छत्तीसगढ़ में कारोबार करना अब और आसान, विधानसभा ने दी नए बिजनेस कानून को मंजूरी

The Sootr | Jul 22, 2026, 15:58 IST
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छत्तीसगढ़ में उद्योग और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया अब पहले से आसान होने जा रही है। विधानसभा ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 पारित कर दिया है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में अब उद्योग लगाना और कारोबार शुरू करना पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कारोबार से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 पारित कर दिया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) और विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।



सरकार के इस कदम से छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स, दुकानदारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। उन्हें अब बड़े उद्योगों जैसी लंबी और जटिल अनुमति प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम होंगे।



कारोबार के जोखिम के आधार पर मिलेगी अनुमति

अब तक ज्यादातर उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए करीब-करीब एक जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती थीं। नई व्यवस्था में यह तरीका बदलेगा। उद्योगों और कारोबार का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर अलग-अलग जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा।



यदि कोई कारोबार कम जोखिम वाली श्रेणी में आता है तो उसे सरल और त्वरित प्रक्रिया से मंजूरी मिलेगी। वहीं जिन परियोजनाओं में जोखिम अधिक होगा, वहां तकनीकी परीक्षण, निरीक्षण और निर्धारित प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। इससे सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।



छोटे कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ छोटे कारोबारियों को मिलेगा। कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षण की जगह अब सेल्फ-सर्टिफिकेशन या लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट अथवा अन्य अधिकृत विशेषज्ञों के प्रमाणन को मान्यता दी जाएगी। इससे सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगेंगे और अनुमति मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। सरकार का उद्देश्य कारोबारियों का समय बचाना और अनावश्यक औपचारिकताओं को समाप्त करना है।



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हर साल लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराना होगा

विधेयक का महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि अब हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण अनिवार्य नहीं होगा। इसकी जगह जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे उद्यमियों को बार-बार कागजी प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अपना समय कारोबार बढ़ाने, उत्पादन और रोजगार सृजन पर लगा सकेंगे।



एमएसएमई के लिए और आसान होगी प्रक्रिया

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। जल प्रदाय से जुड़ी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर मिल सकेगी। सोसायटी या फर्म का पंजीयन समय-बद्ध प्रक्रिया के तहत होगा। भवन अनुज्ञा भी सेल्फ-सर्टिफिकेशन या अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर जारी की जा सकेगी। यदि तय समय-सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण और भौतिक निरीक्षण पहले की तरह अनिवार्य रहेंगे।



आठ विभागों की 43 सेवाएं होंगी शामिल

नई व्यवस्था के पहले चरण में राज्य सरकार के आठ विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। सरकार ने यह भी व्यवस्था रखी है कि जरूरत पड़ने पर कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अन्य सेवाओं को भी इस प्रणाली में जोड़ा जा सके। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समय-बद्ध बनाना है।



निगरानी के लिए बनेगी त्रिस्तरीय व्यवस्था

सरकार ने इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था भी तैयार की है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जो पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति काम करेगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी। इससे कानून के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर समय पर सुधार भी किए जा सकेंगे।



15 लाख से अधिक एमएसएमई को होगा सीधा लाभ

सरकार का अनुमान है कि इस सुधार का सीधा लाभ राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मिलेगा। कारोबार शुरू करने और संचालन में लगने वाला समय कम होगा। अनावश्यक अनुपालनों से राहत मिलेगी और व्यवसाय करने की लागत भी घटेगी। भरोसे, स्व-घोषणा और समय-बद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी। साथ ही जिन क्षेत्रों में सुरक्षा और तकनीकी मानकों की आवश्यकता है, वहां निगरानी और परीक्षण की पूरी व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।



निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार पहले से ही उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दे रही है। नई औद्योगिक नीति, सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल सेवाएं और अब जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था उसी दिशा में बड़ा सुधार है। सरकार का विश्वास है कि इससे प्रदेश में नए उद्योग तेजी से स्थापित होंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी कारोबार शुरू करने के लिए पहले से अधिक सरल और पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी।


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