मार्कफेड गोदामों में 14 करोड़ का कचरा, 6 करोड़ का किराया, सरकारी लापरवाही या खुली लूट

Arun Tiwari | Feb 11, 2026, 17:09 IST
Photograph: (the sootr)
मार्कफेड गोदामों में 14 करोड़ का खराब बारदाना पड़ा है, जिसे रखने के लिए 6 करोड़ का किराया चुका दिया गया है। क्या यह सरकारी लापरवाही है या बड़ा घोटाला?

News in short :

  • छत्तीसगढ़ में घोर प्रशासनिक लापरवाही
  • मार्कफेड के गोदामों में 14 करोड़ का खराब बारदाना
  • ये बारदाना अमानक और अनुपयोगी
  • पांच साल में 6 करोड़ चुकाया किराया

Intro

RAIPUR. छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसा चल रहा है कि ये सरकारी माल है लूट सके तो लूट। सरकारी धान को चूहे खा जाते हैं तो करोड़ों का धान सूख जाता है। ऐसा ही एक मामला है जिसमें भी घोटाले की बू आ रही है। अगर ये घोटाला नहीं है तो ये घोर प्रशासनिक लापवाही है जिसमें जनता के पैसों को उड़ाया जा रहा है।



मार्कफेड के गोदामों में 14 करोड़ का अनुपयोगी या अमानक बारदाना पड़ा हुआ है। कमाल की बात तो यह है कि इस खराब बारदाने को रखने का किराया भी चुकाया जा रहा है। पांच साल में छह करोड़ रुपए इनको रखने का किराया चुकाया गया है। यह वही बारदाना है जिसमें धान रखी जाती है।



News in Detail :

खराब बारदाने का 6 करोड़ किराया :

छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्ति के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मार्कफेड (छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ) के गोदामों में करीब 14 करोड़ रुपए मूल्य का खराब, अनुपयोगी और अमानक बारदाना सालों से पड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस बेकार बारदाने को सिर्फ रखने के लिए ही सरकार ने पिछले पांच वर्षों में करीब 6 करोड़ रुपए किराए के रूप में चुका दिए हैं। सवाल यह है कि जब बारदाना धान भंडारण के लायक ही नहीं था, तो उसे समय रहते नष्ट या नीलाम क्यों नहीं किया गया। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल कहते हैं कि इसे नीलाम करने की कोशिश की गई थी लेकिन यह पूरी नहीं हो सकी।



इन प्रमुख जिलों में इतना खराब बारदाना और किराया:

- दंतेवाड़ा :

अनुपयोगी - 2 लाख 43 हजार 164 रुपए


किराया - 5 लाख 98 हजार रुपए



- कांकेर :

अमानक - 87 लाख रुपए


किराया - 29 लाख 82 हजार



- सुकमा :

अमानक - 1 लाख 46 हजार 870 रुपए


किराया - जानकारी नहीं



- बिलासपुर :

अनुपयोगी - 28 लाख 29 हजार 720 रुपए


अमानक - 72 हजार 625 रुपए


किराया - 79 लाख 35 हजार रुपए



- जांजगीर चांपा :

अनुपयोगी - 60 लाख 55 हजार 351 रुपए


अमानक - 1 करोड़ रुपए


किराया - 93 लाख रुपए



- रायगढ़ :

अनुपयोगी - 19 लाख रुपए


किराया - 48 लाख 98 हजार रुपए



- धमतरी :

अनुपयोगी - 36 लाख रुपए


अमानक - 95 लाख रुपए


किराया - 43 लाख 75 हजार रुपए



- राजनांदगांव :

अनुपयोगी - 5 लाख रुपए


अमानक - 1 करोड़ 73 लाख रुपए


किराया - 15 लाख 46 हजार रुपए



- दुर्ग :

अनुपयोगी - 4 लाख 41 हजार रुपए


अमानक - 2 करोड़ 22 लाख रुपए


किराया - 17 लाख 34 हजार रुपए



- महासमुंद :

अनुपयोगी - 38 लाख रुपए


अमानक - 65 लाख रुपए


किराया - 91 लाख 71 हजार रुपए



Knowledge: क्या होता है बारदाना

बारदाना, यानी वे बोरे जिनमें सरकारी खरीदी का धान रखा जाता है। तय मानकों के अनुसार यह बारदाना मजबूत, सुरक्षित और उपयोग योग्य होना चाहिए। लेकिन जिन बोरों की कीमत अब 14 करोड़ आंकी जा रही है, वे या तो गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे या लंबे समय तक खुले में पड़े रहने के कारण पूरी तरह बेकार हो चुके हैं। नतीजा ये हुआ कि यह न धान भंडारण के काम के हैं और न किसी और उपयोग के।



निष्कर्ष :

यह पहला मामला नहीं है जब छत्तीसगढ़ में सरकारी भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी सरकारी गोदामों में रखे धान के चूहे खा जाने, बारिश में भीगकर सड़ जाने, धूप में सूख जाने और लाखों-करोड़ों का अनाज खराब होने की खबरें सामने आती रही हैं। अब बारदाने का यह मामला उसी कड़ी का नया उदाहरण माना जा रहा है। इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही कहना मुश्किल होगा। विपक्ष इसे सीधे तौर पर “बारदाना घोटाला” करार दे रहा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है। वहीं आम जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जब राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट की कमी बताई जाती है, तब बेकार पड़े बोरों पर करोड़ों रुपए कैसे उड़ाए जा सकते हैं?



अब आगे क्या :

अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस पूरे मामले पर सिर्फ सफाई देती है या जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई भी करती है। क्योंकि अगर जवाबदेही तय नहीं हुई, तो सरकारी माल की यह “लूट” यूं ही चलती रहेगी और कीमत चुकाएगी जनता। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सामग्री का कोई उपयोग नहीं, उसे हटाने के बजाय गोदामों में सहेजकर रखा गया और उसके लिए हर साल किराया भी चुकाया गया।



जानकारों के मुताबिक अगर समय रहते इस खराब बारदाने का निपटान कर दिया जाता तो न सिर्फ 6 करोड़ रुपए का किराया बचता, बल्कि गोदामों में उपयोगी भंडारण क्षमता भी खाली होती। सरकार आगे इस खराब बारदाने की नीलामी भी कर सकती है।



important points :

  • 14 करोड़ का खराब बारदाना- मार्कफेड के गोदामों में वर्षों से अनुपयोगी और अमानक बारदाना पड़ा है, जो धान भंडारण के काम का नहीं रहा।
  • 6 करोड़ रुपए सिर्फ किराए में खर्च- बेकार पड़े बारदाने को रखने के लिए पिछले 5 साल में सरकार ने करीब 6 करोड़ रुपए गोदाम किराए पर चुका दिए।
  • समय रहते न नीलामी, न निपटान- खराब घोषित होने के बावजूद बारदाने का न तो नष्ट किया गया और न ही नीलामी, जिससे नुकसान और बढ़ता गया।
  • अधिकारियों की भूमिका सवालों में- खरीद, गुणवत्ता जांच और किराया स्वीकृति करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई।
  • घोटाले या भारी लापरवाही का शक- मामले से भ्रष्टाचार या गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की आशंका, विपक्ष ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

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