CGPSC Scam : ED ने 12 लोगों को भेजा समन, 3.2 करोड़ के लेन-देन की जांच तेज

Umeshwari Baghel | Sept 14, 2026, 16:44 IST
12 लोगों को ED का बुलावा
CGPSC घोटाला मामले में ED की जांच तेज हो गई है। एजेंसी ने 12 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच टीम 3.2 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन, डिजिटल सबूत और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल कर रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • CGPSC घोटाले में ED की जांच तेज, 12 लोगों को नोटिस
  • 3.2 करोड़ के लेन-देन की तलाश में जुटी ED
  • चयन गड़बड़ी मामले में पैसों की कड़ी जोड़ रही जांच एजेंसी
  • चेतन बोरघरिया गिरफ्तारी के बाद बढ़ा जांच का दायरा
  • डिजिटल सबूत और कॉल रिकॉर्ड से खुलेगा CGPSC केस का राज

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी अब कथित पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। ED ने इस मामले में करीब 12 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें कुछ अभ्यर्थी और मामले से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं।



जांच एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि चयन में गड़बड़ी के लिए कथित रूप से ली गई रकम कहां-कहां पहुंची। ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी बताए जा रहे अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उनसे आर्थिक लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल पूछे जा रहे हैं।



12 लोगों से होगी पूछताछ

ED की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार विकास चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर के जरिए कथित तौर पर रकम पहुंचाने वाले लोगों से जानकारी ली जा रही है।



जांच एजेंसी इन लोगों से उनके संपर्क, पैसों के लेन-देन और चयन प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछ रही है। इसके अलावा संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए हैं। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।



जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि अभ्यर्थियों से रकम लेने के बाद उसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। इसके साथ ही कथित भ्रष्टाचार में शामिल लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।



3.2 करोड़ रुपए की कड़ी तलाश

CGPSC मामले में करीब 3.2 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन की जांच की जा रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम किस माध्यम से इकट्ठी हुई और किन-किन लोगों के बीच इसका बंटवारा हुआ।



जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या चेतन बोरघरिया तक कोई रकम पहुंची थी। अगर रकम पहुंची थी तो उसके बाद वह कहां गई। फिलहाल पैसों के पूरे नेटवर्क को समझने के लिए अलग-अलग लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।ED अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक लेन-देन की जानकारी मिलने से पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।



धमतरी घर पर हुई थी छापेमारी

इससे पहले ED ने चेतन बोरघरिया के धमतरी स्थित पैतृक घर पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।



जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा को भी जांच में शामिल किया गया है।



ED को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड से मामले से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं। इसी आधार पर संबंधित लोगों से आगे पूछताछ की जा रही है।



कॉल रिकॉर्ड और चैट खंगाले गए

जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े लोगों के पुराने कॉल रिकॉर्ड और चैट की भी जांच की है। बताया जा रहा है कि साल 2019 से 2023 के बीच हुई बातचीत को भी जांच के दायरे में लिया गया है।



ED यह पता कर रही है कि अभ्यर्थियों, बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ का सिलसिला आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच एजेंसी कथित तौर पर मिले डिजिटल सबूतों को आर्थिक लेन-देन से जोड़कर देख रही है।



कई लोगों की भूमिका जांच के घेरे में

CGPSC मामले में विकास चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने में किन लोगों की भूमिका रही। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं।



इसके अलावा अन्य आरोपियों और संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है। ED सभी कड़ियों को जोड़कर मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।



आरोपियों की संपत्तियों की जानकारी जुटाई

ED ने इस मामले में कई आरोपियों की संपत्तियों का भी ब्योरा जुटाया है। इनमें कारोबारी श्रवण कुमार गोयल, पूर्व IAS टामन सिंह सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक और ललित गणवीर सहित अन्य नाम शामिल हैं।



जांच एजेंसी यह पता कर रही है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित अपराध से हुई कमाई से है या नहीं। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।



मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच

ED पूरे मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी रकम को किस तरह इस्तेमाल किया गया।



CGPSC भर्ती प्रक्रिया में पर्चा लीक और चयन में अनियमितता के आरोपों की जांच पहले से चल रही है। अब ED आर्थिक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दे रही है।



फिलहाल जांच एजेंसी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और लोगों के बयानों के आधार पर आगे बढ़ रही है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



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