छत्तीसगढ़ में पहली बार सरकारी कॉलेजों के युक्तियुक्तकरण की तैयारी, 7 में जीरो एडमिशन
ऐसे में 68 सरकारी कॉलेजों का दूसरे कॉलेजों में विलय किया जा सकता है। उच्च शिक्षा विभाग ने इन संस्थानों से पिछले पांच साल के एडमिशन और बजट सहित कई जरूरी जानकारियां मांगी हैं। हालांकि कॉलेजों को मर्ज करने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
पहली बार सरकारी कॉलेजों के युक्तियुक्तकरण की तैयारी
छत्तीसगढ़ में अब तक सरकारी स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया था। अब उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों की स्थिति की समीक्षा करने जा रहा है। इसके लिए उन कॉलेजों की जानकारी जुटाई जा रही है जहां छात्रों की संख्या बहुत कम है।
विभाग यह पता लगाना चाहता है कि किन कॉलेजों में लगातार एडमिशन घट रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कम छात्रों वाले कॉलेजों को चलाने में सरकार कितना पैसा खर्च कर रही है।
इस रिपोर्ट के आधार पर आगे तय किया जा सकता है कि कौन से कॉलेज पहले की तरह चलते रहेंगे और किन्हें आसपास के दूसरे सरकारी कॉलेजों में मिलाया जा सकता है।
7 कॉलेजों में एक भी छात्र ने नहीं लिया एडमिशन
प्रदेश के 7 सरकारी कॉलेज ऐसे हैं जहां शैक्षणिक सत्र 2025-26 में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया। इन कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर छात्रों की संख्या शून्य रही।
इनमें धमतरी जिले का बीएएलएलबी नवीन शासकीय महाविद्यालय कुरुद शामिल है। बस्तर जिले के शासकीय महाविद्यालय नगरनार और शासकीय महाविद्यालय किलेपाल में भी कोई एडमिशन नहीं हुआ।
रायगढ़ के नवीन संगीत महाविद्यालय और नवीन शासकीय शारीरिक शिक्षा स्नातक महाविद्यालय की स्थिति भी ऐसी ही रही। जशपुर जिले के शासकीय महाविद्यालय फरसाबहार और शासकीय महाविद्यालय करडेगा में भी एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया। इन कॉलेजों में प्रवेश नहीं होने की वजहों की समीक्षा की जाएगी।
23 कॉलेजों में 100 से भी कम छात्र
प्रदेश में 23 सरकारी कॉलेज ऐसे हैं जहां पिछले शैक्षणिक सत्र में 100 से कम छात्रों ने एडमिशन लिया। इनमें बस्तर का नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय और कोरबा के शासकीय नवीन महाविद्यालय जटगा तथा शासकीय आदर्श महाविद्यालय शामिल हैं।
इसके अलावा धमतरी जिले के सिरी कुरुद और बेमेतरा जिले के बोरतरा व ठेलका के सरकारी कॉलेज भी इस सूची में हैं। बिलासपुर के बेलतरा और नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय में भी छात्रों की संख्या कम रही।
राजनांदगांव के रामाटोला स्थित वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय का नाम भी इस सूची में शामिल है।
बस्तर से सरगुजा तक कई कॉलेजों में कम एडमिशन
कम छात्रों वाले कॉलेजों की सूची में प्रदेश के कई जिलों के संस्थान शामिल हैं। इनमें मनेन्द्रगढ़ का नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय और अंबिकापुर का नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय भी है।
बीजापुर के कुटरू और आवापल्ली स्थित सरकारी कॉलेजों में भी 100 से कम छात्रों ने प्रवेश लिया। बालोद जिले के बासीन और घोटिया कॉलेजों की स्थिति भी ऐसी ही रही।
इसके अलावा दुर्ग का नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, सुकमा का शहीद डेबरीधुर शासकीय महाविद्यालय तोंगपाल और शासकीय आदर्श आवासीय कन्या महाविद्यालय भी इस सूची में हैं।
कबीरधाम के झलमला, नारायणपुर के छोटे डोंगर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के नागपुर, जांजगीर के केरा और सूरजपुर के ओड़गी स्थित सरकारी कॉलेजों में भी छात्रों की संख्या 100 से कम रही।
38 कॉलेजों में 200 से कम छात्र
विभाग की समीक्षा में 38 ऐसे कॉलेज भी सामने आए हैं जहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रों की संख्या 200 से कम है।
उच्च शिक्षा संचालनालय ने छात्र संख्या के आधार पर कॉलेजों को चार श्रेणियों में बांटा है।
- पहली श्रेणी में वे कॉलेज हैं जहां एक भी छात्र नहीं है।
- दूसरी श्रेणी में 1 से 100 छात्रों वाले कॉलेज हैं।
- तीसरी श्रेणी में 101 से 200 छात्रों वाले कॉलेज हैं।
- चौथी श्रेणी में 201 से 300 छात्रों वाले कॉलेज रखे गए हैं।
इन श्रेणियों के आधार पर कॉलेजों की स्थिति और जरूरतों का आकलन किया जाएगा।
पांच साल का एडमिशन रिकॉर्ड खंगालेगा विभाग
उच्च शिक्षा संचालनालय ने कॉलेजों से शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2025-26 तक की जानकारी मांगी है।
कॉलेजों को बताना होगा कि पिछले पांच वर्षों में कितने छात्रों ने प्रवेश लिया। साथ ही बीए, बीकॉम, बीएससी और दूसरे पाठ्यक्रमों में कितनी सीटें स्वीकृत थीं और उनमें कितने दाखिले हुए।
विभाग ने हर साल छात्रों की संख्या में हुई बढ़ोतरी या कमी का प्रतिशत भी मांगा है। इससे पता चलेगा कि किन कॉलेजों में छात्र लगातार कम हो रहे हैं और किन पाठ्यक्रमों में दाखिले बढ़ रहे हैं।
शिक्षकों की कमी और बजट की भी होगी जांच
सिर्फ एडमिशन ही नहीं बल्कि कॉलेजों में मौजूद सुविधाओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग ने शिक्षकों के स्वीकृत पदों और खाली पदों का ब्योरा मांगा है।
इसके अलावा सरकार से मिले बजट और उसके उपयोग की जानकारी भी देनी होगी।
विभाग यह भी देखेगा कि संबंधित कॉलेज से दूसरा सरकारी कॉलेज कितनी दूरी पर है। आसपास के स्कूलों में कितने विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और भविष्य में वहां कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों की कितनी संभावना है।
इन जानकारियों के आधार पर कॉलेजों के संचालन की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
प्रदेश में 343 सरकारी कॉलेज, पांच साल में खुले 64 नए संस्थान
छत्तीसगढ़ में फिलहाल 343 सरकारी कॉलेज हैं। साल 2009-10 में प्रदेश में सिर्फ 159 शासकीय महाविद्यालय थे। इसके बाद नए कॉलेज खुलने से इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।
पिछले पांच वर्षों में ही प्रदेश में 64 नए सरकारी कॉलेज खोले गए हैं।
हालांकि इनमें से कई कॉलेजों के पास अब तक अपना भवन नहीं है। कुछ कॉलेज चार से पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। कई जगह विद्यार्थियों के लिए जरूरी प्रयोगशाला और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं।
ऐसी स्थिति में कम एडमिशन वाले कॉलेजों के संचालन और सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कॉलेज मर्ज हुए तो छात्रों की पढ़ाई पर क्या होगा असर?
यदि सरकार कॉलेजों को मर्ज करने का फैसला लेती है तो संबंधित कॉलेजों के विद्यार्थियों को दूसरे संस्थानों में पढ़ाई करनी पड़ सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।
विभाग आसपास के कॉलेजों की दूरी और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी जुटा रहा है। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के लिए कितनी दूर जाना पड़ेगा और दूसरे कॉलेजों में कितनी जगह उपलब्ध है, ये बातें भी समीक्षा में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किन 68 कॉलेजों का विलय होगा या यह प्रक्रिया कब शुरू होगी।
उच्च शिक्षा मंत्री बोले- कॉलेजों से मांगी जा रही जानकारी
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के मुताबिक अभी सरकारी कॉलेजों से जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
कॉलेजों में उपलब्ध सीटों, प्रवेश की स्थिति और बजट का ब्योरा लिया जा रहा है। इसके लिए उच्च शिक्षा संचालनालय ने क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर संचालकों को पत्र भेजा है।
रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग कॉलेजों की स्थिति की समीक्षा करेगा। फिलहाल कॉलेजों के विलय को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।