छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बड़ा फैसला! 5 अतिरिक्त जज बने स्थायी न्यायाधीश

VINAY VERMA | Mar 26, 2026, 08:40 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्य की न्यायपालिका को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी बनाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला 24 मार्च 2026 को हुई बैठक में लिया गया है। कॉलेजियम की स्वीकृति के बाद अब प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। साथ ही औपचारिक नियुक्ति जल्द पूरी की जाएगी।



चीफ जस्टिस दिलाएंगे शपथ

मंजूरी के बाद अगला कदम शपथ ग्रहण का है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इन जजों को शपथ दिलाएंगे। शपथ के बाद ये जज पूरी तरह स्थायी पद संभालेंगे। उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाएंगी। यह प्रक्रिया संवैधानिक औपचारिकता का हिस्सा है। इसके बाद नियुक्ति पूरी तरह प्रभावी मानी जाएगी।



किन जजों को मिला स्थायी दर्जा

स्थायी बनाए गए जजों के नाम भी सामने आ चुके हैं। इसमें जस्टिस सचिन सिंह राजपूत शामिल हैं। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल को भी स्थायी किया गया है। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल को भी प्रमोशन मिला है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु को भी सूची में जगह मिली है।



जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद भी अब स्थायी जज बन गए हैं। ये सभी न्यायाधीश पहले अतिरिक्त जज के रूप में कार्यरत थे। अब इन्हें स्थायी दर्जा मिल गया है।



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अतिरिक्त और स्थायी जज में फर्क

अतिरिक्त जजों की नियुक्ति सीमित समय के लिए होती है। आमतौर पर यह कार्यकाल दो साल तक का होता है। उनका काम बढ़ते मामलों को संभालना होता है। जरूरत के हिसाब से उनकी नियुक्ति की जाती है। वहीं स्थायी जज लंबे समय तक पद पर रहते हैं।



उन्हें नियमित न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है। स्थायी दर्जा मिलने के बाद उनकी भूमिका मजबूत हो जाती है। निर्णय लेने की निरंतरता भी बनी रहती है।



कोर्ट के कामकाज पर क्या होगा असर

विशेषज्ञ इसे सकारात्मक फैसला मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कई मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से सुनवाई तेज हो सकती है। लंबित मामलों के निपटारे में गति आने की उम्मीद है। आम लोगों को भी राहत मिल सकती है।



न्याय व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का सहारा

यह फैसला केवल नियुक्ति नहीं बल्कि सुधार का संकेत है। न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में कदम है। सरकार और न्यायपालिका के बीच तालमेल भी दिख रहा है। कॉलेजियम की भूमिका यहां अहम रही है। अब सभी की नजर शपथ ग्रहण पर है। इसके बाद ये जज पूरी क्षमता से काम करेंगे।



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