अब नक्शे से चलेगा छत्तीसगढ़ का विकास, AI चैटबॉट बताएगा कहां चाहिए बैंक, कहां लगेगा उद्योग और कहां पहुंचेंगी सरकारी योजनाएं।

VINAY VERMA | Nov 04, 2026, 21:46 IST
छत्तीसगढ़ में GIS पोर्टल और AI चैटबॉट से विकास योजनाएं बनाने में मिलेगी मदद
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब विकास योजनाओं की दिशा तय करने के लिए सिर्फ फाइलों और सरकारी आंकड़ों पर निर्भरता कम करने की तैयारी है। सरकार भौगोलिक आंकड़ों यानी GIS (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) की मदद से यह पता लगा सकेगी कि किस इलाके में किस तरह की सुविधा की जरूरत है।

कहां उद्योग लगाया जा सकता है, किन क्षेत्रों में बैंक नहीं हैं और कहां विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके लिए राज्य में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम तैयार किया गया है।



पोर्टल की खास बात यह है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट भी जोड़ा गया है। अब अधिकारियों को किसी जगह की जानकारी खोजने के लिए लंबी सूची खंगालने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ जगह का नाम लिखते ही संबंधित इलाके का नक्शा और उससे जुड़ी जानकारी सामने आ जाएगी।




190 डेटा लेयर, 35 से ज्यादा टूल्स तैयार

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) ने राज्य के लिए 190 से अधिक GIS डेटा लेयर को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा है। इन आंकड़ों के आधार पर 35 से ज्यादा GIS आधारित टूल्स और समाधान विकसित किए गए हैं।



इनका इस्तेमाल अलग-अलग विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकेंगे। इस तकनीक से अधिकारियों को किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं की जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे योजनाएं बनाते समय यह समझना आसान होगा कि किस इलाके में किस काम की ज्यादा जरूरत है।



चैटबॉट में नाम लिखते ही खुलेगा नक्शा

जियो-पोर्टल का सबसे नया फीचर AI चैटबॉट है। इसके जरिए अधिकारी किसी गांव, शहर, स्थान, सरकारी संपत्ति या दूसरे स्थल का नाम लिखकर सीधे उसकी लोकेशन तक पहुंच सकेंगे। अभी तक पोर्टल पर किसी जगह को खोजने के लिए ड्रॉप-डाउन मेन्यू और लंबी सूची का सहारा लेना पड़ता था।




नई सुविधा में सिर्फ नाम लिखना होगा। इसके बाद पोर्टल खुद संबंधित जगह पर पहुंच जाएगा। उस स्थान से जुड़ी भौगोलिक जानकारी और जरूरी दिशा-निर्देश भी स्क्रीन पर दिखाई देंगे।




कहां लगेगा उद्योग, GIS करेगा मदद

इस तकनीक का इस्तेमाल औद्योगिक विकास में भी शुरू किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CSIDC) औद्योगिक जमीन के चयन के लिए 'लैंड पैच एनालिसिस' का उपयोग कर रहा है।



इसके जरिए संभावित औद्योगिक जमीन की पहचान और उसका डिजिटल विश्लेषण किया जा सकेगा। यानी उद्योग लगाने के लिए कौन सी जगह बेहतर होगी, इसका फैसला उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर लेने में मदद मिलेगी।



बैंक नहीं तो कहां खुलेगी नई शाखा?

बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार में भी यह तकनीक काम आएगी। संस्थागत वित्त संचालनालय (DIF) 'बैंक कवरेज एनालिसिस' के जरिए ऐसे इलाकों की पहचान कर रहा है, जहां लोगों को बैंकिंग सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।



इस विश्लेषण से पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में नई बैंक शाखाओं की जरूरत है। इससे बैंकिंग सुविधाओं से वंचित इलाकों तक सेवाएं पहुंचाने की योजना बनाने में मदद मिलेगी।




200 से ज्यादा अधिकारियों ने समझी तकनीक

इन्हीं संभावनाओं पर चर्चा के लिए शासन में 'भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग' विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के अलग-अलग विभागों के 200 से अधिक अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।



इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने बताया कि चिप्स ने 190 से ज्यादा डेटा लेयर और 35 से अधिक GIS आधारित समाधान तैयार किए हैं। सभी जिलों के अधिकारियों को जियो-पोर्टल इस्तेमाल करने के लिए यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।



चिप्स के CEO मयंक अग्रवाल ने पोर्टल के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी। कार्यशाला में Esri India और Octave India के विशेषज्ञों ने भी तकनीक के नए उपयोग बताए।




अब असली चुनौती इस्तेमाल की होगी

जियो-पोर्टल और AI चैटबॉट से सरकारी योजनाओं की प्लानिंग में बदलाव की संभावना है। लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा, जब विभाग और जिला स्तर के अधिकारी नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करेंगे।



डेटा कितना अपडेट रहता है और उसके आधार पर तैयार योजनाएं जमीन पर कितना असर दिखाती हैं, यह भी अहम होगा। फिलहाल सरकार की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ में विकास योजनाएं जरूरत के हिसाब से बनें, न कि केवल कागजों पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर।



यह खबर क्यों जरूरी है

सरकारी योजनाएं अक्सर इस बात पर अटकती हैं कि किस गांव या इलाके में क्या चाहिए, इसका सही आकलन नहीं हो पाता। GIS पोर्टल से अधिकारियों को एक ही जगह पर भौगोलिक जानकारी, संसाधन और सुविधाएं दिख सकती हैं। इससे उद्योग, बैंक शाखा और सड़क या दूसरी सुविधाएं जरूरत वाली जगह पर पहुंचाने में मदद मिल सकती है। आम नागरिकों के लिए इसका असर तब दिखेगा, जब योजनाओं का लाभ सही इलाकों तक पहुंचेगा।



FAQ

सवाल 1: छत्तीसगढ़ का जियो-पोर्टल क्या है और इसमें क्या खास है?



जवाब: यह GIS आधारित पोर्टल है, जिसमें चिप्स ने 190 से ज्यादा डेटा लेयर जोड़ी हैं। इसमें AI चैटबॉट है, जिसमें किसी गांव, शहर या सरकारी संपत्ति का नाम लिखते ही उसकी लोकेशन और जानकारी दिख जाती है।



सवाल 2: उद्योग और बैंक शाखा के लिए यह पोर्टल कैसे काम आएगा?



जवाब: CSIDC 'लैंड पैच एनालिसिस' से औद्योगिक जमीन की पहचान कर रहा है, जबकि DIF 'बैंक कवरेज एनालिसिस' से उन इलाकों को खोज रहा है जहां बैंकिंग सुविधाएं कम हैं।



सवाल 3: यह पोर्टल किसके लिए है और कौन इसका इस्तेमाल कर सकता है?



जवाब: यह मुख्य रूप से सरकारी विभागों और जिला स्तर के अधिकारियों के लिए है। सभी जिलों के अधिकारियों को यूजर नेम और पासवर्ड जारी किए जा चुके हैं।

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