सरकारी अफसर क्रिस्टीना की जाति पर सवाल, जांच समिति ने रद्द किया एसटी प्रमाणपत्र
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur : छत्तीसगढ़ सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सरकारी अफसर क्रिस्टीना एस लाल की नौकरी पर बड़ा संकट आ गया है। यह संकट इसलिए आया क्योंकि उनकी जाति पर सवाल उठ गया है। उन्होंने अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। उनकी जाति की जांच कर रही छानबीन समिति ने उनके इस प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया है। यानी जांच कमेटी ने माना कि वे अनुसूचित जनजाति की नहीं हैं।
इसके बाद उनकी नौकरी मुश्किल में आ गई है। इस आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होती है तो उनकी नौकरी जा सकती है। हालांकि इससे पहले भी इस तरह की बात सामने आई थी जिस पर उनको हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया था। जांच कमेटी फिर से बनाई गई और इस कमेटी ने भी उनके जाति प्रमाणपत्र को नहीं मानते हुए उसे रद्द कर दिया।
अफसर की जाति पर सवाल
महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त संचालक क्रिस्टीना एस लाल की जाति पर फिर सवाल उठ गया है। उनके अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़ा हुआ है। यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। पहले भी जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर शिकायतें हुई थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई थी।
विभिन्न स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद एक बार फिर पूरे मामले की विस्तृत जांच की गई। हाई लेवल स्क्रूटनी समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, वंशावली, राजस्व अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि वे अनुसूचित जनजाति वर्ग का दावा प्रमाणित नहीं कर सकीं। इसी आधार पर समिति ने एसटी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का आदेश जारी किया।
एसटी प्रमाणपत्र पर मिली नौकरी
क्रिस्टीना ने एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त की थी। ऐसे में प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद नियुक्ति की वैधता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब संबंधित विभाग समिति के आदेश का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगा। यदि नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है तो नौकरी समाप्त होने के साथ-साथ अन्य सेवा लाभों पर भी असर पड़ सकता है।
दस साल पहले भी उनकी जाति की जांच की गई थी जिसमें भी उनके जाति प्रमाणपत्र को मान्य नहीं किया गया था। लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एक बार फिर हाईलेवल जांच कमेटी बनाई गई। कमेटी ने उनके गांव जाकर पड़ताल की लेकिन इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस आधार पर कमेटी ने उनके अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया।
फर्जी जाति का मुद्दा फिर चर्चा में
इस मामले ने एक बार फिर फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों से वास्तविक अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। उनका मानना है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी या गलत आधार पर प्राप्त जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी या अन्य लाभ हासिल करता है तो प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद संबंधित लाभ भी वापस लिए जा सकते हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए राज्य स्तर पर गठित स्क्रूटनी समितियों को अधिकार प्राप्त हैं और उनके निर्णय के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाती है।
पूरे सिस्टम पर असर
माना जा रहा है कि इस फैसले का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य में ऐसे कई अन्य मामलों की भी समीक्षा की जा सकती है जिनमें जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर शिकायतें लंबित हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकार फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों को गंभीरता से देख रही है
और जांच प्रक्रिया को तेज करने पर भी विचार किया जा रहा है। फिलहाल हाई लेवल स्क्रूटनी समिति का आदेश संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। अब विभागीय स्तर पर नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई होगी। यदि संबंधित पक्ष इस फैसले को चुनौती देना चाहता है तो उसे कानून के तहत उपलब्ध न्यायिक विकल्पों का सहारा लेना होगा।
FAQ
- क्रिस्टीना एस लाल कौन हैं?
क्रिस्टीना एस लाल छत्तीसगढ़ सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक पद पर कार्यरत अधिकारी हैं। उनका नाम ST जाति प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर चल रही जांच के बाद चर्चा में आया है। - क्रिस्टीना एस लाल का मामला किससे जुड़ा है?
यह मामला महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी क्रिस्टीना एस लाल के अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाणपत्र की वैधता से जुड़ा है। - जांच समिति ने क्या फैसला दिया है?
राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय जाति जांच समिति ने क्रिस्टीना एस लाल के ST जाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया है। - जाति प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद क्या असर पड़ सकता है?
प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद उनकी सरकारी नौकरी और सेवा लाभों पर असर पड़ सकता है। विभाग नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
यह खबरें भी पढ़े....
रायपुर में सरकारी अफसर की पत्नी से रेप, कारोबारी ने ऐसे बनाया शिकार...
फर्जी जाति प्रमाणपत्र विवाद: नीरज आनंद लिखार केस की सुनवाई 29 जून को
महिला एवं बाल विकास विभाग में रात गुजारने का ऑफर, जांच में सही मिले आरोप
छत्तीसगढ़ में शादी का झांसा देकर रेप करने वाले सरकारी अफसर को उम्रकैद