छत्तीसगढ़ में सिंचाई का नया रास्ता... नहरों से आगे बढ़कर अब PIN तकनीक अपनाने की तैयारी

The Sootr | Dec 27, 2025, 16:16 IST
CM vishnu deo sai NEWS
छत्तीसगढ़ में खेती और सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई के बजाय PIN यानी प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में खेती और सिंचाई की तस्वीर आने वाले समय में बदलने वाली है। प्रदेश अब परंपरागत नहर आधारित सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक और अधिक प्रभावी PIN यानी प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



इस तकनीक से किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी और फसलों की उत्पादकता में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जुड़ा विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा और इसकी उपयोगिता को गंभीरता से समझा है।



सरकार का मानना है कि बदलती जल स्थितियों, बढ़ती खेती की जरूरतों और सीमित संसाधनों के बीच सिंचाई के पारंपरिक तरीकों पर पूरी तरह निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं है। इसी कारण छत्तीसगढ़ में सिंचाई के ढांचे को आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू की गई है।



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क्या है PIN यानी प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क

PIN प्रणाली पाइपलाइन आधारित सिंचाई व्यवस्था है, जिसमें पानी को नियंत्रित दबाव के साथ खेतों तक पहुंचाया जाता है। इसमें खुले नहरों की जगह बंद पाइपलाइनों का इस्तेमाल होता है। इस वजह से पानी का रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव काफी हद तक कम हो जाता है। पानी सीधे खेतों तक पहुंचता है और हर किसान को तय मात्रा में सिंचाई सुविधा मिलती है।



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परंपरागत नहर आधारित सिंचाई में पानी का बड़ा हिस्सा रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है। यही वजह है कि खेतों तक पहुंचने वाला पानी सीमित रहता है और पूरे कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती।



PIN से 65 फीसदी तक सिंचाई

प्रेजेंटेशन के दौरान बताया गया कि पारंपरिक नहर सिंचाई प्रणाली की कुल दक्षता लगभग 35 प्रतिशत मानी जाती है। इसका अर्थ यह है कि उपलब्ध पानी का एक बड़ा हिस्सा किसानों तक पहुंच ही नहीं पाता। इसके विपरीत PIN प्रणाली में सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।



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इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों के जरिए पानी खेतों तक पहुंचता है, जिससे पानी का अपव्यय बेहद कम हो जाता है। यही कारण है कि कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो पाती है। जल संरक्षण के लिहाज से यह व्यवस्था कहीं अधिक अनुकूल मानी जा रही है।



मध्यप्रदेश का अनुभव बना उदाहरण

भोपाल में दिए गए प्रेजेंटेशन में बताया गया कि मध्यप्रदेश में इस तकनीक के जरिए लगभग 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। आने वाले वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। वहां के अनुभव बताते हैं कि इस प्रणाली से जल उपयोग बेहतर हुआ है, किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा मिली है और फसलों की उत्पादकता में भी सुधार देखा गया है।



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मध्यप्रदेश के इस मॉडल को देखकर छत्तीसगढ़ सरकार को भरोसा हुआ है कि यह तकनीक राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप है और यहां के किसानों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकती है।



छत्तीसगढ़ भी लागू करेगा PIN

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक वर्तमान और भविष्य की जल प्रबंधन जरूरतों के अनुरूप है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में इस प्रणाली का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके।



उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के लिहाज से यह तकनीक काफी उपयोगी है। इस प्रणाली में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता बहुत कम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और कम लागत में पूरी की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।



कम लागत, कम जमीन, ज्यादा फायदा

PIN प्रणाली का बड़ा फायदा यह है कि इसमें बड़े पैमाने पर नहर निर्माण की जरूरत नहीं पड़ती। पाइपलाइन आधारित व्यवस्था होने के कारण भू-अधिग्रहण न्यूनतम रहता है। इससे परियोजना लागत घटती है और काम में देरी की संभावना भी कम हो जाती है।



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पंपिंग सिस्टम की दक्षता अधिक होने से बिजली की खपत भी घटती है। यह किसानों के साथ-साथ राज्य के ऊर्जा संसाधनों के लिए भी राहत की बात है।



टेल एंड किसानों को भी मिलेगा पानी

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परंपरागत नहर सिंचाई में अक्सर अंतिम छोर पर बसे किसानों को पूरा पानी नहीं मिल पाता। PIN प्रणाली में समान दबाव के साथ पानी का वितरण होता है, जिससे टेल एंड क्षेत्र के खेतों तक भी पर्याप्त पानी पहुंचता है। इससे खेतों के बीच असमानता कम होती है और सभी किसानों को समान सिंचाई सुविधा मिलती है।



इस तकनीक से फसलों की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर जल प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय में भी इजाफा होता है। राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम लंबे समय में छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।


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