गैस सिलेंडर को लेकर सरकार के मैसेज नही आ रहे काम, सिलेंडर के लिए सड़क पर शोर, सर्वर क्रैश
खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब सीधे छत्तीसगढ़ के घरों की रसोई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। लोग सिलेंडर के लिए पर्ची लेने के लिए घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं।
हालात ऐसे हैं कि गैस एजेंसियों के सामने बहस और मारामारी जैसी स्थिति बन रही है। खास बात यह है कि सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
समस्या का नहीं हो रहा समाधान
छत्तीसगढ़ में गैस संकट की स्थिति 3 मार्च से ही बनने लगी थी। यानी होली से पहले ही लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या बताया गया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।
गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। उपभोक्ता जब कंपनियों के नंबर पर फोन करते हैं तो फोन लगातार व्यस्त बताता है। वहीं जिन लोगों ने 3 मार्च के बाद ऑनलाइन बुकिंग की थी, उनकी बुकिंग भी ऑटोमैटिक तरीके से कैंसिल हो रही है। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
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ऑनलाइन सिस्टम फेल, पर्ची के लिए भीड़
गैस एजेंसियों का कहना है कि बिना ऑनलाइन बुकिंग के सिलेंडर देना उनके लिए संभव नहीं है। उपभोक्ताओं की समस्या है कि ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो रही। गैस एजेंसियों के सर्वर क्रैश हो चुके है। फोन लग भी जाता है तो टेक्निकल कारण बता आगे की प्रक्रिया नहीं होती।
उपभोक्ताओं का कहना है कि अब ऑनलाइन सिस्टम ही बंद हो जाए तो हम कहां जाएं? यही वजह है कि लोग सीधे एजेंसियों में पहुंचकर पर्ची बनवाने की कोशिश कर रहे हैं।
कई जगहों पर एजेंसी संचालकों और उपभोक्ताओं के बीच बहस की स्थिति भी बन रही है। छत्तीसगढ़ में यह समस्या IOCL, BPCL, HPCL की एजेंसियों में यह समस्या देखी जा रही है।
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गैस की ब्लैक मार्केटिंग शुरु
प्रदेश में गैस समस्या से ब्लैक करने वालों की चांदी हो गई है। वे लोगो से सिलेंडर देने के लिए प्रति सिलेंडर 400 से 500 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज कर रहे हैं। हालांकि छग सरकार का दावा है कि ऐसे लोगो ंपर कड़ाई की जाएगी। लेकिन लगाम लगाने का दावा फेल है। यह स्थिति लगभग पूरे प्रदेश में है।
कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद
सिर्फ घरेलू गैस ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सिलेंडर (LPG cylinder) की सप्लाई भी लगभग ठप हो गई है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनियों की तरफ से सप्लाई लगभग पूरी तरह से बंद हो गई है।
इसका सीधा असर होटल, ढाबों और छोटे रेस्टोरेंट पर पड़ा है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आधिकारिक कीमत करीब 2086.50 रुपये है। लेकिन, ब्लैक मार्केट में यह सिलेंडर दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है।
हालांकि निजी दिग्गज कंपनियों जैसे रिलायंस और पूर्ति को कुछ हद तक सप्लाई मिल रही है, लेकिन वह पूरे बाजार की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। छोटे होटल और चाय-नाश्ते की दुकानें बंद होने लगी हैं।
‘सबकुछ अफवाह‘ पेट्रोलियम कंपनियों की सफाई
इस पूरे मामले पर पेट्रोलियम कंपनियों ने सफाई भी जारी की है। कंपनियों का कहना है कि देश में ईंधन की कोई कमी (Gas cylinder shortage) नहीं है और सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें भ्रामक हैं। कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर ज्यादा गैस बुकिंग न करें।
कंपनियों का दावा है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि बयान के आखिर में कंपनियों ने यह भी कहा है कि लोग ईंधन का उपयोग समझदारी से करें।
कालाबाजारी पर सख्ती के निर्देश- सीएम
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी स्थिति को लेकर लोगों से संयम बरतने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश में रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
साथ ही जनता से यह भी अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और जरूरत के अनुसार ही गैस बुक करें।
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दावा और जमीनी हकीकत अलग-अलग
सरकार और कंपनियों के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन फिलहाल जमीन पर जो तस्वीर दिख रही है वह चिंता बढ़ाने वाली है। गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें, ऑनलाइन सिस्टम का ठप होना और कमर्शियल सिलेंडर की कमी साफ बता रही है कि हालात सामान्य नहीं हैं।
यदि जल्द ही सप्लाई और सिस्टम दोनों ठीक नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है और इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों के किचन और छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा।