वन्यजीवों की तस्करी का महाराष्ट्र कनेक्शन, CBI से जांच करने छग ने लिखा लेटर

VINAY VERMA | Sept 01, 2026, 17:46 IST
छत्तीसगढ़ में बाघों की तस्करी का बड़ा खुलासा
छत्तीसगढ़ में बाघों की तस्करी का बड़ा खुलासा
छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी मामले में महाराष्ट्र कनेक्शन सामने आने के बाद वन विभाग ने CBI जांच की सिफारिश की है। तीन बाघों की खाल, शिकार सामग्री और नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार का मामला अब सिर्फ जंगल और शिकारी तक सीमित नहीं रहा। इस पूरे कांड में महाराष्ट्र पुलिस की इंटेलिजेंस विंग से जुड़े दो आरोपियों का नाम सामने आने के बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अब इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। वन विभाग ने राज्य के गृह विभाग को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की है। विभाग को शुरुआती जांच में अंतरराज्यीय कनेक्शन और बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के संकेत मिले हैं।



तीन बाघों की खाल, नौ गिरफ्तार

मामले की शुरुआत 29 जून को हुई। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा के पास दो संदिग्धों बियरी गेडाम और बाबूराव मडावी को पकड़ा गया। उनके कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और महाराष्ट्र नंबर की बाइक बरामद हुई।


दोनों महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से छत्तीसगढ़ की तरफ आ रहे थे। पूछताछ में गेडाम ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल ब्रांच का कांस्टेबल बताया। मडावी ने खुद को गढ़चिरौली पुलिस का मुखबिर बताया।



जंगल में मिला शिकार का सामान

पूछताछ के बाद जांच टीम ने बीजापुर जिले के नेतीवाड़ा और महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में तलाशी ली। यहां से शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 पंजे, चार कैनाइन दांत और अन्य सामान बरामद किया गया।


इसके बाद 5 जुलाई को इंद्रावती नदी के किनारे तीसरे बाघ की खाल बरामद हुई। इस कार्रवाई में सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 6 जुलाई को सभी को कोर्ट में पेश किया गया। अब तक इस मामले में नौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।



चार आरोपी महाराष्ट्र से

वन विभाग की रिपोर्ट ने मामले की गंभीरता और बढ़ा दी है। गिरफ्तार नौ आरोपियों में चार महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। इनमें गेडाम और मडावी का संबंध महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस नेटवर्क से बताया गया है। यही कड़ी अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है। वन विभाग को आशंका है कि इंद्रावती नदी के आसपास के दुर्गम इलाकों का इस्तेमाल वन्यजीवों की अवैध तस्करी के लिए किया जा रहा था।



देश-विदेश तक नेटवर्क का शक

वन विभाग के मुताबिक शुरुआती जांच में शिकार सिंडिकेट की कड़ियां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों से जुड़ती दिखाई दे रही हैं। आशंका है कि बाघों के अंगों की तस्करी का नेटवर्क प्रदेश की सीमा से बाहर तक फैला हो सकता है। इसी वजह से विभाग का मानना है कि जांच केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित रखकर पूरी सच्चाई सामने लाना मुश्किल होगा। दूसरे राज्यों में भी गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।



ब्ठप् के लिए गृह विभाग को पत्र

वन विभाग ने गृह विभाग को भेजे पत्र में साफ तौर पर ब्ठप् से जांच कराने की मांग की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, छत्तीसगढ़ वन बल और मुख्य वन्यजीव संरक्षक की ओर से ब्ठप् जांच की सिफारिश को प्रशासनिक मंजूरी भी मिलने की बात पत्र में कही गई है। अब गेंद राज्य गृह विभाग के पाले में है। विभाग से जल्द CBI को जांच सौंपने के लिए पत्राचार करने और कार्रवाई से वन विभाग को अवगत कराने को कहा गया है।



वर्दीधारी आरोपी ने बढ़ाई चिंता

मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े गेडाम की गिरफ्तारी है। गेडाम को 2021 में नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली में उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिल चुका है। गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने गेडाम और मडावी दोनों को निलंबित कर दिया है। गढ़चिरौली पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मुताबिक दोनों से पूछताछ जारी है।



पुलिस का कहना है कि अभी तक प्रथम दृष्टया उनकी भूमिका छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार तक सीमित दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र में शिकार की किसी अन्य घटना से उनका लिंक अब तक नहीं मिला है।



बर्खास्तगी की तैयारी

नागपुर रेंज के आईजी संदीप पाटिल ने गेडाम की कथित संलिप्तता को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग ऐसे अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रखता है और दोनों को सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।



सवाल सिर्फ तीन खालों का नहीं

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बाघों के शिकार में दूसरे राज्य की पुलिस इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है, तो क्या यह सिर्फ स्थानीय शिकार का मामला है या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? बाघों की खाल और अंग आखिर कहां भेजे जाने थे? क्या इंद्रावती के जंगल लंबे समय से तस्करों का रास्ता बने हुए हैं? और क्या जांच में अभी और बड़े नाम सामने आएंगे?



टाइगर कंजर्वेशन पर बढ़ा दबाव

महाराष्ट्र में 2025 के दौरान 41 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। इनमें बड़ी संख्या में मौत प्राकृतिक कारणों और क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़ी बताई गई, लेकिन कुछ मामलों में शिकार की आशंका भी जांच के दायरे में है।



छत्तीसगढ़ में सामने आया यह मामला अब सिर्फ वन्यजीव अपराध नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क, पुलिस कनेक्शन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की संभावित कड़ी बन चुका है। CBI जांच होती है तो जंगल के भीतर चल रहे इस पूरे खेल की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार मामले की जांच CBI को क्यों सौंपने की मांग की गई है?
    मामले में अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आने और महाराष्ट्र पुलिस इंटेलिजेंस से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वन विभाग ने बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की आशंका जताई है। इसी वजह से CBI जांच की मांग की गई है।
  2. बाघ शिकार मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    इस मामले में अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके पास से तीन बाघों की खाल, पंजे, दांत और शिकार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई है।
  3. बाघ शिकार मामले में महाराष्ट्र कनेक्शन क्या है?
    गिरफ्तार आरोपियों में चार महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। इनमें एक आरोपी महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल ब्रांच का कांस्टेबल और दूसरा पुलिस का मुखबिर बताया गया है, जिससे जांच की गंभीरता बढ़ गई है।

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