निवेश, तकनीक और रोजगार से नए औद्योगिक युग की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़
कुछ साल पहले तक छत्तीसगढ़ की पहचान खनिज संपदा और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित थी, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। CG निवेश, आधुनिक तकनीक और बड़े उद्योगों के नए केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। इस बदलाव के केंद्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं, जिनकी अगुआई में लागू नई औद्योगिक नीति 2024-30 ने प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति दी है। पारदर्शी व्यवस्था, आसान प्रक्रियाओं और निवेशक-अनुकूल फैसलों की वजह से देश-विदेश की बड़ी कंपनियां अब छत्तीसगढ़ का रुख कर रही हैं।
प्रदेश में औद्योगिक निवेश लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। प्रोजेक्ट टुडे सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में 218 नई औद्योगिक परियोजनाओं में 1 लाख 63 हजार 749 करोड़ रुपए का निवेश आया है। यह देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ देश के टॉप-10 निवेश आकर्षित करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।
वर्ष 2024 के निवेश को जोड़ने पर प्रदेश में अब तक 4.4 लाख करोड़ रुपए के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इसी का परिणाम है कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। युवाओं को अब अपने ही राज्य में अच्छी नौकरियां मिल रही हैं।
देश-दुनिया के निवेशकों से मिले सीएम साय
नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जापान और दक्षिण कोरिया में इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के जरिए निवेशकों से सीधा संवाद किया। इन बैठकों का असर भी दिखाई दिया है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए हैं। इन परियोजनाओं से 7,800 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
रिकॉर्ड निवेश से बढ़ा उद्योग जगत का भरोसा
नई औद्योगिक नीति का सबसे बड़ा असर निवेशकों के भरोसे के रूप में सामने आया है। सरकार ने उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया है और निवेशकों को तेज फैसलों का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री साय का कहना है कि सरकार का लक्ष्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि रोजगार बढ़ाना और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक उद्योगों के साथ भविष्य की तकनीकों में भी बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। इसी सोच के तहत फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को नई औद्योगिक नीति में विशेष प्राथमिकता दी गई है।
न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन का मॉडल
नई औद्योगिक नीति 2024-30 का आधार न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन रखा गया है। निवेशकों को सभी आवश्यक अनुमतियां सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऑनलाइन आवेदन, त्वरित स्वीकृति और डिजिटल प्रक्रियाओं ने उद्योग स्थापित करने की राह पहले की तुलना में काफी आसान बना दी है।
सरकार ने एक साल में कारोबारी माहौल सुधारने के लिए बड़े स्तर पर सुधार लागू किए हैं। 1167 जटिल प्रक्रियाओं की पहचान कर उनमें बदलाव किया गया है। 231 प्रावधानों को अपराधमुक्त बनाया गया है, जिससे उद्योगों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम हुआ है। कई प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल किया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ी हैं।
निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन
राज्य सरकार उद्योगों को 30 से 50 प्रतिशत तक फिक्स्ड कैपिटल सब्सिडी दे रही है। विशेष परिस्थितियों में यह प्रोत्साहन 150 प्रतिशत तक निवेश सहायता और कुछ मामलों में 200 प्रतिशत तक भी पहुंच सकता है। शुरुआती पांच वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का भी प्रावधान किया गया है। तकनीकी उन्नयन और विस्तार करने वाली इकाइयों को अतिरिक्त सहायता दी जा रही है।
डेटा सेंटर और आईटी उद्योगों के लिए व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद 100 प्रतिशत बिजली शुल्क छूट, भूमि आवंटन में राहत, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और तकनीकी उपकरणों की खरीद पर विशेष प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
आईटी, एआई और डेटा सेंटर से बदलेगी तस्वीर
छत्तीसगढ़ अब डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भी तेजी से काम कर रहा है। हैदराबाद में हुए इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से आया है। कंपनी ने 4,200 करोड़ रुपए के निवेश से भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इस परियोजना से करीब 250 रोजगार मिलने की संभावना है।
इसके अलावा निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से एआई, जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इससे लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे और राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को नई गति मिलेगी।
सरकार रायपुर, नवा रायपुर और दुर्ग-भिलाई को भविष्य के टेक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। नवा रायपुर में राज्य के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट का भूमिपूजन हो चुका है। नैसकॉम के साथ सहयोग के जरिए नवा रायपुर को बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर आईटी हब बनाने की योजना पर काम जारी है।
टेक्सटाइल से लेकर फार्मा तक निवेश
हैदराबाद इन्वेस्टर कनेक्ट में फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपए निवेश का प्रस्ताव दिया है। इससे करीब 4,000 रोजगार मिलने की संभावना है।एसजी मार्ट लिमिटेड ने सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण के लिए 700 करोड़ रुपए निवेश की पेशकश की है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिलेगा। श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 528 करोड़ रुपये के निवेश से आधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इस परियोजना से करीब 2,500 रोजगार सृजित होने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपए और डेयरी क्षेत्र में दिनशॉज डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
नवा रायपुर टेक्सटाइल पार्क से हजारों नौकरियां
सरकार नवा रायपुर में 81 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित कर रही है। यहां 235 करोड़ रुपए के निवेश से पहली गारमेंट निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से 4,600 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। इनमें बड़ी संख्या स्थानीय महिलाओं की होगी, जिससे महिला आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पर फोकस
नई औद्योगिक नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है। सरकार ने तय किया है कि यदि कोई उद्योग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है या 1,000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देता है, तो उसे विशेष बी-स्पोक पैकेज के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी। स्थानीय कर्मचारियों के ईपीएफ योगदान की प्रतिपूर्ति और कौशल प्रशिक्षण पर भी सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 1 जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच प्रदेश में 2,415 नए उद्योग स्थापित हुए हैं। इनसे लगभग 42,500 लोगों को रोजगार मिला है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
हर वर्ग को जोड़ने की कोशिश
नई औद्योगिक नीति में समावेशी विकास पर भी विशेष जोर दिया गया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और पूर्व नक्सलियों द्वारा स्थापित एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी, अधिकतम एक करोड़ रुपए तक देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने हाइड्रोपोनिक्स, एयरोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को भी औद्योगिक नीति का हिस्सा बनाया है। रक्षा, अंतरिक्ष, रेलवे और परमाणु ऊर्जा से जुड़े उपकरणों के निर्माण के लिए तकनीकी उन्नयन, अनुसंधान एवं विकास तथा पेटेंट सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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