छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला: देवेंद्र यादव को ईओडब्ल्यू का नोटिस, सीक्रेट डायरी में आया था नाम
समझें क्या है पूरा मामला
- 15 जुलाई 2020 से कोयला परिवहन की अनुमति मैन्युअल प्रक्रिया से मिलने लगी।
- आरोप है कि कोयला कारोबारियों से हर टन 25 रुपए की अवैध वसूली हुई।
- जुलाई 2020 से जून 2022 तक करीब 540 करोड़ रुपए जुटाने का आरोप है।
- जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी की डायरी में देवेंद्र यादव का नाम मिला।
- देवेंद्र यादव को ईओडब्ल्यू ने 5 अक्टूबर को पेश होने का नोटिस दिया है।
कोल लेवी घोटाला कैसे शुरू हुआ?
अब जरा पीछे चलते हैं। 15 जुलाई 2020 को कोयला परिवहन की ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था में बदलाव हुआ। इसके बाद मैन्युअल (हाथ से भरी जाने वाली) मंजूरी जरूरी हो गई। अनुमति के लिए खनन कार्यालय से मंजूरी लेनी पड़ती थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक यही प्रक्रिया बाद में अवैध वसूली का जरिया बनी। कारोबारियों पर तय रकम के ऊपर 25 रुपए प्रति टन देने का दबाव था।
25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली का आरोप
सोचिए एक बार। हर टन पर 25 रुपए बहुत छोटी रकम लगती है। क्या छोटी रकम भी बड़े घोटाले की जड़ बन सकती है? लेकिन दो साल में करीब 540 करोड़ रुपए जुटाने का आरोप है। हिसाब लगाएं तो यह औसतन हर महीने साढ़े 22 करोड़ रुपए बैठता है।
तीन जिलों में चली वसूली की व्यवस्था
जांच में रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर का नाम सामने आया है। ये कोयला उत्पादक जिले हैं। इन्हीं जिलों में वसूली की व्यवस्था चलने की बात सामने आई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के हालिया आदेशों में एजेंसी का यही आरोप दर्ज है। इनमें 15 जुलाई 2020 के आदेश की भी बात है।
सूर्यकांत तिवारी की डायरी का राज
जांच एजेंसियों के अनुसार सूर्यकांत तिवारी इस मामले का मुख्य आरोपी है। उससे जुड़ी जांच में डायरी और दूसरे दस्तावेज मिले। इनमें पैसों के लेन-देन का ब्योरा होने की बात सामने आई।
इसी कड़ी में देवेंद्र यादव का नाम सामने आया। सितंबर के आखिरी सप्ताह में रायपुर के ईओडब्ल्यू दफ्तर में उनसे पूछताछ हुई। यह पूछताछ दो घंटे से ज्यादा चली। जांच के बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। लेकिन यादव इन आरोपों को नहीं मानते।
H3: देवेंद्र यादव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
देवेंद्र यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। अभी ये आरोप जांच एजेंसी के स्तर पर हैं। कानून में आरोपी का मतलब दोषी नहीं होता। दोष अदालत में साबित होना बाकी है। डायरी में दर्ज रकम और लेन-देन का असल संबंध क्या था? एजेंसी यही पता लगा रही है।
540 करोड़ रुपए का हिसाब क्या?
540 करोड़ रुपए यानी 5 अरब 40 करोड़ रुपए। जांच में आरोप है कि अवैध रकम तीन जगह लगी। ये हैं राजनीतिक गतिविधियां, चुनावी खर्च और संपत्तियों की खरीद।
प्रवर्तन निदेशालय (ED - Enforcement Directorate) ने अपनी जांच में यही रकम बताई। ईडी के मुताबिक इसका एक हिस्सा नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचा।
रायपुर विशेष अदालत में कब पेशी?
छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू (EOW - Economic Offences Wing) ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में देवेंद्र यादव को 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे पेश होना है। पेशी रायपुर विशेष अदालत में होगी।
आरोप पत्र में एजेंसी अदालत को जांच में मिले सबूत और आरोप बताती है। अब सवाल है कि 5 अक्टूबर को अदालत में क्या होगा?
जनवरी 2024 से अब तक का सफर
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जनवरी 2024 में अपराध दर्ज किया था। छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में तत्कालीन अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक लोगों के नाम आए। देवेंद्र यादव का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल किया गया था। करीब पौने तीन साल बाद मामला अदालत की दहलीज पर पहुंचा है। अब निगाहें 5 अक्टूबर की पेशी पर हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है:
यह मामला सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठाता है। कोयला खनिज संपदा है और इसका परिवहन नियमों से बंधा है। आरोप है कि अनुमति की प्रक्रिया वसूली का जरिया बनी। कानून के सामने सब बराबर हैं, चाहे आरोपी विधायक हो या कारोबारी। साथ ही हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का हक है। दोष साबित होने तक कोई दोषी नहीं माना जाता। जनता के लिए जरूरी है कि जांच और सुनवाई पूरी पारदर्शिता से हो।