छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी, केदार कश्यप और दीपक बैज समेत कई बड़े नाम शामिल

Umeshwari Baghel | Oct 29, 2026, 17:46 IST
छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं की सुरक्षा घटेगी, केदार कश्यप और दीपक बैज भी शामिल।
छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी है। इनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेता शामिल हैं। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज भी इस सूची में हैं। गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा समीक्षा के बाद बदलाव की जानकारी दी है। यह फैसला बस्तर में बदली सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़ा गया है। हालांकि, गृह विभाग का आदेश जारी होना बाकी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बस्तर संभाग के 116 नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी है।
  • इनमें भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेता शामिल हैं।
  • नौ नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z की जाएगी।
  • गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा समीक्षा की जानकारी दी है।
  • अगले छह महीने में सुरक्षा की दोबारा समीक्षा होगी।

नौ नेताओं की Z+ सुरक्षा घटेगी

छत्तीसगढ़ वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। बस्तर संभाग के नौ नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z करने की जानकारी है। इनमें वर्तमान और पूर्व मंत्री भी शामिल हैं।



कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप की सुरक्षा में भी बदलाव प्रस्तावित है। पूर्व मंत्री महेश गागड़ा का नाम भी सामने आया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की सुरक्षा भी घटाने की तैयारी है। पूर्व मंत्री कवासी लखमा भी इन प्रमुख नामों में शामिल हैं।



कर्मा परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की जानकारी सामने आई है। हालांकि, परिवार के सदस्यों की नई सुरक्षा श्रेणी स्पष्ट नहीं है। इसकी जानकारी गृह विभाग के विस्तृत आदेश से मिलेगी।




भाजपा और कांग्रेस के नेता शामिल

116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती दोनों प्रमुख दलों से जुड़ी है। भाजपा के साथ कांग्रेस नेताओं की सुरक्षा भी समीक्षा के दायरे में है। संबंधित नेताओं की मौजूदा सुरक्षा श्रेणी के आधार पर बदलाव प्रस्तावित हैं।



सांसदों और विधायकों की सुरक्षा बदलेगी

बस्तर नेताओं की सुरक्षा समीक्षा में सांसद और विधायक भी शामिल हैं। उनकी मौजूदा सुरक्षा श्रेणियों का आकलन किया गया है। इसके आधार पर अलग-अलग स्तर पर कटौती की तैयारी है।



कुछ नेताओं की Z श्रेणी बदलकर Y करने की जानकारी है। वहीं, Y+ सुरक्षा वाले नेताओं को Y श्रेणी में रखा जाएगा। इससे सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सुरक्षा इंतजाम बदल सकते हैं।




लेकिन किस नेता के कितने जवान कम होंगे? इसका जवाब अभी आधिकारिक आदेश से ही मिलेगा। गृह विभाग ने संबंधित नेताओं की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए हर नेता की नई सुरक्षा व्यवस्था फिलहाल स्पष्ट नहीं है।




सुरक्षा पूरी तरह नहीं हटेगी

गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा पूरी तरह हटाने को उचित नहीं बताया। उनके मुताबिक, बदली परिस्थितियों में सुरक्षा कम करना जरूरी हो सकता है। लेकिन संबंधित नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।



यानी सुरक्षा श्रेणी घटने के बाद भी जवान तैनात रहेंगे। हालांकि, उनकी संख्या और जिम्मेदारियां नई व्यवस्था के अनुसार तय होंगी।



विजय शर्मा ने क्यों लिया फैसला?

उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा कटौती की वजह बताई। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद बदली परिस्थितियों से जोड़ा।



विजय शर्मा के मुताबिक, मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य था। उन्होंने दावा किया कि तय समयसीमा तक यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया। यह सरकार का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध नहीं है।



उन्होंने बताया कि इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराई गई। एक समिति ने छह महीने तक मौजूदा परिस्थितियों का आकलन किया। इसी समीक्षा के आधार पर सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव प्रस्तावित हैं।



छह महीने तक चली समीक्षा

समिति ने बस्तर के नेताओं की सुरक्षा जरूरतों का आकलन किया। गृह मंत्री के अनुसार, यह प्रक्रिया छह महीने तक चली। इसके बाद सुरक्षा श्रेणियों में एक स्तर की कटौती का फैसला लिया गया।



छत्तीसगढ़ वीआईपी सुरक्षा से जुड़े बदलाव का आधार यही समीक्षा बताई गई है। हालांकि, समिति की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।



छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा

छत्तीसगढ़ नेताओं की सुरक्षा में फिलहाल एक स्तर की कटौती प्रस्तावित है। विजय शर्मा ने अगले छह महीने में दोबारा समीक्षा की जानकारी दी।



उन्होंने बताया कि परिस्थितियां अनुकूल रहने पर सुरक्षा और घट सकती है। हालांकि, अगला बदलाव उस समय के खतरे के आकलन पर निर्भर करेगा।



क्या छह महीने बाद इन नेताओं की सुरक्षा फिर घटेगी? इसका फैसला आगामी सुरक्षा समीक्षा के बाद ही होगा। फिलहाल किसी विशेष नेता की अगली सुरक्षा श्रेणी तय नहीं बताई गई है।



बस्तर में सुरक्षा क्यों जरूरी रही?

बस्तर लंबे समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां सक्रिय राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया। नक्सली हिंसा के खतरे के कारण उच्च सुरक्षा श्रेणियां उपलब्ध कराई गई थीं।




अब सरकार का कहना है कि बस्तर की सुरक्षा परिस्थितियां बदली हैं। इसी आधार पर नेताओं की सुरक्षा जरूरतों का दोबारा आकलन हुआ है। बस्तर नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा में इसी बदलाव को प्रमुख आधार बताया गया। फिर भी सुरक्षा कम करने का मतलब उसे पूरी तरह समाप्त करना नहीं है।



Z+ और Z सुरक्षा में अंतर

Z+ श्रेणी में कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था हो सकती है। जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित जवान और सुरक्षा वाहन तैनात किए जाते हैं। Z श्रेणी में भी सुरक्षाकर्मी और अन्य जरूरी इंतजाम उपलब्ध होते हैं।



Y+ और Y श्रेणी में सुरक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। जवानों की वास्तविक संख्या सुरक्षा योजना और खतरे के आकलन पर निर्भर करती है।



गृह विभाग के आदेश का इंतजार

छत्तीसगढ़ वीआईपी सुरक्षा में प्रस्तावित बदलाव की विस्तृत सूची अभी सामने नहीं आई है। गृह विभाग के आदेश के बाद नई श्रेणियां स्पष्ट होंगी। इसमें संबंधित नेताओं की सुरक्षा और जवानों की तैनाती तय होगी। फिलहाल गृह मंत्री विजय शर्मा ने समीक्षा और कटौती की जानकारी दी है।



दीपक बैज का बयान आया सामने

छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा घटाने के फैसले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा कम कर रही है, लेकिन प्रदेश में नक्सलवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।



बैज के मुताबिक, आधा दर्जन से ज्यादा नक्सली अब भी सक्रिय हैं, जबकि कुछ दूसरे राज्यों में चले गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भी चाहती है कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो, लेकिन सुरक्षा में कटौती के बाद किसी जनप्रतिनिधि के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।



दीपक बैज ने भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि एक तरफ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा घटाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपने नेताओं को अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध करा रही है।



यह खबर क्यों जरूरी है

छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा का संबंध बस्तर की परिस्थितियों से है। यह फैसला सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से भी जुड़ा है। 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती से जवानों की तैनाती बदल सकती है। हालांकि, इससे कितने संसाधन बचेंगे, इसका आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।



सुरक्षा का फैसला राजनीतिक दल के बजाय खतरे के आकलन पर होना चाहिए। भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता इस समीक्षा में शामिल हैं। अब गृह विभाग के आदेश से स्पष्ट होगा कि सुरक्षा कैसे बदलेगी।



FAQ

सवाल 1: छत्तीसगढ़ में कितने नेताओं की सुरक्षा घटेगी?



जवाब: बस्तर संभाग के 116 नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी है। इनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेता शामिल हैं।



सवाल 2: केदार कश्यप और दीपक बैज को अब कौन सी सुरक्षा मिलेगी?



जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों की Z+ सुरक्षा घटाकर Z करने की तैयारी है। अंतिम स्थिति गृह विभाग के विस्तृत आदेश से स्पष्ट होगी।



सवाल 3: छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा क्यों घटाई जा रही है?



जवाब: गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसे बदली सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़ा है। उन्होंने छह महीने की समीक्षा के बाद कटौती की जानकारी दी है। अगले छह महीने में दोबारा समीक्षा होगी।

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