छत्तीसगढ़ में लोगों की हर समस्या का एक हल... सीएम हेल्पलाइन 1076
Raipur. छत्तीसगढ़ में अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो रही है। यदि किसी पात्र व्यक्ति का आय प्रमाण पत्र अटक गया है, राशन कार्ड नहीं बन रहा है, किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिली है, नामांतरण अटका है या किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो अब समाधान के लिए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने का रास्ता खुल गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सीएम हेल्पलाइन 1076 शुरू की है, जो सुशासन और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री सचिवालय की निगरानी में संचालित यह व्यवस्था 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन काम कर रही है। इसके लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सचिव स्तर के अधिकारी और मुख्यमंत्री सचिवालय लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है, 'सरकार का उद्देश्य हर नागरिक की समस्या सुनना, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना और प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना है। सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिकायतें, सुझाव और जनप्रतिसाद प्राप्त हुए थे। उसी अनुभव ने स्थायी और प्रभावी जनसंपर्क तंत्र की आवश्यकता को स्पष्ट किया और अब सीएम हेल्पलाइन उसी सोच का परिणाम है।'
42 विभाग, 8 हजार अधिकारी
छत्तीसगढ़ की सीएम हेल्पलाइन की सबसे बड़ी खासियत इसका नेटवर्क है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली में सरकार के 42 विभागों को जोड़ा गया है। करीब 8 हजार अधिकारी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। 1195 से अधिक शिकायत श्रेणियों को इसमें शामिल किया गया है, ताकि नागरिकों की हर तरह की समस्या का समाधान तय समय सीमा में किया जा सके।
ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक चार प्रशासनिक स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। शिकायत दर्ज होते ही वह संबंधित जिले के कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों के डैशबोर्ड पर पहुंचती है। इसके बाद समस्या के समाधान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से ट्रैक की जाती है।
शिकायतकर्ता की संतुष्टि तक बंद नहीं होगी फाइल
सीएम हेल्पलाइन को अन्य शिकायत प्रणालियों से अलग बनाने वाली सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था शिकायतकर्ता की संतुष्टि जांच है। हर शिकायतकर्ता को यूनिक आईडी दी जाती है। इसके जरिए वह अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है। जब विभाग समस्या का समाधान कर देता है, तब कॉल सेंटर से शिकायतकर्ता को दोबारा फोन किया जाता है। यदि वह समाधान से संतुष्ट नहीं होता तो मामला स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण और जांच के लिए भेज दिया जाता है। यानी सिर्फ कागजों में निपटारा दिखाकर फाइल बंद नहीं की जा सकेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी वॉटसऐप सुविधा
डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। इससे नागरिक मोबाइल के जरिए आसानी से अपनी शिकायत, सुझाव और फीडबैक सरकार तक पहुंचा सकेंगे। प्रदेशवासी टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ शासन की योजनाओं और सेवाओं के संबंध में जानकारी भी ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने खुद की शिकायतकर्ता से बात
हेल्पलाइन शुरू होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं इसकी कार्यप्रणाली देखने हेल्पलाइन सेंटर पहुंचे थे। उन्होंने शिकायतों के पंजीयन, निगरानी और समाधान की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस दौरान सीएम ने हेल्पलाइन पर कॉल करने वाले रायपुर निवासी पूना राम ठाकरे से सीधे बात की। पूना राम ने बताया कि उन्होंने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था और उससे संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन पर फोन किया है। मुख्यमंत्री ने उनसे समस्या की पूरी जानकारी ले कर आश्वस्त किया कि जल्द समाधान किया जाएगा।
ऐसे काम करती है पूरी व्यवस्था
- सीएम हेल्पलाइन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल बनाई गई है। सबसे पहले नागरिक 1076 पर कॉल करता है। कॉल सेंटर का प्रतिनिधि समस्या सुनकर उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करता है।
- शिकायत संबंधित जिले के कलेक्टर और विभागीय नोडल अधिकारी को भेजी जाती है। राशन कार्ड, धान खरीदी, किसान सम्मान निधि, जमीन विवाद और नामांतरण जैसी शिकायतें सबसे ज्यादा आने वाली श्रेणियों में शामिल हैं।
- तीसरे चरण में तहसीलदार, जनपद सीईओ, थाना प्रभारी या संबंधित अधिकारी मौके पर जांच करते हैं और कार्रवाई रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
- इसके बाद कॉल सेंटर शिकायतकर्ता से संपर्क कर यह सुनिश्चित करता है कि समस्या वास्तव में हल हुई है या नहीं। शिकायतकर्ता की सहमति मिलने के बाद ही मामला बंद माना जाता है।
सुशासन की नई तस्वीर बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नागरिक देवो भव' के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को लगातार मजबूत बना रही है। सीएम हेल्पलाइन से जनता और शासन के बीच संवाद पहले से ज्यादा आसान और प्रभावी होगा।
केस-1: रेत कारोबार पर प्रशासन का बुलडोजर
रायपुर जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर रेत के अवैध कारोबार और शासकीय भूमि पर अवैध भंडारण की शिकायत मिली। शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने आरंग क्षेत्र के कई गांवों में जांच की। इस दौरान ग्राम कुटेला में सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के करीब 90 ट्रैक्टर और 80 हाईवा रेत का अवैध भंडारण पाया गया। प्रशासन ने मौके पर पूरा भंडारण जब्त कर लिया और अवैध परिवहन में लगे तीन वाहनों को भी कब्जे में लेकर थाने के सुपुर्द कर दिया।
केस-2: किसान की पुकार, 24 घंटे में मिला समाधान
सरगुजा जिले के ग्राम सराईटीकरा निवासी किसान राजनाथ राजवाड़े आगामी फसल के लिए खाद की व्यवस्था को लेकर परेशान थे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कॉल कर अपनी समस्या बताई। शिकायत दर्ज होने के दो घंटे के भीतर कृषि विभाग के अधिकारी उनके घर पहुंच गए। जांच में पता चला कि किसान के पास सहकारी बैंक खाता और किसान क्रेडिट कार्ड नहीं था। अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया पूरी कराई और अगले ही दिन उनका बैंक खाता और किसान क्रेडिट कार्ड बनवा दिया। इसके बाद उन्हें खाद और बीज की सुविधा भी मिल गई।
केस-3: खाद नहीं मिल रही थी, 24 घंटे में बना कार्ड
सरगुजा जिले के सुखरी गांव के किसान अजय राजवाड़े ने हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें खेती के लिए खाद और बीज नहीं मिल पा रहे हैं। शिकायत मिलते ही कृषि विभाग सक्रिय हुआ और समस्या की जांच की गई। जांच में सामने आया कि किसान के लिए नई क्रेडिट लिमिट (एनसीएल) स्वीकृत कर किसान क्रेडिट कार्ड जारी करना जरूरी है। विभागीय अधिकारियों ने जिला स्तर पर प्रक्रिया पूरी कराते हुए उनका किसान क्रेडिट कार्ड बनवा दिया। केसीसी जारी होते ही किसान को आवश्यक खाद उपलब्ध करा दी गई। पूरी कार्रवाई 24 घंटे के भीतर पूरी हुई। अजय राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है, जहां शिकायत दर्ज होते ही समाधान की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
केस-4: एक शिकायत और सालभर पुरानी समस्या खत्म
मुंगेली जिले के लोरमी नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 11 में रहने वाले राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई कि उनके इलाके की नाली की सफाई लगभग एक साल से नहीं हुई है। शिकायत मिलते ही नगर पालिका परिषद लोरमी ने तत्काल अभियान चलाकर नाली की सफाई कराई। समस्या के समाधान के बाद राकेश ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि एक फोन कॉल पर उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो गया।
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