सीजीपीएससी विवाद: आयोग और अभ्यर्थी आमने-सामने, पूछा जवाब गलत तो क्यो दिया नंबर?
CGPSC 2025 मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद विवाद थमने के बजाय और गहराता जा रहा है। अब मामला सिर्फ कम अभ्यर्थियों के इंटरव्यू तक पहुंचने का नहीं है। अभ्यर्थियों ने आयोग की कॉपियों की जांच और मार्किंग सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर 2023 और 2024 की कॉपियों के उदाहरण साझा करते हुए अभ्यर्थी पूछ रहे हैं- एक जैसे जवाब तो नंबर अलग-अलग क्यों? सही जवाब पर कम नंबर और गलत जवाब पर नंबर क्यों?
आयोग बोला- अंक नहीं आए, अभ्यर्थी बोले- कॉपी देखिए
विवाद की शुरुआत 265 पदों के लिए मुख्य परीक्षा के बाद सिर्फ 608 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के लिए पात्र होने से हुई। अभ्यर्थियों का तर्क है कि तीन गुना के हिसाब से 795 अभ्यर्थी होने चाहिए थे। यानी 187 अभ्यर्थी कम रह गए।
आयोग का कहना है कि प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम अर्हकारी अंक जरूरी हैं। अनारक्षित वर्ग के लिए 33 और आरक्षित वर्ग के लिए 23 प्रतिशत अंक की सीमा है। कई अभ्यर्थी यह सीमा पार नहीं कर सके, इसलिए तीन गुना अभ्यर्थी नहीं चुने जा सके।
लेकिन अब अभ्यर्थियों ने सवाल का रुख ही बदल दिया है।
8 नंबर के सवाल में सिर्फ 2.5
एक अभ्यर्थी ने अपनी उत्तर पुस्तिका का उदाहरण साझा किया है। दावा है कि 8 अंकों के सवाल का उत्तर तथ्यात्मक और व्यवस्थित तरीके से लिखा गया। इसके बावजूद सिर्फ 2.5 अंक मिले।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि अगर उत्तर में तथ्य और जरूरी बिंदु मौजूद हैं तो इतने अंक क्यों काटे गए? उनका कहना है कि अंक काटना सिर्फ नंबर घटाना नहीं, चयन की दौड़ से अभ्यर्थी को बाहर करना है।
एक जैसा जवाब, 1.5 अंक बनाम शून्य
दूसरे उदाहरण में लगभग समान उत्तरों के लिए अलग-अलग अंक दिए जाने का दावा किया गया है। एक अभ्यर्थी को 1.5 अंक, जबकि दूसरे को शून्य।
यहीं मार्किंग सिस्टम सबसे ज्यादा सवालों में है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब मॉडल आंसर और मूल्यांकन की प्रक्रिया तय है तो समान उत्तरों में इतना अंतर कैसे?
हिंदी लिखी तो अंक कम?
एक और कॉपी को लेकर दावा है कि समान सवाल के अंग्रेजी उत्तर को 4.5 अंक मिले, जबकि हिंदी में लिखे उत्तर को 2.5 अंक।
अगर यह दावा सही साबित होता है तो सवाल सिर्फ मार्किंग का नहीं, भाषा के आधार पर मूल्यांकन में अंतर का भी होगा। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी पूछ रहे हैं कि क्या भाषा बदलने से उत्तर की गुणवत्ता बदल जाती है?
गलत जवाब पर 2.5 अंक क्यों?
सबसे ज्यादा चर्चा होमरूल लीग से जुड़े सवाल की है। अभ्यर्थियों का दावा है कि जवाब में स्वराज पार्टी लिखा गया, जिसे वे गलत उत्तर बता रहे हैं। इसके बावजूद 2.5 अंक दिए गए।
अब सीधा सवाल है- अगर गलत जवाब पर अंक दिए जा सकते हैं तो सही जवाब पर अंक काटने का पैमाना क्या है?
14 नंबर का जवाब जांचा ही नहीं?
एक अन्य कॉपी को लेकर अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि 14 अंकों के प्रश्न का उत्तर लिखा गया, लेकिन उसका मूल्यांकन नहीं हुआ। अगर यह आरोप सही है तो मामला बेहद गंभीर है। क्योंकि एक प्रश्न का मूल्यांकन छूटना सीधे अभ्यर्थी के कुल अंक और मेरिट को प्रभावित कर सकता है।
अब सवाल आयोग की पारदर्शिता पर
CGPSC ने कहा है कि कॉपियों का मूल्यांकन प्रश्नवार और कोडिंग सिस्टम के जरिए पहचान रहित तरीके से विषय विशेषज्ञों से कराया जाता है। आयोग पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं होने की बात भी कह चुका है।
लेकिन अभ्यर्थियों का सवाल है- सिस्टम पारदर्शी है तो समान उत्तरों में अलग-अलग नंबर क्यों?
अब अभ्यर्थी RTI के जरिए अपनी OMR शीट और मुख्य परीक्षा की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका हासिल करने की तैयारी में हैं। अंतिम परिणाम के बाद मेरिट और कटऑफ भी जारी होंगे।
अब लड़ाई सिर्फ रिजल्ट की नहीं
पूरे विवाद का असली सवाल यही है- क्या नंबर देने का पैमाना हर अभ्यर्थी के लिए समान था?
क्योंकि मामला 0.5, 1.5 या 2 नंबर का नहीं है। प्रतियोगी परीक्षा में यही छोटे अंतर किसी को इंटरव्यू तक पहुंचाते हैं और किसी को बाहर कर देते हैं।
अब आयोग के सामने दो सवाल खड़े हैं- सही जवाब पर कम नंबर क्यों और गलत जवाब पर नंबर क्यों? अभ्यर्थी इन सवालों का जवाब कॉपियों के आधार पर मांग रहे हैं।
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