छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से राकेश जैन को जमानत, जानिए कैसे चलता था कथित वसूली का सिंडिकेट

Umeshwari Baghel | Nov 07, 2026, 19:35 IST
छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाला, आरके जैन को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी घोटाले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के कथित सहयोगी राकेश जैन उर्फ आरके जैन को नियमित जमानत दे दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अवैध वसूली से जुटाई गई रकम को खपाने में मदद की। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है।

कि कोयला परिवहन के नाम पर कथित वसूली का खेल कैसे शुरू हुआ और इसमें कारोबारी, अफसर और राजनीतिक लोगों के नाम कैसे जुड़े।



जमानत का फैसला और उसकी सीमा

आज 7 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राकेश जैन की नियमित जमानत मंजूर की। जमानत ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तों पर दी गई है। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि शुरुआती एफआईआर में उनका नाम नहीं था। उन्हें 10 मार्च 2026 को दाखिल चौथे पूरक आरोपपत्र में आरोपी बनाया गया था।



राकेश जैन को 11 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली है। यह समझना जरूरी है कि जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं कि आरोप खत्म हो गए हैं। शीर्ष अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।




आरोप क्या हैं?

जांच एजेंसियों के अनुसार राकेश जैन को सूर्यकांत तिवारी का करीबी सहयोगी बताया गया है। अभियोजन का आरोप है कि कोयला परिवहन के दौरान कारोबारियों से प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली की जाती थी। वसूली से जुटाई गई बड़ी रकम को अलग-अलग तरीकों से खपाने और उसके प्रबंधन में जैन की भूमिका होने का आरोप है।



वसूली की शुरुआत कैसे हुई

इस मामले की जड़ 15 जुलाई 2020 के एक आदेश से जोड़ी जाती है। इस आदेश के बाद कोयला परिवहन से जुड़े डिलीवरी ऑर्डर यानी डीओ के सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। इसमें खनिज कार्यालय की भूमिका अहम हो गई।




जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित अवैध वसूली का नेटवर्क बनाया गया। आरोप है कि रकम नहीं देने पर परमिट या परिवहन की मंजूरी अटकाई जाती थी। इस तरह कारोबारियों पर अवैध भुगतान का दबाव बनाया जाता था।



सूर्यकांत तिवारी की भूमिका

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कारोबारी सूर्यकांत तिवारी पर इस नेटवर्क के संचालन का आरोप लगाया है। एजेंसियों के अनुसार कोरबा, रायगढ़, सूरजपुर और बिलासपुर सहित कई कोयला उत्पादक जिलों में वसूली की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों को दी गई थी। नकदी रायपुर पहुंचाई जाती थी, जहां उसका हिसाब और कथित बंटवारा होता था।



ED ने फरवरी 2025 में सूर्यकांत तिवारी की लगभग 50 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति कुर्क करने की जानकारी दी थी। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत हुई थी।




सुप्रीम कोर्ट की पिछली राहत

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के कुछ आरोपियों को अंतरिम जमानत दी थी। इनमें सूर्यकांत तिवारी, निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू और समीर विश्नोई, तथा सौम्या चौरसिया शामिल थे। अदालत ने इन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्तों पर छोड़ा था।



रकम का आंकड़ा और अलग-अलग दावे

मामले में अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े सामने आए हैं। ED के दावे के अनुसार नेटवर्क से करीब 540 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय सामने आई। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह आंकड़ा 570 करोड़ रुपए बताया गया है। EOW की 2024 की शुरुआती चार्जशीट में करीब 318 करोड़ रुपए की अवैध वसूली का उल्लेख था। ये आंकड़े जांच के अलग-अलग चरणों से जुड़े हैं। इन्हें अदालत में सिद्ध हो चुकी रकम नहीं माना जाना चाहिए।




आयरन पैलेट तक पहुंचे आरोप

जांच का दायरा कोयले से आगे बढ़कर आयरन पैलेट तक पहुंचने का आरोप भी है। आरोप है कि जनवरी 2022 में ट्रांजिट पास की व्यवस्था लागू होने के बाद कारोबारियों से प्रति टन 100 रुपए की वसूली शुरू हुई। EOW की अक्टूबर 2026 की छठी पूरक चार्जशीट में इस पहलू को शामिल किया गया है, जिसमें तत्कालीन खनिज संचालक और IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की कथित भूमिका का जिक्र है।



अधिकारी और राजनीतिक नाम

इस मामले में समीर विश्नोई, रानू साहू और सौम्या चौरसिया जैसे नाम जांच में आए हैं। अक्टूबर 2026 में EOW ने करीब 9500 पन्नों की छठी पूरक चार्जशीट पेश करने की बात कही है, जिसमें कुछ नए आरोपियों के नाम शामिल हैं। किसी का नाम चार्जशीट में होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।



आगे क्या?

राकेश जैन की रिहाई ट्रायल कोर्ट की शर्तों पर होगी। उनके खिलाफ आरोपों की सुनवाई ट्रायल में होगी, जहां गवाहों के बयान और दस्तावेजी सबूतों की जांच होगी। यह मामला राज्य में खनिज परिवहन और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता के सवाल को भी सामने लाता है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

कोयला राज्य के राजस्व और खनिज व्यवस्था से जुड़ा है। जब परिवहन की मंजूरी के नाम पर कथित वसूली के आरोप सामने आते हैं, तो इससे कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ता है। साथ ही इस मामले में प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल भी जुड़ा है। अदालत के फैसलों से यह तय होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और जवाबदेही कैसे तय होती है।



FAQs

सवाल 1: राकेश जैन को किस मामले में जमानत मिली है?



जवाब: छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी मामले में। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी है, जो ट्रायल कोर्ट की शर्तों पर होगी।



सवाल 2: कथित वसूली कितनी थी?



जवाब: आरोप है कि कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की वसूली होती थी। कुल रकम के आंकड़े एजेंसियों के अलग-अलग दावों में हैं, जो अदालत में साबित होने हैं।



सवाल 3: क्या जमानत से आरोप खत्म हो गए हैं?



जवाब: नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। आरोपों पर सुनवाई ट्रायल में होगी।

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