करोड़ों के निर्माण मे बड़ा खेल, मनरेगा से डेढ़ गुना अधिक लागत में आरईएस बना रहा डेम, गड़बड़ी छिपाने की कोशिश शुरु
RAIPUR. छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट का रिपोर्ट अधिकारी अपने मन से तैयार कर रहे हैं। इसका खुलासा सरगुजा संभाग में चल रहे चेकडैम निर्माण में हुआ है। सरकार संभाग के 2 दर्जन गांवों में चेकडैम बनवा रही है। ये निर्माण मनरेगा और ग्रामीण स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कर रहा है। हैं। मनमाने ढ़ंग से हो रहे निर्माण का खुलासा होने के बाद जांच का आदेश हुआ है। लेकिन स्थानीय लोग जांच एजेंसी पर ही सवाल उठा रहे हैं।
मनरेगा बनाम आरईएस में अंतर
सरकार जल संचयन के इस प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। मनरेगा योजना के तहत 12 मीटर चेक डैम लगभग 19 लाख में बन रहा है। वहीं ग्रामीण स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 9 मीटर चेक डैम को लगभग 24 लाख की लागत से बना रहा है। एक ही क्षेत्र में अलग-अलग लागत ने पूरे निर्माण को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। सवाल उठ रहा कि जब आरईएस विभाग के डैम की साइज कम तो लागत कैसे बढ़ गई?
मशीनों से काम, नियम ताक पर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि श्रम आधारित योजना में मजदूरों की जगह मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। यह सीधा नियमों का उल्लंघन है, जिससे मजदूरों को मिलने वाला रोजगार भी प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि गड़बड़ी छिपाने के लिए सारा खेल चल रहा। ग्रामीणों को दूर कर मशीनों के जरिए मनमाने तरीके से निर्माण की योजना है।
दलालों की एंट्री, खेल और गहरा
चेक डैम स्वीकृति के नाम पर क्षेत्र में दलालों के सक्रिय हो गए हैं। डैम की स्वीकृति कहां दिलवानी है यह सब दलाल तय कर रहे हैं। जिसके एवज में मोटी रकम वसूल रहे हैं। भाजपा किसान मोर्चा के प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मुन्ना लाल चौधरी पार्टी फोरम पर शिकायत करने का कह रहे।
विभागीय जांच पर उठे सवाल
मामले के गड़बड़ी सामने आने के बाद विभाग ने अपने ही अधिकारियों की टीम से जांच कराने का फैसला लिया है। एसडीओ और इंजीनियरों की टीम बनाई गई है। लेकिन अब इस जांच कमेटी पर ही सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि विभाग खुद अपने अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता है? वह भी तब, जब निर्माण की स्वीकृति उच्च अधिकारियों ने ही दी होगी।
लीपापोती की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी और सच्चाई सामने नहीं आएगी। जांच टीम द्वारा विभाग को क्लीन चिट देने की आशंका भी लोगों के बीच जताई की जा रही है। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल उठ रहा है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
बजट खर्च करने की जल्दबाजी
संभाग के कई नालों पर एक साथ कई चेकडेम की मंजूरी देकर तकनीकी मानकों की भी धज्जियां उड़ाई गई हैं। जल संरक्षण के बजाय अनुपयोगी स्थानों पर निर्माण कराकर केवल सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की साजिश रची जा रही है। ताकि अगले वित्तीय वर्ष से पहले सारा पैसा खर्च कर लिया जाए।
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