महतारी वंदन योजना से ड्रोन दीदी तक, छत्तीसगढ़ की महिलाएं बना रहीं आत्मनिर्भरता की नई राह
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर दे रही है। कोई सिलाई से परिवार संभाल रही है, कोई खेतों में ड्रोन चला रही है, कोई ई-रिक्शा से अपना काम आसान कर रही है तो कोई छोटे कारोबार खड़े कर हर महीने हजारों रुपये कमा रही है। यह बदलाव गांवों तक पहुंच रहा है और महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल रहा है।
महतारी वंदन से हर महीने आर्थिक सहारा
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महतारी वंदन योजना अहम भूमिका निभा रही है। योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए हर महीने 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता पहुंचाई जाती है। यह राशि महिलाओं को रोजमर्रा की जरूरतों, बच्चों की आवश्यकताओं और छोटे घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है। कई महिलाएं इस आर्थिक सहायता को अपने काम और आजीविका से जोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महतारी वंदन योजना में लगभग 68 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं। अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। इस साल राज्य के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
महतारी शक्ति ऋण से कारोबार को मिल रहा सहारा
महतारी वंदन योजना की पूरक ‘महतारी शक्ति ऋण योजना’ के जरिए महिलाओं को बिना गारंटी के स्वरोजगार ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। नवंबर 2024 से अब तक करीब 41,124 लाभार्थियों ने 102.38 करोड़ रुपए के बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण का लाभ उठाया है।
इस योजना से सब्जी बेचने, कारीगरी और दूसरे छोटे-मोटे काम करने वाली महिलाओं को अपना कारोबार बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ के विजन को साकार करने में भी मदद मिल रही है।
राखी ने मुश्किल समय में संभाला परिवार
सरगुजा जिले के ग्राम कर्रा, पाटीपारा की रहने वाली राखी के लिए महतारी वंदन योजना की सहायता मुश्किल समय में सहारा बनी है। पिछले वर्ष आकाशीय बिजली गिरने से पति के निधन के बाद उनके सामने दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। राखी योजना से मिलने वाली मासिक सहायता का इस्तेमाल बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री खरीदने में करती हैं।
खेती-बाड़ी के साथ वह गांव की महिलाओं के कपड़े सिलकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता और अपने हुनर को जोड़कर राखी परिवार को संभाल रही हैं और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ रही हैं।
अब गांव की महिलाएं चला रहीं ड्रोन
महिला सशक्तिकरण का नया कदम अब तकनीक से भी जुड़ रहा है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित महिलाएं खेतों में नैनो उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे खेती में समय और श्रम की बचत हो रही है और महिलाओं के लिए आय का नया अवसर भी तैयार हुआ है। ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक खेती से जोड़ रहा है और उन्हें कृषि-उद्यमिता की ओर आगे बढ़ा रहा है।
हेमलता बनीं ड्रोन दीदी, सालाना 1 से 2 लाख की आय
जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोड़ी की हेमलता मनहर ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ से जुड़ी हैं। वह खेतों में नैनो उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम से वह सालाना करीब 1 से 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की पढ़ाई में भी मदद मिली है। हेमलता की कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण और तकनीक ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का नया रास्ता खोल सकती है।
ई-रिक्शा से महिलाओं को मिला स्वरोजगार
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना भी महत्वपूर्ण पहल है। श्रम विभाग के माध्यम से संचालित इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।
ई-रिक्शा के जरिए महिलाएं परिवहन क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं। इससे उन्हें रोजगार और आय का साधन मिल रहा है और परिवार के लिए नियमित आमदनी का जरिया तैयार करने में मदद मिल रही है।
सेवती ने खुद संभाली परिवहन की जिम्मेदारी
ग्राम झलमला की रहने वाली सेवती ठाकुर श्रम विभाग में पंजीकृत हैं और स्वयं सहायता समूह के साथ कैंटीन चलाती हैं। कैंटीन के लिए कच्चा माल और खाद्य सामग्री लाने के लिए पहले उन्हें परिवहन के लिए किराये पर निर्भर रहना पड़ता था। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत आर्थिक अनुदान और बैंक ऋण की मदद से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा। अब वह खुद परिवहन की जिम्मेदारी संभालती हैं। इससे रोजाना होने वाले परिवहन खर्च में बचत हो रही है और स्वयं सहायता समूह के कारोबार को भी फायदा हुआ है।
लखपति दीदी से अर्थव्यवस्था को मिल रही ताकत
महिलाओं की आय बढ़ाने में लखपति दीदी अभियान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को पशुपालन, खेती, हस्तशिल्प, लघु वनोपज प्रसंस्करण और अलग-अलग छोटे व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है।
राज्य में 13 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं के लखपति दीदी बनने का दावा किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं की सालाना आय को कम से कम एक लाख रुपये के स्तर तक पहुंचाना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।
कांति साहू ने खड़े किए कई रोजगार के साधन
कोरिया जिले के ग्राम तलवापारा की कांति साहू लखपति दीदी अभियान और शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। बैंक लिंकेज और मुद्रा ऋण के जरिए आर्थिक सहायता लेकर उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण, धान बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर और सिलाई केंद्र जैसे कई काम शुरू किए।
इन कामों के जरिए वह अपने पति के सहयोग से हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। उनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपए से अधिक बताई गई है। कांति की कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूह, ऋण सुविधा और स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार महिलाओं के लिए स्थायी आय का आधार बन सकते हैं।
एक हजार रुपए से शुरू होकर आत्मनिर्भरता तक का सफर
महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपए की मासिक राशि छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए घर-गृहस्थी की मदद से आगे बढ़कर आय और आजीविका के अवसरों से जुड़ने का आधार बन रही है। यह राशि ऋण, स्वयं सहायता समूह और आजीविका के अवसरों के साथ मिलकर महिलाओं को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर रही है।
महतारी वंदन योजना राज्य की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। इसमें करीब 68 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं और अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
वहीं, महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत नवंबर 2024 से अब तक करीब 41,124 महिलाओं को 102.38 करोड़ रुपए के बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण दिए गए हैं।
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