सीएम हेल्पलाइन पर मिली नाली की सफाई और पीने के पानी जैसी समस्याएं भी नहीं सुलझा पाए अधिकारी, शिकायतें ऊपर तक पहुंचीं
विभाग ने साफ कहा है कि अधिकारियों की लापरवाही से शासन और विभाग की छवि जनता के बीच खराब हो रही है। सभी से 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो बिना किसी और सूचना के एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशिक्षण मिला, फिर भी नहीं सुधरा कामकाज
नगरीय प्रशासन संचालनालय ने अपने नोटिस में CM हेल्पलाइन योजना को राज्य सरकार की प्राथमिकता वाला कार्यक्रम बताया है। इस योजना का मकसद आम लोगों की शिकायतों का पारदर्शी और तय समय में निराकरण करना है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को शिकायत दर्ज करने, समय-सीमा में निराकरण करने और पोर्टल चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया था।
इसके बावजूद शिकायतों के निपटारे में लापरवाही सामने आई। यानी अधिकारियों को जिम्मेदारी भी पता थी और काम करने का तरीका भी सिखाया गया था, लेकिन इसके बाद भी शिकायतें लंबित रहीं।
नाली और पानी की शिकायतें भी नहीं सुलझीं
कार्रवाई की सबसे अहम वजह यह है कि शहरों में नाली सफाई और पेयजल आपूर्ति जैसी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर लोग लगातार शिकायतें कर रहे थे। इन शिकायतों को तय समय में हल करने के बजाय संबंधित अधिकारी उन्हें लटकाते रहे।
CM हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण के लिए L-1 से L-4 तक की व्यवस्था है। इसमें सबसे पहले L-1 स्तर के अधिकारी को शिकायत का समाधान करना होता है। जरूरत पड़ने पर मामला अगले स्तर पर जाता है। लेकिन इन मामलों में L-1 स्तर पर ही शिकायतों का ठीक से निराकरण नहीं हुआ, और शिकायतें L-2 और L-3 स्तर तक पहुंच गईं।
संचालनालय ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। विभाग का कहना है कि जब छोटी और बुनियादी समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं होगा, तो जनता के बीच सरकार और नगरीय प्रशासन की छवि खराब होना स्वाभाविक है।
रायपुर से बिलासपुर और भिलाई तक कार्रवाई
जिन 9 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें अलग-अलग नगरीय निकायों के इंजीनियर, जोन कमिश्नर और सर्वेयर शामिल हैं:
हितेन्द्र यादव, जोन कमिश्नर, जोन क्रमांक-9, नगर निगम रायपुर
भूपेन्द्र उपाध्याय, जोन कमिश्नर, नगर निगम बिलासपुर
रंजना अग्रवाल, जोन कमिश्नर, नगर निगम बिलासपुर
बसंत जायसवाल, प्रभारी कार्यपालन अभियंता, नगर निगम चिरमिरी
धन्नूलाल देवांगन, प्रभारी कार्यपालन अभियंता, नगर निगम बीरगांव
आलोक पसीने, प्रभारी कार्यपालन अभियंता, नगर निगम भिलाई चरोदा
विनिता वर्मा, कार्यपालन अभियंता, नगर निगम दुर्ग
राहुल थवानी, उप अभियंता, नगर पालिका गोबरानवापारा
उमेश तिवारी, सर्वेयर, नगर निगम चिरमिरी
7 दिन में जवाब नहीं तो एकतरफा कार्रवाई
संचालनालय ने सभी अधिकारियों से पूछा है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 और संबंधित सेवा नियमों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। अधिकारियों को नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है।
निर्धारित समय में जवाब नहीं देने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर विभाग एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद इन अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
यह खबर क्यों जरूरी है
शहरों में नाली सफाई और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं। CM हेल्पलाइन पर शिकायतों के समय पर निपटारे से जनता का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर बना रहता है। इस नोटिस से यह संदेश गया है कि शिकायतों की लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी।
FAQ
सवाल 1: किन अधिकारियों को नोटिस मिला है?
जवाब: नगर निगम रायपुर, बिलासपुर, चिरमिरी, बीरगांव, भिलाई चरोदा, दुर्ग और नगर पालिका गोबरानवापारा के 9 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।
सवाल 2: नोटिस का जवाब कितने दिन में देना होगा?
जवाब: अधिकारियों को नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
सवाल 3: जवाब संतोषजनक न होने पर क्या होगा?
जवाब: विभाग के अनुसार बिना किसी और सूचना के एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।