महिला आयोग में कुर्सी पर संग्राम : किरणमयी नायक का कार्यकाल खत्म, आदेश जारी
Raipur। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की कुर्सी अब खुलकर सियासी और कानूनी विवाद का केंद्र बन गई है। एक तरफ डॉ. किरणमयी नायक खुद को अब भी वैध अध्यक्ष बता रही हैं। दूसरी तरफ सरकार ने उनका कार्यकाल खत्म होने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। आदेश के बाद साफ है कि सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब मामला अदालत और कानून की चौखट तक पहुंचता दिख रहा है।
बयान आया, फिर आया सरकारी आदेश
सरकारी हलकों में चर्चा है कि विवाद तब और बढ़ गया, जब डॉ. किरणमयी नायक ने सार्वजनिक तौर पर खुद को अब भी अध्यक्ष बताया। इसके बाद सरकार की ओर से घोषित नई अध्यक्ष ममता साहू ने पूरे मामले की शिकायत शासन से की। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग को कार्यकाल समाप्ति का आदेश जारी करना पड़ा। इससे सरकार ने विवाद पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी।
तीन साल पूरे, पद खत्म
महिला एवं बाल विकास विभाग के मंत्रालय से जारी आदेश में साफ लिखा गया है कि डॉ. किरणमयी नायक की नियुक्ति 13 जुलाई 2023 को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1995 के तहत की गई थी। कानून के मुताबिक अध्यक्ष का कार्यकाल अधिकतम तीन साल का होता है। यह अवधि 12 जुलाई 2026 को पूरी हो गई। इसलिए 13 जुलाई 2026 से उनका कार्यकाल समाप्त माना गया है।
किरणमयी बोलीं- मैं अब भी अध्यक्ष हूं
सरकारी आदेश के बावजूद डॉ. किरणमयी नायक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि 2023 से मामला हाईकोर्ट में लंबित है और स्टे आज भी प्रभावी है। इसलिए वे खुद को अब भी महिला आयोग की अध्यक्ष मानती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऑफिस जाने या किसी तरह की लड़ाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन अधिकारियों ने कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कार्रवाई कर गलती की है।
अफसरों पर कंटेम्प्ट की चेतावनी
डॉ. किरणमयी नायक ने साफ कहा कि ममता साहू की व्यक्तिगत गलती नहीं है। जिम्मेदारी उन अधिकारियों की है जिन्होंने कानूनी स्थिति साफ हुए बिना कदम उठाया। उनका दावा है कि नई नियुक्ति का वैधानिक आदेश उन्हें नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनके वकील संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
ममता साहू का जवाब भी आया
नई अध्यक्ष ममता साहू ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि डॉ. किरणमयी नायक उनसे वरिष्ठ हैं और वे उनका सम्मान करती हैं। लेकिन उन्होंने सरकार के आदेश के आधार पर पदभार ग्रहण किया है। उनके मुताबिक किसी भी संवैधानिक या वैधानिक पद की समय-सीमा होती है। तीन साल पूरे होने के बाद पद छोड़ना पड़ता है। इसमें कोई असामान्य बात नहीं है।
कोर्ट जाना है तो जाएं
ममता साहू ने कहा कि वे पहले भी महिला आयोग की सदस्य रह चुकी हैं और पूरी प्रक्रिया से परिचित हैं। अगर किसी को नियुक्ति पर आपत्ति है तो अदालत का रास्ता खुला है। कोर्ट से समन मिलेगा तो कानूनी जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद वकील हैं और कानून की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझती हैं।
अब नजर हाईकोर्ट पर
सरकार ने कार्यकाल समाप्ति का आदेश जारी कर प्रशासनिक स्थिति साफ करने की कोशिश की है। लेकिन डॉ. किरणमयी नायक के दावों ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब फैसला सिर्फ सरकारी आदेश से नहीं होगा। सबकी नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी। वहीं तय होगा कि महिला आयोग की कुर्सी पर कानूनी तौर पर किसका अधिकार है।
IMP FACTS
आयोग: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग
पूर्व अध्यक्ष: डॉ. किरणमयी नायक
नियुक्ति तिथि: 13 जुलाई 2023
कार्यकाल अवधि: 3 वर्ष
कार्यकाल समाप्ति: 12 जुलाई 2026
सरकारी आदेश प्रभावी: 13 जुलाई 2026
नई अध्यक्ष: ममता साहू
विभाग: महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़
विवाद का आधार: हाईकोर्ट में लंबित नियुक्ति संबंधी मामला
किरणमयी नायक का दावा: हाईकोर्ट स्टे के कारण वे अभी भी अध्यक्ष हैं
ममता साहू का पक्ष: सरकार के आदेश के आधार पर पदभार ग्रहण किया
अगला फैसला: हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर
FAQ
- डॉ. किरणमयी नायक का महिला आयोग अध्यक्ष पद क्यों खत्म किया गया?
सरकार के अनुसार डॉ. किरणमयी नायक का तीन साल का कार्यकाल 12 जुलाई 2026 को पूरा हो गया था। इसलिए 13 जुलाई 2026 से उनका कार्यकाल समाप्त माना गया। - डॉ. किरणमयी नायक खुद को अभी भी अध्यक्ष क्यों बता रही हैं?
उनका कहना है कि नियुक्ति से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में लंबित है और स्टे प्रभावी है। इसी आधार पर वे खुद को वैध अध्यक्ष मान रही हैं। - नई अध्यक्ष ममता साहू ने क्या कहा है?
ममता साहू ने कहा कि उन्होंने सरकार के आदेश के आधार पर पदभार संभाला है। उनके अनुसार वैधानिक पद की एक तय समय-सीमा होती है और तीन साल पूरे होने के बाद पद छोड़ना होता है।
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