छत्तीसगढ़ में नवजात को हो गई ऐसी बीमारी, जो 10 लाख में से किसी एक को होती है, ऐसे पहचानें इसके लक्षण
रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक नवजात को ऐसी बीमारी ने घेर लिया है, जो 10 लाख नवजात में किसी एक होने की आशंका रहती है। नवजात का राज्य के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में इलाज चल रहा है। नवजात शिशु का इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि जांच के दौरान उसे ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर होने का पता चला।
नवजात शिशुओं के मामले में यह बहुत ही दुर्लभ बीमारी है। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि इस प्रकार का मामला तकरीबन दस लाख नवजात शिशुओं में से किसी एक के साथ होता है। यह दुर्योग ही है कि हमारा नवजात शिशु ही इस रोग से पीड़ित है।
नवजात को दी जा रही कीमोथैरेपी
दुर्ग जिले के एक गांव से इलाज के लिए आए इस नवजात को इलाज के लिए कीमोथैरेपी दी जा रही है। डॉक्टर का कहना है कि बच्चा जन्म के साथ ही मां का दूध नहीं पी पा रहा था। शिशु का कंपलीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी कराए जाने पर यह बीमारी सामने आई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उसकी सफेद रक्त कणिकाएं यानी डब्लयूबीसी एक लाख थीं, जो की 12 से 18 हजार होनी चाहिए थीं। बायोप्सी की रिपोर्ट पॉजीटिव आई, जिससे कैंसर की पुष्टि हुई।
ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर के लक्षण
- थकान और कमजोरी
- पीली त्वचा
- अत्यधिक पसीना आना, विशेष रूप से रात में
- अनपेक्षित वजन घटना
- बुखार और ठंड लगना
- बार-बार संक्रमण
- त्वचा के नीचे छोटे लाल, बैंगनी या भूरे धब्बे (पेटीकिया)
- हड्डियों में दर्द और कोमलता
- गर्दन, बगल, पेट या कमर में दर्द रहित गांठें (सूजी हुई लिम्फ नोड्स)
- मध्य भाग में सूजन और असुविधा
- भूख में कमी।