छत्तीसगढ़ में कितनी हो रही अफीम की अवैध खेती, सरकार ने कलेक्टरों से 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

VINAY VERMA | Mar 12, 2026, 23:39 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम खेती के मामले सामने आने के बाद सरकार ने कलेक्टरों को 15 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने इसे जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्ती से निपटने की बात कही है।

RAIPUR. छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती के खुलासे के बाद सरकार अचानक बेहद सख्त हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी कलेक्टरों को तत्काल सर्वे कराने कहा है। यह आदेश दुर्ग और बलरामपुर जिलों में सामने आई अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद दिया है। सरकार ने इसे प्रशासनिक साख से जुड़ा मामला मानते हुए कलेक्टरों पर जिम्मेदारी सीधे डाली।



हर जिले में संभावित क्षेत्रों की पहचान होगी

अब हर जिले में संभावित इलाकों की पहचान कर जमीन स्तर पर सर्वे जरूर होगा। कलेक्टरों को तहसील और ग्राम स्तर तक टीम बनाकर जांच आगे बढ़ानी होगी। राजस्व पुलिस और स्थानीय अमले को भी इस अभियान में जोड़ा जाएगा। सरकार चाहती है कि किसी भी खेत में अफीम की फसल छिपी न रह पाए।



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सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का संदेश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अवैध मादक पदार्थों पर सरकार जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएगी। अफीम उत्पादन और उसके अवैध कारोबार को पूरी तरह खत्म करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि ढिलाई मिलने पर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई तुरंत ही होगी। सरकार चाहती है कि प्रदेश की छवि मादक पदार्थों के कारण खराब बिल्कुल नहीं हो।



दुर्ग के समोदा से खुला था पूरा मामला

दुर्ग जिले के समोदा गांव में हाल ही अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई थी। इस मामले में स्थानीय राजनीतिक कनेक्शन और तकनीकी मदद के आरोप भी सामने खुले आए। मामले में भाजपा किसान मोर्चा से जुड़ा नेता विनायम ताम्रकार गिरफ्तार हुआ है। मामला उजागर होने के बाद सरकार पर विपक्ष और मीडिया का दबाव काफी ज्यादा बढ़ा।



पंद्रह दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट

इसी दबाव के बीच सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कदम उठाने अभी शुरू किए। कलेक्टरों को पंद्रह दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट शासन को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। रिपोर्ट के साथ यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि जिले में अफीम खेती नहीं हो रही। यदि कहीं खेती मिलती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सीधे तय होगी।



भू-अभिलेख आयुक्त ने जारी किया निर्देश

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भू-अभिलेख आयुक्त कार्यालय तुरंत सक्रिय होकर सभी जिलों को पत्र भेजा।


सभी कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजते हुए सर्वे की प्रक्रिया भी साफ तौर पर समझाई गई। पत्र में राजस्व अमले पटवारियों और स्थानीय पुलिस की भूमिका स्पष्ट तौर पर भी तय की। सर्वे के दौरान संदिग्ध खेतों की फोटो लोकेशन और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।



गांव स्तर तक निगरानी बढ़ाने का आदेश

सरकार मानती है कि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो नेटवर्क तेजी से फैल सकता। अवैध अफीम खेती से नशे का कारोबार और अपराध दोनों तेजी से बढ़ने का खतरा होगा। इसलिए प्रशासन को गांव स्तर तक सतर्क रहकर निगरानी लगातार और ज्यादा बढ़ाने कहा गया। सरकार को उम्मीद है कि इस अभियान से अवैध खेती पूरी तरह प्रदेश में रुकेगी।



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अब कलेक्टरों की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

अब निगाहें कलेक्टरों की रिपोर्ट पर टिकी हैं जो पंद्रह दिनों में जरूर सामने आएगी। यदि कई जिलों से संदिग्ध जानकारी आती है तो बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी संभव मानी जाएगी। फिलहाल सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि अफीम पर कोई समझौता बिल्कुल नहीं। अभियान के बाद प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों पर बड़ी कार्रवाई साफ तौर पर दिख सकती।





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