छग के वोट चोरी की शिकायत पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश को दबाकर बैठा है स्वास्थ्य विभाग, सचिव के खिलाफ अवमानना की तैयारी
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। 16 जुलाई 2025 को कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को शिकायत पर नियमों के मुताबिक जल्द फैसला लेने का आदेश दिया। आरोप है कि इसके बाद भी शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अब इस मामले में अवमानना की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
चुनाव में गड़बड़ी के आरोप
फार्मेसी काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 20 सितंबर 2022 को खत्म हो गया था। इसके बाद 2023 में चुनाव कराया गया। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने 17 नवंबर 2022 को ही निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर मतदाता सूची की गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। एसोसिएशन ने मृत फार्मासिस्टों के नाम हटाने, कई अखबारों में चुनाव की सूचना प्रकाशित करने, मतपत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजने और मतगणना की वीडियोग्राफी कराने की मांग की थी। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया पर विवाद खड़ा हो गया।
13 हजार से ज्यादा वोट पड़े
रायपुर के शंकर नगर स्थित सिंधु पैलेस में 13 अप्रैल 2023 को मतगणना हुई। 14 अप्रैल को जारी परिणाम के मुताबिक कुल 13,183 मत मिले थे। इनमें से 900 मत अवैध पाए गए। छह सदस्यों को निर्वाचित घोषित किया गया। लेकिन परिणाम आने के बाद ही चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। एसोसिएशन ने 24 अप्रैल 2023 को स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव के सामने औपचारिक अपील पेश की। इसमें पूरे चुनाव को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई।
मृतकों के नाम पर वोटिंग
एसोसिएशन का आरोप है कि मतदाता सूची से मृत फार्मासिस्टों के नाम नहीं हटाए गए। इन नामों पर मतपत्र जारी हुए और मतदान भी हुआ। शिकायत में अक्षय साहू, योगेश कुमार साहू, प्रेम चंद महेश्वरी, चुन्नीलाल देवांगन और रितिका गोस्वामी के नाम दिए गए हैं। एसोसिएशन ने इनके पंजीयन और मतदाता क्रमांक का ब्योरा भी शिकायत के साथ लगाया था। सवाल यह है कि अगर संबंधित मतदाता पहले ही दुनिया से जा चुके थे, तो उनके नाम पर मतपत्र किसे मिला और वोट किसने डाला? इस आरोप की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी जरूरी है।
मतगणना पर भी सवाल
शिकायत में जांजगीर-चांपा के राम रतन बर्मन का उदाहरण देते हुए कहा गया कि एक ही नाम और पते पर दो मतपत्र स्पीड पोस्ट से भेजे गए। आरोप है कि दोनों से मतदान हुआ। एसोसिएशन का दावा है कि आपत्ति के बावजूद निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जांच नहीं कराई। मतपत्रों पर हस्ताक्षर मिलान नहीं होने, कुछ मतपत्रों पर क्रमांक और निर्वाचन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होने की शिकायत भी की गई। 40 मतगणना टेबलों पर सिर्फ तीन एजेंटों की निगरानी को भी अपर्याप्त बताया गया।
मतदाता सूची पर बड़ा सवाल
एसोसिएशन के मुताबिक, राज्य में 26 हजार से अधिक पंजीकृत फार्मासिस्ट थे, लेकिन मतदाता सूची में 23,094 नाम ही शामिल किए गए। शिकायत में 4,726 लाइफटाइम पंजीकृत फार्मासिस्टों की स्थिति पर भी सवाल उठाया गया। इसके अलावा चुनाव अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित नहीं होने, केवल एक अखबार में सूचना देने और रजिस्टर्ड डाक की जगह स्पीड पोस्ट से मतपत्र भेजने को नियमों के खिलाफ बताया गया। मतगणना में ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने पर भी आपत्ति हुई, जो खुद चुनाव में मतदाता थे। ये सभी आरोप एसोसिएशन की शिकायत का हिस्सा हैं। इन पर अंतिम सरकारी निर्णय सामने आना बाकी है।
सचिव को लेना था फैसला
शासन स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होने के बाद एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 16 जुलाई 2025 को जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए स्वास्थ्य विभाग के सचिव को 24 अप्रैल 2023 के लंबित अभ्यावेदन पर नियमों और कानून के मुताबिक जल्द विचार कर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया।
आदेश के बाद भी कार्रवाई कहां?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शिकायत पर क्या फैसला लिया गया? क्या मृत फार्मासिस्टों के नाम पर मतदान और दोहरे मतपत्रों के आरोपों की जांच हुई? क्या किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई? क्या चुनाव रद्द करने या दोबारा चुनाव कराने पर निर्णय लिया गया? इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
अब अवमानना की तैयारी
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के महासचिव राहुल वर्मा का कहना है कि मामले मे हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को तीन माह में निराकरण करने कहा था। लेकिन आदेश के बावजूद फैसला नहीं हुआ, वे कोर्ट का आदेश ही दबाकर बैठे हैं। उनके खिलाफ अब अवमानना का केस लगायेंगे।