बारिश ने बढ़ाई गांवों की उम्मीद, सीएम साय के ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से भरने लगे तालाब और डबरियां

The Sootr | Jul 24, 2026, 17:32 IST
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छत्तीसगढ़ में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से संवर रहे गांव। अच्छी बारिश से डबरियां और तालाब भरे। 6.60 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूरे, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ।

छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून की अच्छी बारिश का फायदा गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर शुरू किए गए ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के तहत बनाई गई आजीविका डबरियां, नवा तरिया और दूसरी जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से भर रही हैं। इसका सीधा लाभ किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को मिलने लगा है। जहां पहले बारिश का पानी बहकर निकल जाता था, वहीं अब वही पानी गांवों में रुक रहा है और आने वाले महीनों के लिए जल का स्थायी आधार बन रहा है।



सरकार ने इस अभियान की शुरुआत जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से की थी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप पूरे प्रदेश में लागू किया है। इसका मकसद केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। अभियान का लक्ष्य गांवों की आजीविका मजबूत करना, खेती को सहारा देना और विकास कार्यों में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी बढ़ाना भी है।



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इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गांव के लोग खुद अपनी जरूरत के अनुसार जल संरक्षण के काम तय कर रहे हैं। यही वजह है कि यह अभियान लोगों का अपना अभियान बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार अब तक प्रदेश में 6 लाख 60 हजार 105 जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं।



इनमें 6 लाख 8 हजार 909 कार्य मनरेगा के माध्यम से और 51 हजार 196 कार्य विभिन्न विभागों के समन्वय से किए गए हैं। अभियान का दायरा लगातार बढ़ा है। आज यह प्रदेश के सभी 33 जिलों, 146 जनपद पंचायतों और 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है।



छोटे, उपयोगी और टिकाऊ जल संरक्षण ढांचों पर जोर

सरकार ने इस अभियान में बड़े और महंगे प्रोजेक्ट की जगह छोटे, उपयोगी और टिकाऊ जल संरक्षण ढांचों पर जोर दिया है। मनरेगा के माध्यम से गांव-गांव में ऐसी संरचनाएं बनाई गईं हैं, जो स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार की गई हैं। इससे बारिश का पानी अधिक मात्रा में रुक रहा है, भूजल स्तर में सुधार हो रहा है और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है।



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प्रदेश में 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां बनाई गई हैं। मानसून की बारिश के बाद इनमें तेजी से पानी भर रहा है। इसी तरह ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के तहत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी अब लबालब होने लगे हैं। इन जल स्रोतों से आने वाले समय में सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी और दूसरी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को स्थायी आधार मिलेगा। इससे ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।



वीबीजी रामजी योजना से आगे बढ़ रहे काम

राज्य सरकार जल संरक्षण के काम को लगातार आगे बढ़ा रही है। इसी उद्देश्य से 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के तहत भी जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। इस योजना में 318 कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें 108 कार्य सीधे जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े हैं। इन परियोजनाओं से वर्षा जल का अधिक संचयन होगा, भूजल का पुनर्भरण बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा।



सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य सिर्फ तालाब और डबरियां बनाना नहीं है। कोशिश यह है कि जल संरक्षण गांवों की समृद्धि का स्थायी आधार बने। बारिश शुरू होते ही इन संरचनाओं में पानी भरने से यह साफ हो गया है कि अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।



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अब जनआंदोलन का रूप ले चुका अभियान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और लोगों के सहयोग से ‘मोर गांव-मोर पानी’ अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण के कार्यों में हिस्सा ले रहे हैं। यह गांवों में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।



उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सूचना, शिक्षा और जनजागरूकता गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रदेश की 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, ताकि लोगों में पानी बचाने की आदत विकसित हो। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र के जल स्तर की जानकारी मिल रही है और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।



अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन और जनसंपर्क जैसे माध्यमों से बड़े पैमाने पर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। 626 क्लस्टरों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 56 हजार से अधिक लोगों को जल प्रबंधन और संरक्षण की जानकारी दी गई।



अभियान में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग

सरकार ने इस अभियान में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया है। जीआईएस (GIS) तकनीक की मदद से जल संरक्षण कार्यों की योजना बनाई गई है, जिससे पानी रोकने और भूजल बढ़ाने के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जा सका है। इससे जल संरक्षण के प्रयास और अधिक प्रभावी हुए हैं।



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बारिश के इस मौसम में गांवों में भरते तालाब, डबरियां और जल संरचनाएं यह बता रही हैं कि सही योजना और जनभागीदारी के साथ जल संकट का समाधान संभव है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान अब केवल जल संरक्षण की योजना नहीं रह गया है, यह खेती, रोजगार, ग्रामीण आजीविका और जल सुरक्षा को मजबूत करने वाला व्यापक अभियान बन चुका है। आने वाले समय में इसके विस्तार के साथ छत्तीसगढ़ जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।



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