बहू को हाईकोर्ट की दोटूक: सास का ख्याल रखा तो ही बचेगी नौकरी, वरना बर्खास्तगी को रहें तैयार

Umeshwari Baghel | Apr 22, 2026, 14:59 IST
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हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई निजी उपहार नहीं बल्कि पूरे परिवार की मदद के लिए है, इसलिए बहू को अपनी सास का ख्याल रखना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर बहू ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो उसकी सरकारी नौकरी रद्द कर दी जाएगी।

NEWS IN SHORT

  • सास की सेवा या बर्खास्तगी: हाईकोर्ट की बहू को कड़ी चेतावनी
  • अनुकंपा नियुक्ति वसीयत नहीं, परिवार का हक: हाईकोर्ट
  • बुजुर्ग सास को बेसहारा छोड़ा तो जाएगी बहू की नौकरी
  • हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बहू निभाए बेटे जैसा फर्ज
  • भरण-पोषण नहीं तो नौकरी नहीं: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की बेंच ने साफ कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई पर्सनल गिफ्ट या वसीयत नहीं है



बल्कि यह संकट में फंसे पूरे परिवार की मदद के लिए दी जाती है। कोर्ट ने एक बहू को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने अपनी सास का भरण-पोषण नहीं किया, तो उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।



क्या है पूरा मामला?

मामला अंबिकापुर का है, जहां ज्ञांती तिवारी के पति घनश्याम तिवारी (पुलिस कांस्टेबल) का साल 2001 में निधन हो गया था। पिता की जगह उनके बेटे अविनाश तिवारी को बाल आरक्षक के रूप में नौकरी मिली।



लेकिन साल 2021 में अविनाश का निधन हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी यानी बहू नेहा तिवारी को इस शर्त पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई कि वह अपनी बुजुर्ग सास का पूरा ख्याल रखेंगी।



नौकरी मिलते ही बदल गए बहू के तेवर

सास ज्ञांती देवी का आरोप है कि जैसे ही बहू की नौकरी पक्की हुई, उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। बहू ने न केवल उनके साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि उन्हें दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया।



परेशान होकर बुजुर्ग सास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि बहू की नियुक्ति रद्द कर उनकी अविवाहित पोती प्रीति तिवारी को नौकरी दी जाए।



कोर्ट ने याद दिलाई जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बहू ने नौकरी लेते समय एक शपथ-पत्र (Affidavit) दिया था, जिसमें सास की देखभाल का वादा किया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया



अनुकंपा नियुक्ति का मकसद मृतक के पूरे परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है।



बहू को अपने पति की जगह नौकरी मिली है, इसलिए उस पर वही कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, जो एक बेटे की अपनी मां के प्रति होती है।



सरकारी नियम के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी अपने आश्रितों को बेसहारा छोड़ता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।



हाईकोर्ट ने फिलहाल बहू को आखिरी हिदायत दी है कि वह अपनी सास का सम्मान करें और उनकी देखभाल सुनिश्चित करें, वरना उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी जाएगी।



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