CGPSC मेंस रिजल्ट विवाद: हाईकोर्ट ने खारिज की दोबारा जांच की मांग, 608 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू टला

Harrison Masih | Oct 01, 2026, 11:13 IST
CGPSC मेंस रिजल्ट विवाद
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीजीपीएससी मेंस परीक्षा के रिजल्ट से जुड़ी दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बीडी गुरु की कोर्ट ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच का नियम नहीं है। याचिकाकर्ता गड़बड़ी भी साबित नहीं कर पाए। राज्य सेवा परीक्षा 2025 में 265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचे थे। अगला चरण फिलहाल टला है। नई तारीख बाद में आएगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • याचिकाकर्ताओं ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 के मेंस रिजल्ट को चुनौती दी थी।
  • यह रिजल्ट 31 अगस्त 2026 को जारी हुआ था।
  • 265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चुने गए थे।
  • याचिकाकर्ता 1:3 के अनुपात में अभ्यर्थियों को बुलाने की मांग कर रहे थे।
  • हाईकोर्ट ने उनकी दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं हैं।

सीजीपीएससी मेंस परीक्षा पर क्या थी मांग?

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने 26 नवंबर 2025 के विज्ञापन पर परीक्षा दी थी। उनका कहना था कि नियम से 1:3 के हिसाब से उम्मीदवार बुलाने थे। सीजीपीएससी रिजल्ट 2026 में यह अनुपात नहीं दिखा, यही उनकी शिकायत थी।



इसी आधार पर उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच मांगी। यानी CGPSC Re-evaluation की मांग सीधे रिजल्ट से जुड़ी थी। याचिकाकर्ता चाहते थे कि कोर्ट कॉपियां दोबारा जंचवाए।




पीएससी ने क्या जवाब दिया?

सीजीपीएससी (CGPSC - Chhattisgarh Public Service Commission) यानी आयोग ने नियमों का हवाला दिया। आयोग के मुताबिक जनरल कैटेगरी में कम से कम 33 फीसदी अंक जरूरी थे। आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 23 फीसदी थी।



सिर्फ 608 अभ्यर्थी अपने वर्ग में तय अंक ला सके। इसलिए इन्हीं को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। यानी सूची में नाम आना न्यूनतम अंकों पर टिका था।



आयोग ने कम चयन की क्या वजह बताई?

आयोग पहले साफ कर चुका है कि वजह तकनीकी या मानवीय गलती नहीं है। उसके मुताबिक कई अभ्यर्थी हर प्रश्नपत्र में तय न्यूनतम अंक नहीं ला पाए। इसी वजह से तय अनुपात में चयन नहीं हो सका। तो कोर्ट ने किस आधार पर यह फैसला दिया? इसके पीछे दो बड़ी बातें रहीं। पहली बात अनुपात की थी, दूसरी पुनर्मूल्यांकन के नियम की।




1:3 के अनुपात पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने आयोग के शपथपत्र का हवाला दिया। कोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू में वही उम्मीदवार बुलाए गए। इन्होंने विज्ञापन और नियमों के मुताबिक न्यूनतम अंक पाए थे। याचिकाकर्ता साबित नहीं कर पाए कि न्यूनतम अंक वाला कोई अभ्यर्थी बाहर हुआ।



चयन प्रक्रिया में दखल देने का कोई आधार नहीं बना।



पुनर्मूल्यांकन के नियम पर कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राम विजय सिंह मामले के फैसले का हवाला दिया। शैक्षणिक मामलों में कोर्ट को विशेषज्ञों के मूल्यांकन में दखल से बचना चाहिए। कोर्ट खुद उत्तर पुस्तिकाएं जांचकर सही उत्तर तय नहीं कर सकता। यानी कोर्ट ने मूल्यांकन का फैसला विशेषज्ञों पर छोड़ दिया।



मौजूदा नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच का कोई प्रावधान नहीं है। जब तक मूल्यांकन में साफ गड़बड़ी न दिखे, आदेश नहीं दिया जा सकता। सिर्फ कम अंक आने या शक पर भी जांच नहीं होगी।




कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए थे?

कांग्रेस ने इस विवाद पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। पार्टी ने रिजल्ट की स्थिति साफ करने की मांग की थी। पार्टी ने इंटरव्यू टालने की मांग भी रखी थी।



पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा था, भर्ती 265 पदों पर निकली थी। उनके मुताबिक 1:3 के हिसाब से 795 कैंडिडेट्स चुने जाने चाहिए थे। लेकिन सिर्फ 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचे। आयोग का तर्क है कि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए।



इंटरव्यू टला, अब आगे क्या?

अब जरा आगे की बात करते हैं। सीजीपीएससी ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 का अगला चरण स्थगित कर दिया है। 16 सितंबर को इसका आदेश जारी हुआ था। आयोग ने तारीखें टालने की वजह नहीं बताई है।



दस्तावेज जांच और इंटरव्यू की नई तारीख बाद में जारी होगी। अभ्यर्थियों को आयोग की वेबसाइट पर अपडेट देखते रहने की सलाह दी गई है। तारीख आने तक अभ्यर्थियों को आयोग की वेबसाइट देखनी होगी। नई तारीख जारी होने के बाद आगे की प्रक्रिया उसी के अनुसार होगी। फिलहाल तारीख का इंतजार है।



सोचिए एक बार, 608 अभ्यर्थी अब भी नई तारीख की राह देख रहे हैं। तब तक हाईकोर्ट का आदेश आयोग की प्रक्रिया के पक्ष में खड़ा है।



यह खबर क्यों जरूरी है:

सरकारी भर्ती में हर अभ्यर्थी को समान अवसर और पारदर्शी प्रक्रिया की उम्मीद रहती है। यह फैसला बताता है कि कोर्ट शैक्षणिक मूल्यांकन में दखल देने से बचता है। साथ ही यह भी साफ होता है कि दावे के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं। 265 पदों की इस भर्ती में 608 अभ्यर्थी अब नई तारीख का इंतजार कर रहे हैं। आयोग की वेबसाइट पर आने वाले अपडेट पर उनकी नजर रहेगी।



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