सड़क पर झाड़ू लगाने वाली मां की बेटी ने लहराया परचम; चूल्हे पर खाना बनाते समय मिली CGBSE टॉप-10 में आने की खबर
NEWS IN SHORT
- मानसी टंडन ने 12वीं बोर्ड में टॉप-10 में बनाई जगह
- साधारण घर में बड़ी सफलता की कहानी
- मां की मेहनत और संघर्ष का नतीजा, मानसी की सफलता
- मानसी का सपना बैंकिंग सेक्टर में अधिकारी बनना
- परिवार और शिक्षकों का समर्थन, सफलता का सबसे बड़ा कारण
NEWS IN DETAIL
CG board :छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों में रायपुर जिले के मंदिर हसौद की मानसी टंडन ने टॉप-10 लिस्ट में जगह बनाई है।
मानसी ने 96.40% अंक हासिल किए, और अपनी कड़ी मेहनत से साबित किया कि परिस्थितियां कभी भी किसी की सफलता में रुकावट नहीं डाल सकतीं।
साधारण घर, बड़े सपने
मानसी का घर एकदम साधारण है, जहाँ किसी तरह का तामझाम या जश्न का शोर-शराबा नहीं हुआ. मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद भी मानसी अपनी रोज की दिनचर्या में लगी रहीं और चूल्हे पर खाना बनाती रही. टॉप-10 में आने की
बड़ी खबर मिलने के बाद भी उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया और वह सादगी के साथ घर के कामकाज निपटाती रहीं. उनकी आँखों में भविष्य को लेकर बड़े सपने और कुछ कर गुजरने की चमक साफ़ दिखाई दे रही थी.
मां की मेहनत से मिली प्रेरणा
मानसी की मां, नंदिनी नगर पालिका में सफाई मित्र के रूप में काम करती हैं और सड़कों पर झाड़ू लगाती हैं। उनकी महीने की सैलरी सिर्फ 9,000 रुपये है। तीन साल पहले मानसी के पिता का निधन हो गया था
जब वह 10वीं में पढ़ाई कर रही थीं। पिता के चले जाने के बाद उनकी मां ने अपनी पांच बेटियों की पढ़ाई का जिम्मा लिया और किसी भी हाल में उनकी शिक्षा में रुकावट नहीं आनेदिया। मानसी की सफलता उन्हीं के संघर्ष का परिणाम है।
मानसी की मेहनत और संघर्ष की कहानी
मानसी ने अपनी पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। उसने हर रोज़ स्कूल और कोचिंग के बाद शाम 6 बजे से 9 बजे तक पढ़ाई की। हिन्दी का पेपर लीक होने की खबर ने उसे परेशान कर दिया था
लेकिन उसने खुद को संभाला और दोबारा अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। मानसी के लिए यह सफलता उनके शिक्षकों, मां और बहनों की मदद के बिना संभव नहीं होती।
बैंकिंग क्षेत्र में अधिकारी बनना है मानसी का सपना
मानसी का सपना बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ी अधिकारी बनने का है। उन्होंने कहा कि इस सफलता का श्रेय उनके परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को जाता है।
मानसी ने बताया कि वह मंदिर हसौद क्षेत्र से दूसरी छात्रा हैं, जिन्होंने बारहवीं की मैरिट लिस्ट में जगह बनाई है। यह न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
बेटियां बनाएं अपना नाम
मानसी की मां, नंदिनी, अपनी बेटियों के उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करती रही हैं। उनका सपना है कि मानसी आगे बढ़कर अपने पैरों पर खड़ी हो और अपने परिवार का नाम रोशन करें।
उनके लिए यह सफलता किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि आर्थिक संकट के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों की शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया।
निष्कर्ष
मानसी की कहानी न सिर्फ संघर्ष और मेहनत की प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर दिल में बड़ा सपना हो और उसे पूरा करने के लिए सही दिशा में कड़ी मेहनत की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
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