8 अक्टूबर को किसानों का हल्लाबोल; ट्रैक्टर से करेंगे सरकार का घेराव, गन्ना भुगतान समेत 11 मांगें को लेकर प्रदर्शन
प्रदेश स्तर पर भी 8 अक्टूबर को सभी 33 जिलों में किसान अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
गन्ने का 30 करोड़ अटका
किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा सरदार वल्लभभाई पटेल शक्कर कारखाने से जुड़ा है। संघ का दावा है कि किसानों का 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का गन्ना भुगतान अब भी अटका हुआ है। इसके साथ ही गन्ने का लंबित 100 रुपए बोनस देने की मांग भी है। किसान चाहते हैं कि भुगतान में देरी का सिलसिला खत्म हो और मिल की क्षमता भी बढ़ाई जाए।
धान के दाम पर सवाल
किसान संघ ने धान के समर्थन मूल्य में संशोधनकी मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसल का दाम उस हिसाब से नहीं बढ़ रहा। कृषक उन्नति योजना के लाभों का दायरा बढ़ाने की मांग भी आंदोलन में शामिल है। यानी किसान केवल बोनस नहीं, बल्कि फसल की कीमत और सरकारी सहायता दोनों में बदलाव चाहते हैं।
खाद-बीज की कमी से नाराजगी
किसानों का एक और बड़ा मुद्दा खाद और बीज है। संघ का आरोप है कि जरूरत के समय यूरिया और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता को लेकर किसानों को परेशानी होती है। ऐसे में सवाल है कि जब बुवाई और खेती का समय आता है, तब किसान खाद-बीज के लिए भटकने को क्यों मजबूर हों? संघ ने इस समस्या का स्थायी समाधान मांगते हुए आंदोलन का ऐलान किया है।
ट्रैक्टरों से घेरेंगे रास्ते
कवर्धा में प्रमुख प्रवेश मार्गों पर ट्रैक्टर और किसान प्रतिनिधिमंडल जुटेंगे। हालांकि संगठन ने साफ किया है कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा। किसानों से हरी कीर्तन करते हुए प्रदर्शन करने और एंबुलेंस समेत आपातकालीन वाहनों का रास्ता खुला रखने को कहा गया है। इससे संकेत है कि आंदोलन बड़ा होगा, लेकिन यातायात और जरूरी सेवाओं को बाधित न करने की कोशिश रहेगी।
रायपुर के बाद अब प्रदेशभर में
इससे पहले किसान संघ रायपुर के आंबेडकर चौक पर भी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुका है। हाल के दिनों में किसानों के समर्थन मूल्य और बकाया भुगतान से जुड़े आंदोलन भी रायपुर में सामने आए हैं। अब भारतीय किसान संघ ने 8 अक्टूबर को प्रदेश के सभी 33 जिलों में एक साथ ज्ञापन और आंदोलन का कार्यक्रम रखा है।
सरकार के सामने 11 मांगें
प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर ने किसानों से जिला मुख्यालय पहुंचने की अपील की है। संगठन का कहना है कि 11 सूत्रीय मांगों और सुझावों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन दिया जाएगा। कवर्धा में ट्रैक्टर रैली और अनिश्चितकालीन धरना इस प्रदेशव्यापी अभियान का सबसे प्रमुख हिस्सा होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या कदम उठाती है।
FAQ
- किसानों की 11 सूत्रीय मांगें क्या हैं?
किसानों की 11 सूत्रीय मांगों में मुख्य रूप से गन्ने के भुगतान, धान के समर्थन मूल्य में संशोधन, खाद और बीज की उपलब्धता में सुधार, और कृषक उन्नति योजना के लाभों का दायरा बढ़ाने की मांग शामिल है। - 8 अक्टूबर को किसान आंदोलन का क्या कार्यक्रम है?
8 अक्टूबर को सभी 33 जिलों में किसान कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और कवर्धा जैसे प्रमुख स्थानों पर ट्रैक्टर रैली का आयोजन करेंगे। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने का निर्णय लिया है। - किसानों के इस आंदोलन का सरकार पर क्या असर होगा?
किसानों के इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उनकी लंबित मांगों को सरकार के समक्ष रखना है। आंदोलन के माध्यम से किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान निकालेगी, विशेष रूप से गन्ने के भुगतान और समर्थन मूल्य के मामलों में।