महिला आरक्षण पर आर-पार; 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र, निंदा प्रस्ताव लाएगी साय सरकार
NEWS IN SHORT
- 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा में विशेष सत्र होगा
- महिला आरक्षण कानून और 131वें संवैधानिक संशोधन पर निंदा प्रस्ताव लाएगी सरकार
- मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर कड़ा हमला करते हुए महिला सशक्तिकरण को लेकर आरोप लगाए
- केंद्र सरकार के महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि
- सत्र में महिला आरक्षण पर तीखी बहस की उम्मीद
NEWS IN DETAIL
Raipur। छत्तीसगढ़ में 27 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें राज्य सरकार महिला आरक्षण कानून और 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाएगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र राजनीति में बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 19 अप्रैल को रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के रवैये के कारण महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना अधूरा रह गया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन ने देश की 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों को तोड़ा है। साथ ही, उन्होंने बताया
कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के तहत महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है और विधानसभा में भी 21-22 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है।
विपक्ष पर निशाना, महिला सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इंडी गठबंधन फूट डालो और राज करो की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कुछ दलों पर धर्म के आधार पर आरक्षण की बात करने का आरोप लगाते हुए समाज को बांटने की
कोशिश की। साय का कहना था कि यह राजनीति देश और समाज दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने वालो को जल्द ही जवाब मिलेगा।
केंद्र सरकार से उम्मीदें
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिला अधिकारों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उनके अधिकारों में कोई भी अड़चन नहीं आने दिया जाएगा । साय ने विश्वास जताया कि भविष्य में महिला आरक्षण को लेकर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
विशेष सत्र में हो सकती बहस
इस विशेष सत्र को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। महिला आरक्षण पर सरकार और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है।
यह सत्र न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। महिला सशक्तिकरण और आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार चर्चा में है, और इस सत्र के बाद राजनीति में इसे लेकर नई दिशा देखने को मिल सकती है।
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