छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग : बाबू और चपरासी भी अब ऑनलाइन ही लगाएंगे हाजिरी

Aishwarya Dwivedi | Jun 18, 2026, 15:43 IST
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छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब शिक्षकों के बाद डीईओ, बीईओ और बाबू-चपरासी के लिए भी ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। शुरुआती दिनों में इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आईं।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में अब ऑनलाइन हाजिरी को लेकर सख्ती बढ़ गई है। स्कूलों के बाद अब विभागीय कार्यालयों में भी डिजिटल अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। जिला और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को अब ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। दफ्तरों के बाबू और चपरासी भी अब डिजिटल माध्यम से ही हाजिरी लगाएंगे। शिक्षकों और अधिकारियों की छुट्टियां भी अब केवल ऑनलाइन ही स्वीकृत की जाएंगी।



अफसरों के लिए नए नियम लागू

छत्तीसगढ़ शासन ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने कड़ा रुख अपनाया है। स्कूल के शिक्षकों के बाद अब बड़े अधिकारियों पर नजर रहेगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को रोज ऑनलाइन हाजिरी लगानी होगी। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के लिए भी यह नियम जरूरी है। विभाग ने इस संबंध में साफ आदेश जारी कर दिए हैं।



अब दफ्तरों में काम करने वाले बाबू भी इससे बच नहीं सकेंगे। चपरासियों को भी रोज डिजिटल उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इस नए नियम से विभाग में हड़कंप मच गया है। दफ्तर आने-जाने के समय पर अब सीधी निगरानी रखी जाएगी। लेटलतीफी करने वाले कर्मचारियों पर अब आसानी से कार्रवाई हो सकेगी।



छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब ऑनलाइन हाजिरी


विद्या समीक्षा केंद्र ऐप से हाजिरी

स्कूलों में तैनात सभी कर्मचारियों की निगरानी अब मोबाइल ऐप से होगी। इसके लिए विद्या समीक्षा केंद्र ऐप का उपयोग किया जा रहा है। शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ इसी ऐप से हाजिरी भरेंगे। दफ्तरों के लिए अलग से एक व्यवस्था बनाई गई है। विभागीय कार्यालयों में बायोमैट्रिक सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।



इसके लिए आधार सक्षम बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया गया है। यह सिस्टम संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालयों में स्थापित हो चुका है। डीईओ और बीईओ कार्यालयों में भी मशीनें लग चुकी हैं। इसके अलावा डाइट, बीटीआई और शासकीय शिक्षा महाविद्यालयों में भी इसे अनिवार्य किया गया है।



शुरुआत में तकनीकी दिक्कतें आईं

इस नई व्यवस्था के लागू होते ही जमीनी स्तर पर परेशानी दिखी। पहले दो दिनों में ही बड़ा तकनीकी संकट सामने आ गया। कई जिलों में शिक्षकों को लॉगिन करने में समस्या आ रही है। ऐप डाउनलोड होने के बाद भी हाजिरी नहीं लग पा रही है। मोबाइल नेटवर्क न होना इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।



ग्रामीण और बाहरी इलाकों में नेटवर्क की हालत बहुत खराब है। शिक्षक स्कूल परिसर में मोबाइल लेकर नेटवर्क तलाशते नजर आए। रायपुर, बिलासपुर, धमतरी और दुर्ग जिलों से ऐसी खबरें मिली हैं। शिक्षकों का कहना है कि बिना नेटवर्क ऐप काम नहीं करता है। इस वजह से उनकी उपस्थिति दर्ज होने में काफी समय लग रहा है।



नोडल अधिकारियों पर नाराजगी

संचालनालय ने मैदानी अधिकारियों के ढीले रवैए पर नाराजगी जताई है। विभाग ने सभी जिलों से नोडल अधिकारियों की जानकारी मांगी थी। पोर्टल पर नाम, मोबाइल नंबर और प्रोफाइल दर्ज करना जरूरी था। इस जानकारी के आधार पर ही ऑनलाइन सिस्टम काम करता है।



कई जिलों ने अब तक यह जरूरी जानकारी विभाग को नहीं भेजी है। जिन जिलों ने जानकारी भेजी, उनमें बहुत सी गलतियां पाई गईं। संचालनालय ने इसे अनुशासनहीनता माना है और कड़ी चेतावनी दी है। सभी अधिकारियों को तत्काल सही जानकारी भेजने का निर्देश दिया गया है।



सचिव ने दिया समाधान का भरोसा

शिक्षा विभाग के सचिव डा. कमलप्रीत सिंह ने स्थिति पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है। जिन ब्लॉकों में दिक्कतें हैं, वहां की रिपोर्ट ली जा रही है। अगले एक-दो दिनों में सभी तकनीकी समस्याओं को सुधार लिया जाएगा।



उन्होंने बताया कि व्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। शुरुआती दो दिनों में ही एक लाख से अधिक शिक्षक जुड़ चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज होना एक अच्छी शुरुआत है। आने वाले समय में सिस्टम पूरी तरह से काम करने लगेगा।



गैर-शैक्षणिक ड्यूटी पर रोक लगेगी

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर शिक्षकों की तैनाती पर पड़ेगा। यह पूरा सिस्टम जियो-फेंसिंग तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि शिक्षक को स्कूल परिसर में रहना होगा। स्कूल परिसर से बाहर रहने पर हाजिरी दर्ज नहीं हो पाएगी।



अब तक शिक्षक दूसरे सरकारी दफ्तरों में अटैच हो जाते थे। कलेक्टर या एसडीएम स्तर से उनकी ड्यूटी अन्य कामों में लगा दी जाती थी। अब इस तरह के अटैचमेंट की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। शिक्षक केवल अपने मूल स्कूल में रहकर ही हाजिरी लगा सकेंगे। इससे वे गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त होंगे और बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकेंगे।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में हाजिरी के लिए किस मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है?
    उत्तर: सरकारी स्कूलों में कार्यरत सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र ऐप का उपयोग किया जा रहा है।
  2. विभागीय दफ्तरों (DEO/BEO) में उपस्थिति के लिए कौन सी तकनीकी प्रणाली लागू की गई है?
    उत्तर: शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यालयों में उपस्थिति के लिए आधार सक्षम बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) लागू किया गया है, जिसके तहत बाबू और चपरासी भी डिजिटल हाजिरी लगाएंगे।
  3. ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था में प्रयुक्त 'जियो-फेंसिंग तकनीक' का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    उत्तर: जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) तकनीक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी केवल अपने मूल कार्यालय या स्कूल परिसर के भीतर मौजूद रहकर ही उपस्थिति दर्ज कर सकें। इससे शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों या अन्य दफ्तरों में अनधिकृत संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर रोक लगेगी।

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