छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; लव मैरिज करने वाले जोड़े को सुरक्षा देने के लिए SP को निर्देश
NEWS IN SHORT
- हाईकोर्ट का बड़ा आदेश लव मैरिज करने वाले दंपति को मिली सुरक्षा
- कोरबा एसपी को सुरक्षा देने के निर्देश दिए गए
- दंपति को ऑनर किलिंग और झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी जा रही
- कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सुरक्षा का दिया अधिकार
- शासन की दलीलें खारिज, हाईकोर्ट ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए है
NEWS IN DETAIL
Korba। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक लव मैरिज करने वाले नवदंपति को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कोरबा एसपी को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं को किसी प्रकार की
हानि न हो और उनके जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पूरी रक्षा की जाए। यदि याचिकाकर्ताओं से कोई शिकायत मिलती है तो उसकी त्वरित जांच की जाए और कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएं।
कोर्ट ने दंपति को सुरक्षा प्रदान करने का दिया आदेश
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविेंद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे, ने यह आदेश जारी किया। दंपति को अपने विवाह को लेकर ऑनर किलिंग की धमकियां मिल रही थीं।
इसके अलावा उन्हें झूठे आरोपों में फंसाने की भी धमकियां दी जा रही थीं। इन धमकियों को लेकर दंपति ने सुरक्षा की मांग की थी
और इसके लिए उन्होंने रिट याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले में कोरबा पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मामला क्या है?
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र के चिंटू अग्रवाल और अंजलि शर्मा के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। दोनों ने अपनी मर्जी से शादी करने का निर्णय लिया और 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जयपुर में आर्य समाज मंदिर में विवाह किया।
इसके बाद, उन्होंने अपने विवाह का पंजीकरण कराया और एक शपथ पत्र भी दिया। दोनों की शादी के बाद अंजलि शर्मा के परिवार द्वारा उन्हें धमकियां दी जा रही थीं। इसमें ऑनर किलिंग की धमकी और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की बात की जा रही थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि दंपति ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह किया है और वे बालिग हैं, इसलिए उनके पास विवाह करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत, दो वयस्क व्यक्तियों को अपनी पसंद के
अनुसार विवाह करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों को राष्ट्रीय हित में माना गया है और ऐसे दंपतियों को धमकियों और उत्पीड़न से सुरक्षा मिलनी चाहिए।
Imp Facts
हाईकोर्ट ने लव मैरिज करने वाले दंपति को सुरक्षा देने का आदेश दिया।
दंपति ने अपनी इच्छा से वैध विवाह किया, दोनों बालिग हैं।
दंपति को ऑनर किलिंग और झूठे आरोपों की धमकियां मिल रही थीं।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सुरक्षा का अधिकार दिया।
कोरबा एसपी को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
शासन की दलील
राज्य सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई संगीन अपराध नहीं बनता।
उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने किसी विशिष्ट घटना, समय या स्थान का विवरण नहीं दिया है, जिससे संज्ञेय अपराध का गठन हो सके। उनके मुताबिक धमकियों के आरोप अस्पष्ट और निराधार हैं, इसलिए यह याचिका खारिज की जानी चाहिए।
लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए दंपति को सुरक्षा देने का आदेश दिया और उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा न डालने का निर्देश दिया।
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