पास होकर भी फेल हुए छात्र ; रोका 5वीं-8वीं का रिजल्ट, प्रिंटिंग में बड़ी लापरवाही
NEWS IN SHORT
- मार्कशीट में अंकों और व्यक्तिगत जानकारी में भारी त्रुटियां।
- डोंगरगांव का नाम गलत प्रिंट होने से प्रशासन की किरकिरी।
- शिक्षा विभाग ने प्रिंटिंग एजेंसी को ठहराया जिम्मेदार।
- सुधार के लिए सभी अंकसूचियां जिला मुख्यालय वापस भेजी गईं।
- त्रुटि सुधार के बाद ही जारी होंगे संशोधित परिणाम।
NEWS IN DEATIL
छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद अब प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक (5वीं और 8वीं कक्षा) के छात्र एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। जिस समय छात्र अपनी अगली कक्षा की तैयारी और खुशियां मनाने की योजना बना रहे थे। उसी समय शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही ने पूरी परिणाम प्रक्रिया पर 'ब्रेक' लगा दिया है। भारी तकनीकी त्रुटियों के कारण फिलहाल रिजल्ट को रोक दिया गया है।
मार्कशीट बनी गलतियों का पुलिंदा
मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल के अंत तक परिणाम घोषित होने की पूरी संभावना थी, लेकिन जब अंकसूचियां (मार्कशीट) प्रिंट होकर आईं, तो अधिकारी भी दंग रह गए। अंकसूचियों में केवल अंकों का हेरफेर ही नहीं है, बल्कि बुनियादी जानकारियों में भी भारी चूक हुई है। छात्रों के प्राप्तांक गलत दर्ज किए गए हैं, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
डोंगरगांव का नाम भी गलत
हैरानी की बात यह है कि प्रिंटिंग की लापरवाही इस कदर रही कि नाम, ग्रेडिंग और जन्मतिथि जैसी संवेदनशील जानकारियों में भी अशुद्धियां पाई गई हैं। हद तो तब हो गई जब डोंगरगांव जैसे क्षेत्र का नाम तक गलत प्रिंट कर दिया गया। इस गंभीर चूक ने विभाग की कार्यप्रणाली और डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभाग ने पल्ला झाड़ा, एजेंसी पर फोड़ा ठीकरा
इस पूरे विवाद पर शिक्षा विभाग ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि उनकी ओर से डेटा पूरी तरह सही भेजा गया था। अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी गड़बड़ी प्रिंटिंग स्तर पर हुई है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित आउटसोर्स एजेंसी की है।
डोंगरगांव बीईओ (BEO) जयंत साहू ने स्पष्ट किया है कि, त्रुटिपूर्ण अंकसूचियों को वापस जिला मुख्यालय भेज दिया गया है। जब तक सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और संशोधित अंकसूचियां प्राप्त नहीं होतीं, तब तक परिणाम जारी नहीं किए जाएंगे।
अभिभावकों में आक्रोश और अनिश्चितता
इस देरी ने न केवल छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाया है, बल्कि अभिभावकों में भी भारी रोष है। सत्र शुरू होने के मुहाने पर इस तरह की लापरवाही से बच्चों के आगे के दाखिले प्रभावित होने का डर सता रहा है।
निष्कर्ष
यह घटना दिखाती है कि डिजिटल युग में भी डेटा हैंडलिंग और प्रिंटिंग की छोटी सी चूक हजारों बच्चों के भविष्य और शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को संकट में डाल सकती है। अब देखना यह होगा कि विभाग कितनी जल्दी इन गलतियों को सुधार कर पारदर्शी परिणाम जारी कर पाता है।
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