहतर विकल्प बनता जा रहा है।



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