रिटायरमेंट के दिन पेंशन नहीं मिली तो अफसरों की CR में चढ़ेगी लापरवाही, सरकार ने विभागाध्यक्षों को दी सीधी चेतावनी
लापरवाही उनके गोपनीय सर्विस रिकॉर्ड यानी CR/ACR में दर्ज की जाएगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि पेंशन के मामले में सिर्फ फाइल आगे बढ़ा देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी।
सरकार ने तय किया है कि अगले तीन महीने, छह महीने और दो साल में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन ही पेंशन भुगतान आदेश मिलना चाहिए। इसके लिए अफसरों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की रिटायरमेंट तारीख पहले से तय होती है, तो उनकी पेंशन की फाइल समय पर तैयार क्यों नहीं होती? अब सरकार ने इसी देरी पर अफसरों की जवाबदेही तय करने का रास्ता चुना है।
तीन महीने पहले खुलेगी फाइल
सरकार ने विभागाध्यक्षों को कहा है कि अगले तीन महीने, छह महीने और दो साल में रिटायर होने वाले कर्मचारियों की सूची देखकर पेंशन की तैयारी शुरू करें। रिटायरमेंट से कम से कम तीन महीने पहले पेंशन की फाइल तैयार करके संबंधित संभागीय संयुक्त संचालक, कोष, लेखा एवं पेंशन कार्यालय को ऑनलाइन भेजनी होगी।
आपत्ति आई तो पीछा करना होगा
पेंशन की फाइल भेजने के बाद अगर संबंधित कार्यालय कोई कमी बताता है, तो उसे दूर करना भी विभाग की जिम्मेदारी होगी। आपत्ति का निराकरण करके फाइल दोबारा भेजनी होगी। सिर्फ पोर्टल पर आवेदन चढ़ाकर बैठ जाने से काम पूरा नहीं माना जाएगा।
जिन कर्मचारियों को अभी अग्रिम या अनुमानित पेंशन मिल रही है, उनके मामलों की भी समीक्षा करनी होगी। जिनकी फाइल आगे बढ़ सकती है, उन्हें ऑनलाइन पोर्टल के जरिए संबंधित कार्यालय तक पहुंचाना होगा। इसका मतलब साफ है कि लंबित फाइलों को लेकर विभाग अब यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे कि मामला दूसरे दफ्तर में अटका है।
जांच का बहाना भी बताना होगा
कुछ कर्मचारियों के मामले अदालत में चल रहे होते हैं या उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहती है। ऐसे मामलों में पेंशन की फाइल तैयार करने में परेशानी हो सकती है। सरकार ने ऐसे प्रकरणों की अलग सूची बनाने और देरी की वजह साफ-साफ बताने को कहा है। यह जानकारी संचालनालय, पेंशन एवं भविष्य निधि को देनी होगी।
इससे पता चल सकेगा कि कितने कर्मचारियों की पेंशन अदालत या जांच के कारण अटकी है और कितने मामलों में विभागीय लापरवाही जिम्मेदार है। लेकिन सवाल यह भी है कि ऐसी सूची बनने के बाद लंबित मामलों को निपटाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? केवल वजह दर्ज करने से रिटायर कर्मचारी को पेंशन नहीं मिल जाएगी।
पोर्टल पर खुलेगी पोल
पेंशन के मामलों की निगरानी के लिए सरकार ने ऑनलाइन सिस्टम ‘आभार आपकी सेवाओं का’ बनाया है। इसका लॉगिन आईडी और पासवर्ड विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) को दिया गया है। इसके जरिए फाइलों की स्थिति देखी जा सकती है और लंबित मामलों पर कार्रवाई की जा सकती है।
मप्र के नियमानुसार DDO जिम्मेदार
मध्य प्रदेश शासन द्वारा सामान्य पेंशन प्रकरणों के निपटारे के लिए 15 कार्य दिवसों की समय-सीमा तय है। इसके लिए निर्माता, सत्यापनकर्ता और अनुमोदक के स्तर पर 5-5 दिन निर्धारित हैं।
कर्मचारियों के रिटायरमेंट से पहले ही पेंशन की प्रक्रिया शुरू करने होते हैं। मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग भी लागू है। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से पेंशन या अन्य स्वत्व (dues) में देरी होती है, तो उसके लिए संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी (DDO) की जवाबदेही तय की जाती है और कार्रवाई की जाती है।
अफसरों के रिकॉर्ड पर चोट
सरकार ने निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विभागाध्यक्षों को सीधे जिम्मेदार ठहराने की बात कही है। उनके गोपनीय प्रतिवेदन यानी CR/ACR में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने की स्थिति दर्ज होगी। यानी पेंशन प्रकरणों के निपटारे में विभाग का प्रदर्शन अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड तक पहुंचेगा।
अब असली सवाल यह है कि क्या इस चेतावनी से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को समय पर पेंशन मिल पाएगी? सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी के आखिरी दिन तक सेवा देता है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद उसे अपनी ही पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए।
सरकार ने अफसरों की जवाबदेही तय करने का ऐलान तो कर दिया है, अब देखना होगा कि समय पर PPO जारी होते हैं या कर्मचारियों को फिर इंतजार करना पड़ता है।