सीजीपीएससी विवाद: चयन के सवाल पर बोला PSC, न्यूनतम नंबर भी नहीं ला पाए अभ्यर्थी

VINAY VERMA | Sept 04, 2026, 22:40 IST
CGPSC विवाद
CGPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 के इंटरव्यू चयन को लेकर विवाद बढ़ गया है। आयोग का कहना है कि कई अभ्यर्थी प्रत्येक प्रश्नपत्र में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए हैं।

CGPSC की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 अब इंटरव्यू चयन को लेकर विवादों में घिर गई है। विवाद बढ़ने के बाद आयोग का कहना है कि कई अभ्यर्थी प्रत्येक प्रश्नपत्र में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके। इसी कारण तीन गुना संख्या पूरी नहीं हो सकी और 795 के बजाय 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू के लिए पात्र पाए गए। यानी PSC के मुताबिक कम चयन का कारण कोई अलग चयन नीति नहीं, बल्कि न्यूनतम अंक की अनिवार्यता है।



पुनर्मूल्यांकन पर भी रोक

अभ्यर्थियों की पुनर्मूल्यांकन की मांग पर भी आयोग ने नियमों का हवाला दिया है। PSC ने कहा कि विज्ञापन की पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का प्रावधान नहीं है। आयोग के अनुसार कॉपियों का मूल्यांकन प्रश्नवार और कोडिंग सिस्टम के जरिए पहचान रहित तरीके से विषय विशेषज्ञों से कराया जाता है।



सवाल अभी खत्म नहीं

यही वह बिंदु है जहां अभ्यर्थियों और आयोग की दलीलें आमने-सामने हैं। अभ्यर्थी तीन गुना चयन के आधार पर 795 उम्मीदवारों की मांग कर रहे हैं, जबकि PSC न्यूनतम अर्हकारी अंक को कारण बता रहा है। अब असली सवाल यही है कि तीन गुना इंटरव्यू प्रावधान और प्रत्येक पेपर की न्यूनतम पात्रता को आयोग ने किस तरह लागू किया।



RTI से खुलेगा रिकॉर्ड

PSC ने कहा है कि अंतिम परिणाम के बाद प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की मेरिट सूची तथा कटऑफ वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थी RTI के जरिए अपनी OMR शीट और मुख्य परीक्षा की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका की प्रति भी ले सकेंगे। इससे विवाद के बीच अपने अंकों और मूल्यांकन की जांच का रास्ता खुला रहेगा। आयोग ने सोशल मीडिया की भ्रामक जानकारी से बचने की अपील की है।





क्या है पूरा मामला

265 पदों के लिए मुख्य परीक्षा के बाद 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चिन्हित किया गया है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाने की बात है तो 795 की जगह सिर्फ 608 को ही मौका क्यों मिला? 187 अभ्यर्थियों के कम चयन ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



अभ्यर्थियों ने खोला मोर्चा

अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञापित पदों के मुकाबले तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए। 265 पदों का तीन गुना 795 होता है। ऐसे में 608 का आंकड़ा सामने आने के बाद अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया का आधार सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर नियम में तीन गुना का प्रावधान है तो उससे कम उम्मीदवारों को रोकने की वजह भी साफ होनी चाहिए।



187 उम्मीदवारों पर सवाल

अभ्यर्थियों के मुताबिक 187 उम्मीदवारों को इंटरव्यू की दौड़ से बाहर किया गया है। उनका आरोप है कि मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में यदि किसी अभ्यर्थी के साथ अन्याय हुआ है तो उसे सुधारने का मौका मिलना चाहिए। इसी वजह से उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और इंटरव्यू के लिए अधिक अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग उठ रही है।



PSC ने कहा- नियम साफ हैं

विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने 3 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। PSC के मुताबिक विज्ञापन की कंडिका 3(iv) और परीक्षा प्रक्रिया नियम की कंडिका 7 के तहत प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल करना अनिवार्य है। अनारक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 23 प्रतिशत है।



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