CGPSC-2018 परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल, मेंस पेपर में गड़बड़ी को लेकर एक और खुलासा, हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार का जुर्माना

VINAY VERMA | Oct 27, 2026, 17:27 IST
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2018 मामला
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई है। राज्य सेवा परीक्षा 2018 की एक उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिले। इन पन्नों पर 30 अंकों के सवालों के जवाब होने थे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आयोग को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह नारायण दत्त CGPSC मामला करीब पांच साल की कानूनी लड़ाई से जुड़ा है।

अभ्यर्थी को मुआवजा मिला, लेकिन इंटरव्यू में शामिल होने का मौका नहीं मिला। कोर्ट ने आयोग की लापरवाही और निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया।



समझें क्या है पूरा मामला

  • CGPSC की राज्य सेवा परीक्षा 2018 में नारायण दत्त शामिल हुए थे।
  • उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास करके 2019 में मुख्य परीक्षा दी थी।
  • मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिले थे।
  • गायब पन्नों में कुल 30 अंकों के जवाब होने थे।
  • हाईकोर्ट ने आयोग को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।

RTI से खुला CGPSC का मामला

नारायण दत्त ने जून-जुलाई 2019 में सीजीपीएससी मेंस परीक्षा दी थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम आने पर उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उत्तरपुस्तिका मांगी।



कॉपी मिलने के बाद उन्हें चार पन्ने गायब दिखाई दिए। यह उत्तरपुस्तिका पेपर-VII यानी सामान्य अध्ययन-V के भाग-2 की थी। इसमें पृष्ठ क्रमांक 17 से 20 मौजूद नहीं थे।




चार पन्नों पर थे 30 अंकों के जवाब

गायब पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 तक के जवाब होने थे। इन चार सवालों के कुल अंक 30 थे। उत्तरपुस्तिका में पन्ने फाड़े जाने के निशान भी मिले थे।



सीजीपीएससी उत्तर पुस्तिका मामले में यही तथ्य विवाद की बड़ी वजह बना। सवाल उठा कि सुरक्षित रखी जाने वाली उत्तरपुस्तिका के पन्ने आखिर कैसे गायब हुए?



परीक्षक ने पहले ही दी थी सूचना

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। परीक्षक ने मूल्यांकन के दौरान ही गायब पन्नों की जानकारी दी थी।



27 सितंबर 2019 को मिली थी सूचना

परीक्षक ने 27 सितंबर 2019 को मुख्य मूल्यांकनकर्ता को सूचना दी थी। संबंधित उत्तरपुस्तिका का स्टीकर नंबर 722038 था। इसमें चार पन्ने गायब होने की बात स्पष्ट बताई गई थी।



इसके बावजूद अभ्यर्थी को समय पर गड़बड़ी की जानकारी नहीं मिली। आयोग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे।



सोचिए एक बार। जिस गड़बड़ी की जानकारी मूल्यांकन के दौरान मिल गई थी, वह RTI से क्यों खुली?




हाईकोर्ट ने दिया मुआवजे का आदेश

उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब होने पर नारायण दत्त हाईकोर्ट पहुंचे। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की।



याचिका में परीक्षा रिकॉर्ड तलब करने और स्वतंत्र जांच की मांग की गई। इसके अलावा अभ्यर्थी ने 50 लाख रुपए मुआवजा भी मांगा था।



तीन महीने में देने होंगे 50 हजार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीक साहू की एकल पीठ ने मामला सुना। अदालत ने आयोग की लापरवाही और निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया।



कोर्ट ने अभ्यर्थी को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। यह रकम आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर देनी होगी।



हाईकोर्ट का 50 हजार मुआवजा अभ्यर्थी को हुई परेशानी से जुड़ा है। हालांकि, अदालत ने चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्देश नहीं दिया।




30 अंक मिलने पर भी इंटरव्यू नहीं

सीजीपीएससी 2018 मुख्य परीक्षा में नारायण दत्त को कुल 695.5 अंक मिले थे। अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित कटऑफ 737.5 अंक था। अगर गायब पन्नों के पूरे 30 अंक मिलते, तब भी कटऑफ पार नहीं होता।



अंकों का पूरा गणित

अभ्यर्थी के प्राप्त अंक695.5
गायब पन्नों के अधिकतम अंक30
संभावित अधिकतम अंक725.5
अनारक्षित वर्ग का कटऑफ737.5
कटऑफ से अंतर12 अंक

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी उल्लेख किया। यह फैसला डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा बनाम देवरष नाथ गुप्ता मामले से संबंधित था।



अदालत ने माना कि व्यक्तिगत त्रुटि से पूरी चयन प्रक्रिया दोबारा नहीं खोली जा सकती। इसी वजह से अभ्यर्थी को इंटरव्यू में शामिल करने का आदेश नहीं मिला।



CGPSC की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

सीजीपीएससी भर्ती में गड़बड़ी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। राज्य सेवा परीक्षा 2021 और 2022 की चयन प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठे थे।



अब 2018 की उत्तरपुस्तिका का मामला फिर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला अभ्यर्थियों के अधिकारों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।



जवाबदेही किसकी तय होगी?

परीक्षक ने 2019 में ही चार पन्ने गायब होने की सूचना दी थी। फिर इसकी जांच और कार्रवाई का क्या हुआ?



क्या आयोग ने पता लगाया कि पन्ने कब गायब हुए? क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई?



उपलब्ध तथ्यों में किसी व्यक्ति पर पन्ने गायब करने की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। लेकिन आयोग को मिली सूचना के बाद की कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं।



अब सवाल साय सरकार से भी है। क्या भर्ती परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा और निगरानी की समीक्षा होगी? क्या ऐसी गड़बड़ियों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?




यह खबर क्यों जरूरी है

CGPSC में उत्तरपुस्तिका के चार पन्ने गायब होने का मामला सरकारी भर्ती की विश्वसनीयता से जुड़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी की मेहनत का सही मूल्यांकन होना जरूरी है। नारायण दत्त के मामले में 30 अंकों के जवाब उपलब्ध नहीं थे। परीक्षक ने इसकी सूचना भी दी थी। इसके बाद भी अभ्यर्थी को न्याय के लिए अदालत जाना पड़ा। यह मामला बताता है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, रिकॉर्ड की सुरक्षा और समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी है।



FAQ



सवाल 1. CGPSC की किस परीक्षा में उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब हुए?



जवाब: छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा 2018 की मुख्य परीक्षा में चार पन्ने गायब मिले। यह नारायण दत्त की सामान्य अध्ययन-V, भाग-2 की उत्तरपुस्तिका थी।



सवाल 2. हाईकोर्ट ने नारायण दत्त को कितना मुआवजा देने का आदेश दिया?



जवाब: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि तीन महीने के भीतर देनी होगी।



सवाल 3. क्या नारायण दत्त को इंटरव्यू का मौका मिलेगा?



जवाब: हाईकोर्ट ने इंटरव्यू में शामिल करने का आदेश नहीं दिया। पूरे 30 अंक जोड़ने पर भी उनके अंक कटऑफ से 12 कम रहते।

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