सड़कों पर ट्रैक्टर, जगह-जगह चक्काजाम: 1700 करोड़ भुगतान को लेकर किसानों का प्रदर्शन, कवर्धा में राहगीर परेशान
एक एंबुलेंस जाम में फंस गई। हालांकि बाद में उसे रास्ता दिया गया। किसान 1700 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान समेत 12 मांगें पूरी करने की मांग कर रहे हैं।
ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर उतरे किसान
छत्तीसगढ़ में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेश के कई जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर पहुंचे। किसानों ने ट्रैक्टर रैलियां निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
कवर्धा में किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। यहां बंद का आह्वान भी किया गया था। कई जगह रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाई गई। प्रदर्शन के दौरान कुछ किसान बैरिकेडिंग पर चढ़कर विरोध जताते दिखे।
रायपुर में भी किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसान संघ का कहना है कि उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं निकला है।
कवर्धा में जाम से परेशान हुए लोग
कवर्धा में किसान आंदोलन का असर आम लोगों पर भी पड़ा। चक्काजाम के कारण कई रास्तों पर वाहन फंस गए। लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में परेशानी हुई।कुछ लोग इलाज कराने अस्पताल जा रहे थे।
रास्ता बंद होने के कारण उन्हें दूसरे रास्ते तलाशने पड़े। कई वाहन चालक खेतों के रास्ते निकलते दिखाई दिए। इसी दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। हालांकि बाद में एंबुलेंस को रास्ता दे दिया गया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा।
किसानों के 1700 करोड़ रुपए बकाया
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया है। संगठन के अनुसार वर्ष 2022-23 की करीब 1700 करोड़ रुपए की राशि अब तक लंबित है। किसान संघ ने सरकार से तुरंत भुगतान करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसान अपनी फसल बेच चुके हैं। इसके बाद भी उन्हें पूरा पैसा नहीं मिला है।
किसानों को अगली फसल के लिए खाद और बीज खरीदने पड़ते हैं। खेती से जुड़े दूसरे खर्च भी पूरे करने होते हैं। ऐसे में भुगतान रुकने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ती है। संघ ने सवाल उठाया है कि किसानों का पैसा रोके रखना कितना उचित है। संगठन चाहता है कि सरकार भुगतान की समयसीमा तय करे।
धान 3358 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की मांग
किसान संघ ने धान के समर्थन मूल्य को लेकर भी मांग रखी है। संगठन चाहता है कि धान की खरीदी 3358 रुपए प्रति क्विंटल हो। संघ के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य बढ़ा है। किसानों को इस बढ़ोतरी का पूरा फायदा मिलना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी मांग की गई है।
संगठन ने फल और सब्जी उत्पादकों का मुद्दा भी उठाया है। संघ चाहता है कि इन्हें भी कृषक उन्नति योजना में शामिल किया जाए। इससे धान के अलावा दूसरी फसलें उगाने वालों को भी लाभ मिलेगा।
धान की तौल और टोकन व्यवस्था पर नाराजगी
किसान संघ ने धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि किसानों से अतिरिक्त धान नहीं लिया जाना चाहिए। संघ ने प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने की मांग की है। इससे ज्यादा वजन लेने पर रोक लगाने को कहा गया है।
इसके अलावा टोकन व्यवस्था में बदलाव की मांग भी की गई है। संगठन के अनुसार बड़े किसानों को पांच टोकन मिलने चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों के लिए तीन और एक टोकन की व्यवस्था होनी चाहिए। किसान संघ चाहता है कि सभी किसान अपनी पूरी उपज बेच सकें। किसी किसान को टोकन की कमी से परेशान न होना पड़े।
15 नवंबर से शुरू हो धान खरीदी
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी की तारीखें भी तय करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो। यह प्रक्रिया 15 फरवरी तक जारी रखी जाए।संघ का कहना है कि किसानों को फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
खरीदी केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। धान की तौल और टोकन प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग है। इससे किसानों को बार-बार खरीदी केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
बाढ़ से बर्बाद फसलों का मुआवजा मांगा
प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ है। किसान संघ ने प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग की है। संगठन चाहता है कि सरकार खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे कराए। इसके बाद प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
संघ का कहना है कि केवल कागजी रिपोर्ट से नुकसान की भरपाई नहीं होगी। अधिकारियों को किसानों की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए। किसानों ने खाद की कीमतों का मुद्दा भी उठाया है। संगठन ने निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है।
अधूरी सिंचाई परियोजनाएं जल्द पूरी हों
किसान संघ ने प्रदेश की अधूरी सिंचाई परियोजनाओं पर भी नाराजगी जताई है। संगठन ने अरपा-भैंसाझार सहित दूसरी परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है। संघ के मुताबिक किसानों को हर साल पानी की समस्या होती है।
कई इलाकों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं। अनियमित बारिश और सूखे से खेती प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। इसके बावजूद कई परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहती हैं। संगठन ने लंबित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग की है। इससे किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
गन्ने के दाम 150 रुपए बढ़ाने की मांग
भारतीय किसान संघ ने गन्ना उत्पादकों के लिए भी मांग रखी है। संगठन चाहता है कि गन्ने का मूल्य 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया जाए। इसके साथ गन्ने को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने की मांग है। संघ ने मक्का और गेहूं उत्पादकों के हितों का मुद्दा भी उठाया है।
संगठन चाहता है कि रबी सीजन में मक्का और गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित हो। इससे इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को भी फायदा मिलेगा।किसान संघ ने खेती में जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।
जमीन अधिग्रहण पर भी उठाए सवाल
किसानों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई है। किसान संघ का कहना है कि विकास के नाम पर किसानों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।संगठन ने उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुरूप किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। संघ का कहना है कि जमीन किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए भूमि अधिग्रहण के दौरान उनके हितों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे 12 सूत्रीय ज्ञापन
भारतीय किसान संघ ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का फैसला किया है। संगठन ने जिला कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की बात कही है।
इस ज्ञापन में धान खरीदी और बकाया भुगतान जैसे मुद्दे शामिल हैं। साथ ही सिंचाई और बिजली से जुड़ी समस्याएं भी उठाई गई हैं। गन्ने की कीमत और भूमि अधिग्रहण पर भी मांगें रखी गई हैं।किसान संघ ने गायों के लिए गौ वंदन योजना का मुद्दा भी उठाया है।
संगठन चाहता है कि मुख्यमंत्री किसानों की समस्याओं पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाएं। सभी 12 मांगों पर स्पष्ट फैसला लिया जाए। इनके समाधान के लिए समयसीमा भी घोषित की जाए।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज
भारतीय किसान संघ ने सरकार को आगे आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। इसके बावजूद यहां के किसानों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
संघ ने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी होती है। उन्हें खाद और उचित कीमत के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा के बाद राहत पाने में भी दिक्कत होती है।
संगठन ने साफ किया कि केवल बैठकों से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को मांगों पर ठोस फैसले लेने होंगे। किसान संघ के अनुसार जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक होगा। प्रदेश के गांवों से किसानों को जोड़कर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।