डिजिटल नवाचारों से सुशासन सशक्त... सेवा सेतु से लेकर वन अंचल में मोबाइल नेटवर्क से नागरिकों को मिल रही सुविधाएं

The Sootr | Jul 26, 2026, 14:47 IST
डिजिटल नवाचारों से सुशासन सशक्त
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डिजिटल नवाचारों से सुशासन को नई मजबूती मिल रही है। सेवा सेतु पोर्टल, भारतनेट phase-3, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और एआई आधारित सेवाओं से ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों तक पारदर्शिता और सुलभता पहुंची है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में अब सरकारी सेवाएं तेजी से डिजिटल हो रही हैं। इसका असर शहरों के साथ दूर-दराज के गांवों और वनांचल क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के कम चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और कई काम अब ऑनलाइन ही हो रहे हैं।



सेवा सेतु, भारतनेट, मोबाइल नेटवर्क विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रदेश में सुशासन को नई मजबूती मिली है। सरकार का ध्यान ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जहां लोगों को सरकारी सेवाएं समय पर, पारदर्शी तरीके से और घर के करीब मिल सकें। इसी दिशा में पिछले ढाई वर्षों में कई बड़े डिजिटल बदलाव किए गए हैं।



सेवा सेतु बना लोगों का डिजिटल सहारा

सरकारी सेवाओं को एक मंच पर लाने के लिए शुरू किया गया सेवा सेतु आज प्रदेश का सबसे बड़ा डिजिटल नागरिक सेवा मंच बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 29 अप्रैल 2026 को इसका उन्नत संस्करण शुरू किया था। आज इस पोर्टल पर 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध हैं। पिछले ढाई वर्षों में 85 लाख से अधिक आवेदन सेवा सेतु के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। इनमें से 78 लाख से ज्यादा आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है।



ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला है। अब राशन कार्ड, विवाह पंजीकरण, नल कनेक्शन समेत कई जरूरी सेवाओं के लिए दूर-दूर तक जाने की जरूरत कम हुई है। लोग अपने क्षेत्र के सेवा केंद्रों के माध्यम से या ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। सेवा सेतु में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए जानकारी तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इससे पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और पारदर्शी बनी है।



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वनांचल तक पहुंच रहा मोबाइल नेटवर्क

डिजिटल सुविधा तभी सफल मानी जाती है, जब वह आखिरी गांव तक पहुंचे। इसी सोच के साथ राज्य में दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक मोबाइल नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। भारत सरकार की डिजिटल भारत निधि के तहत आकांक्षी जिलों, एलडब्ल्यूई फेज-2 और 4जी सैचुरेशन योजना के माध्यम से लगातार नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं।



जनवरी 2024 से अब तक 1,273 मोबाइल टावर ऑन-एयर किए जा चुके हैं। इससे ऐसे गांव भी मोबाइल नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, जहां पहले संपर्क करना मुश्किल था।



भारतनेट से गांवों तक पहुंचेगा इंटरनेट

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा मजबूत करने के लिए भारतनेट फेज-3 पर भी तेजी से काम हो रहा है। इस परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।



इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए भारत सरकार ने 3,928 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसके पूरा होने पर गांवों में तेज इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और फाइबर टू द होम (FTTH) कनेक्टिविटी का विस्तार होगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल कारोबार को भी नई गति मिलेगी।



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डिजिटल प्लेटफॉर्म से बदली व्यवस्था

सरकार ने अलग-अलग विभागों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज तेज और पारदर्शी हुआ है। खनिज ऑनलाइन 2.0 इसके प्रमुख उदाहरणों में शामिल है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 30,311 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी के लिए एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (IWMMS) शुरू की गई है। इसके माध्यम से अपशिष्ट के परिवहन और निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।



उद्योगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया भी डिजिटल हुई है। वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से 19 विभागों की 151 सेवाओं को एक मंच पर जोड़ा गया है। इससे निवेशकों को समयबद्ध ऑनलाइन स्वीकृति मिल रही है। बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए पारस पोर्टल तैयार किया गया है। इसके जरिए राज्य की प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है।



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बस्तर से लेकर पूरे प्रदेश तक डिजिटल निगरानी

सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर भी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। बस्तर पोर्टल के माध्यम से बस्तर संभाग के सात जिलों और अन्य तीन नक्सल-मुक्त जिलों में पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की निगरानी की जा रही है।



वहीं डिजिटल द्वार-प्लेटफॉर्म के जरिए सभी सरकारी विभागों के बीच सुरक्षित और मानकीकृत डेटा साझा करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और लोगों को सेवाएं देने में तेजी आएगी।



छत्तीसगढ़ में हो रहे ये डिजिटल बदलाव अब सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं हैं। इनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखने लगा है। गांवों में ऑनलाइन सेवाएं पहुंच रही हैं, वनांचल मोबाइल नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, हाई-स्पीड इंटरनेट का दायरा बढ़ रहा है और सरकारी काम पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होते जा रहे हैं। यही बदलाव छत्तीसगढ़ को डिजिटल सुशासन के नए मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रहा है।


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