CGPSC Scam : ED ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को किया गिरफ्तार, 6 दिन की रिमांड

VINAY VERMA | Sept 11, 2026, 22:05 IST
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CGPSC भर्ती घोटाले में ED ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार कर 6 दिन की रिमांड पर लिया है। WhatsApp चैट, पेपर लीक और ₹3 करोड़ के कैश ट्रेल से जांच तेज हो गई है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में अब ED ने भी शिकंजा कस दिया है। बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया गया है।



विशेष कोर्ट ने उन्हें 6 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। अब एजेंसी उनसे घोटाले की उन कड़ियों पर पूछताछ करेगी, जो अब तक जांच में पूरी तरह सामने नहीं आई हैं।



WhatsApp चैट बनी अहम कड़ी

ED की कार्रवाई में उत्कर्ष चंद्राकर के साथ चेतन बोरघारिया की WhatsApp चैट को अहम आधार बताया जा रहा है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि दोनों के बीच क्या बातचीत हुई,



किस तरह का संपर्क था और क्या इसका CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना है। उत्कर्ष चंद्राकर को ED पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।



पेपर लीक का भी आरोप

ED की जांच में 2020 और 2021 की परीक्षाओं के पेपर कथित तौर पर कुछ लोगों तक पहुंचाने और इसके बदले पैसे लेने का आरोप सामने आया है।



हाल की जांच में एजेंसी ने करीब 3 करोड़ रुपए के कैश ट्रेल का भी दावा किया है। यानी मामला सिर्फ रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पैसे और पेपर तक पहुंच की कड़ी भी जांच में है।



पहले चेयरमैन पर कसा शिकंजा

इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत यहीं से नहीं हुई। नवंबर 2024 में CBI ने CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सोनवानी के भतीजे नितेश सोनवानी, डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर ललित गनवीर समेत दूसरे आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई।



अफसरों और रिश्तेदारों की कड़ी

सितंबर 2025 में CBI ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें पूर्व CGPSC सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुमित ध्रुव, डिप्टी कलेक्टर मीशा कोसले और जिला आबकारी अधिकारी दीपा आदिल शामिल थे। CBI का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अधिकारियों के बच्चों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने की साजिश हुई।



29 नाम, जांच अब भी जारी

जनवरी 2026 में CBI ने करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 29 लोगों को आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसी ने परीक्षा और इंटरव्यू में गड़बड़ी कर चुनिंदा उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। अब ED की नई गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले में पैसे के लेन-देन वाली जांच को और अहम बना दिया है।



छह दिन में खुलेगा कितना राज?

अब चेतन बोरघारिया से ED की पूछताछ पर नजर है। चैट में क्या था, किससे संपर्क था और कथित पेपर लीक या पैसे की कड़ी कहां तक जाती है, ये सवाल जांच के केंद्र में रहेंगे।



पहले CBI की गिरफ्तारियों ने रिश्तेदारी और चयन में कथित खेल खोला था, अब ED की कार्रवाई पैसे और संपर्कों की परत खोलने की कोशिश कर रही है।



FAQ

  1. CGPSC भर्ती घोटाले में ED ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया है?
    उत्तर: ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। उन पर परीक्षा में गड़बड़ी, व्हाट्सएप चैट के जरिए साठगांठ और पैसों के लेन-देन में शामिल होने का आरोप है।
  2. चेतन बोरघारिया की गिरफ्तारी में कौन सा मुख्य सबूत सामने आया है?
    उत्तर: ED की जांच में चेतन बोरघारिया और पहले से गिरफ्तार आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई WhatsApp चैट को सबसे अहम सबूत माना गया है।
  3. CGPSC घोटाले में कुल कितने करोड़ के कैश ट्रेल का खुलासा हुआ है?
    उत्तर: ED की जांच में अब तक करीब 3 करोड़ रुपये के कैश ट्रेल (नकद लेन-देन) का दावा किया गया है।

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