आजादी के बाद पहली बार रावघाट पहुंची ट्रेन, छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई रफ्तार

The Sootr | Oct 26, 2026, 15:51 IST
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Raipur. छत्तीसगढ़ के रावघाट तक आजादी के बाद पहली बार ट्रेन पहुंची है। यह बस्तर और आसपास के दूर-दराज के इलाकों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। अब यहां के लोगों को रेल से सफर करने का अवसर मिल रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले दिनों रायपुर रेलवे स्टेशन से रावघाट-रायपुर और रायपुर-कुरूद यात्री रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखाई थी।

छत्तीसगढ़ के रावघाट तक आजादी के बाद पहली बार ट्रेन पहुंची है। यह बस्तर और आसपास के दूर-दराज के इलाकों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। अब यहां के लोगों को रेल से सफर करने का अवसर मिल रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले दिनों रायपुर रेलवे स्टेशन से रावघाट-रायपुर और रायपुर-कुरूद यात्री रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखाई थी। इसी अवसर पर ताड़ोकी-रावघाट और अभनपुर-कुरूद रेल खंडों का लोकार्पण किया गया।



गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से काम हो रहा है। राज्य सरकार का जोर उन क्षेत्रों तक रेल पहुंचाने पर है, जहां अब तक आवागमन के साधन सीमित रहे हैं। रावघाट तक रेल पहुंचना इसी दिशा में बड़ी उपलब्धि है।



मुख्यमंत्री साय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल संपर्क का लगातार विस्तार हो रहा है। नई रेल सेवाओं से यात्रा आसान होगी, दूर-दराज के क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलेगा और व्यापार, उद्योग तथा रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।



अब सफर होगा आसान

रावघाट और आसपास के गांवों के लोगों को अब तक लंबी दूरी तय करने के लिए सीमित परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। दुर्गम रास्तों और परिवहन की कमी के कारण कई बार शहरों तक पहुंचने में ज्यादा समय और पैसा खर्च होता था। रेल सेवा शुरू होने से इन परेशानियों में लोगों को बड़ी राहत मिली है।



अब विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों को रेल सुविधा का लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए बड़े शहरों में पढ़ाई के विकल्प तलाशना आसान होगा। मरीजों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों जाने वाले लोगों को सफर का एक और साधन मिलेगा। वहीं, किसान और व्यापारी अपने उत्पादों की बिक्री और खरीद से जुड़ी गतिविधियों के लिए बेहतर संपर्क का लाभ उठा सकेंगे।



ग्रामीणों का सपना हुआ पूरा, पहली बार ट्रेन में बैठे

रावघाट के पास स्थित आतुरबेड़ा गांव के निवासी सोनू उसेंडी ने रेल सेवा शुरू होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “हम रावघाट के पास के गांव में रहते हैं। हमारे लिए ट्रेन में बैठना किसी सपने के सच होने जैसा है। गांव के कई लोगों ने पहले कभी ट्रेन को करीब से नहीं देखा था, लेकिन अब वे इसमें सफर कर पा रहे हैं।”



सोनू ने बताया कि गांव के लोग बस से ट्रेन देखने आए थे। अब उन्हें भी रेल यात्रा करने का अवसर मिल रहा है। रेल सेवा शुरू होने से इलाज के लिए दूसरे शहरों तक जाना आसान होगा और कम खर्च में सफर करने से परिवारों के पैसे भी बचेंगे। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया है।



छात्राओं को बड़े शहरों तक पहुंचने की नई राह

नई रेल सेवा शुरू होने से विद्यार्थियों में भी उत्साह है। ताड़ोकी गांव की कक्षा 9वीं की छात्रा गायत्री नुरेटी और नारायणपुर की कक्षा 9वीं की छात्रा मीनाक्षी ने पहली बार ट्रेन में सफर किया। दोनों ने कहा कि रेल सेवा से अब अपने क्षेत्र से बड़े शहरों तक जाना आसान होगा। इससे आगे की पढ़ाई के लिए नए विकल्प तलाशने और बेहतर शैक्षणिक अवसरों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतर परिवहन सुविधा काफी मायने रखती है।



बनाई जा रही 95 किलोमीटर लंबी लाइन

दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना पर करीब 1 हजार 628 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस परियोजना के तहत 95 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही है। ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर रेल खंड का निर्माण पूरा होने के साथ रावघाट तक रेल संपर्क स्थापित हो गया है।



दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक 77 किलोमीटर रेल खंड पर पहले ही रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। अब रावघाट तक संपर्क पहुंचने से परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। आगे की रेल कनेक्टिविटी विकसित होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानों को सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जोड़ने में मदद मिलेगी।



रायपुर में बनेगा आधुनिक रेल इंजन रखरखाव केंद्र

रायपुर में आधुनिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन रखरखाव केंद्र की आधारशिला रखी गई है। इस केंद्र में भविष्य में 300 हाई हॉर्सपावर वाले इलेक्ट्रिक रेल इंजनों के रखरखाव की क्षमता विकसित करने की योजना है।



इस सुविधा से रेल इंजनों की मरम्मत और देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी। इससे रेल परिचालन को सुचारू रखने और माल ढुलाई की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में रेलवे से जुड़ी आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के विकास की दिशा में भी अहम कदम है।



51 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम

छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है। प्रदेश में अभी 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। नई रेल लाइनों के निर्माण, मौजूदा लाइनों को दोहरा करने, रेल मार्गों के विद्युतीकरण और स्टेशनों के आधुनिकीकरण से प्रदेश के विकास को नई दिशा मिल रही है।



वित्त वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ के लिए रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपए किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य के लिए औसतन 311 करोड़ रुपए सालाना आवंटित किए जाते थे। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना बढ़ोतरी हुई है।



बस्तर में रेल संपर्क बढ़ाने की तैयारी

बस्तर क्षेत्र में रेल संपर्क बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रावघाट-जगदलपुर की 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। वहीं, किरंदुल-कोत्तागुडेम की 180 किलोमीटर और गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की 490 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे का काम आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल और यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ी है।



ये प्रोजेक्ट भी पाइप लाइन में

रेल संपर्क बढ़ाने के लिए कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की भी योजना है। प्रस्तावित मार्ग करीब 295 किलोमीटर लंबा है। इसे कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक बनाने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल संपर्क बेहतर करने के लिए भी कई प्रस्ताव हैं। इनमें सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर की 244 किलोमीटर, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा की 301 किलोमीटर और अंबिकापुर-बरवाडीह की 200 किलोमीटर लंबी रेल परियोजनाएं शामिल हैं।



रेलवे स्टेशनों को बेहतर कर रही सरकार

रेलवे स्टेशनों को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1 हजार 680 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। योजना के तहत चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल लोकार्पण कर चुके हैं।



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