निवेशकों की पहली पसंद बन रहा छत्तीसगढ़, 8 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिले; कई उद्योगों का काम शुरू
Raipur. छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति अब निवेश के आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीन पर दिखने लगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद प्रदेश को करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों से 1 लाख 5 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। खास बात यह है कि निवेश की तस्वीर अब पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित नहीं है। एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे नए क्षेत्र भी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में तैयार की गई औद्योगिक नीति 2024-30 1 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक प्रभावी है। इसका फोकस ‘अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन-2047’ पर है। नीति में नए उद्योगों के साथ मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण, आधुनिकीकरण और प्रतिस्थापन के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। स्थानीय रोजगार, एमएसएमई, नवाचार और अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी इसमें जगह दी गई है।
18 हजार करोड़ से ज्यादा के सेमीकंडक्टर प्रस्ताव
प्रदेश के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार, पिछले करीब 18 महीनों में मिले करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में बड़ी हिस्सेदारी नए दौर की इंडस्ट्री से जुड़ी है। नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तेजी से आकार ले रहे हैं। वहीं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह छत्तीसगढ़ की औद्योगिक दिशा में आ रहे बदलाव का संकेत है। इसी कड़ी में राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को मंजूरी मिली है। यहां 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आने और करीब 9 हजार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।
हमारी नीति को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली: सीएम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि नई औद्योगिक नीति को निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में से सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल सहित कई क्षेत्रों की परियोजनाएं अब जमीन पर उतरना शुरू हो गई हैं। उद्योग, आवास, अधोसंरचना और शहरी विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं और इन क्षेत्रों की साथ-साथ प्रगति से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को गति मिलेगी।
एक साल में 1 हजार उद्योगों को उत्पादन प्रमाण पत्र
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 48 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत है। सरकार के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 1 हजार उद्योगों को उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इन उद्योगों के जरिए 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश मिला है।
धमतरी के कचना में 17 एकड़ क्षेत्र में प्रदेश की पहली चार मंजिला प्लग-एंड-प्ले फैक्ट्री विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए तैयार सुविधाओं के साथ निवेश का रास्ता आसान करना है।
रायपुर से ओसाका तक निवेशकों से सीधा संपर्क
छत्तीसगढ़ में निवेश लाने के लिए सरकार ने राज्य के बाहर भी निवेशकों से संपर्क बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में रायपुर, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद और जापान के ओसाका में इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप करीब 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए इस वित्तीय वर्ष में मटीया (कसडोल), बिरकोनी (महासमुंद), छाती (धमतरी), बनगांव-बी (पत्थलगांव) समेत 23 औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही ग्राम तूता, नवा रायपुर अटल नगर में कन्वेंशन सह एक्जिबिशन सेंटर के निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपए, भिलाई में व्यावसायिक परिसर के लिए 10 करोड़ रुपए, पटेवा, राजनांदगांव में Electronic Manufacturing Cluster 2.0 के लिए 10 करोड़ रुपए और नवा रायपुर अटल नगर तथा राजनांदगांव में इंडस्ट्रियल फैसिलिटेशन कॉम्पलेक्स के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
निवेशकों के लिए नियम आसान करने पर जोर
निवेशकों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने के तहत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत कई सुधार किए गए हैं। इसमें सिंगल विंडो सिस्टम शामिल है। सरकार ने छत्तीसगढ़ जन विश्वास अधिनियम भी लागू किया है।
नई औद्योगिक नीति में पात्र उद्योगों के लिए कई तरह की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इनमें कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, ब्याज अनुदान, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प ड्यूटी में छूट, तकनीकी एवं पेटेंट सहायता और रोजगार आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं।
पात्रता के अनुसार उद्योगों को स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट, कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी 50 प्रतिशत तक और ईपीएफ प्रतिपूर्ति 75 प्रतिशत तक मिल सकती है।
अब खनिज से आगे बढ़ रही औद्योगिक तस्वीर
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ी रही है। नई नीति में इसके साथ कई नए क्षेत्रों के लिए भी निवेश का रास्ता तैयार किया गया है, इनमें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, एआई एवं रोबोटिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस एवं स्पेस टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, स्टील और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
एमएसएमई और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा
नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। विकासखंडों को अलग-अलग समूहों में बांटकर पिछड़े और अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया गया है। एससी/एसटी उद्यमियों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध है। नई औद्योगिक इकाइयों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और युवाओं के कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है। रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों के लिए विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है।
सब्सिडी से निवेश की लागत घटाने की कोशिश
नई औद्योगिक नीति में पात्र उद्योगों के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, ब्याज अनुदान, तकनीकी पेटेंट सब्सिडी, टेक्नोलॉजी खरीद सब्सिडी, रोजगार सहायता, ईपीएफ प्रतिपूर्ति और स्टाम्प ड्यूटी में छूट जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
प्रमुख प्रावधानों में 100 प्रतिशत तक स्टाम्प ड्यूटी छूट, 50 प्रतिशत तक कैपिटल इन्वेस्टमेंट, ब्याज, टेक्नोलॉजी खरीद और टेक्निकल पेटेंट सब्सिडी तथा 75 प्रतिशत तक ईपीएफ प्रतिपूर्ति शामिल है।
Ro-13847/4