छत्तीसगढ़ में CM साय के निर्देश पर किसानों को मिल रहा भरपूर खाद-बीज, कालाबाजारी पर किया कड़ा प्रहार
Raipur. खरीफ मौसम में किसानों को खाद-बीज की परेशानी न हो, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार लगातार निगरानी कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और कीमतों पर विशेष नजर रखी हुई है। सरकार के निर्देश हैं कि हर किसान को समय पर खाद मिले और कालाबाजारी, जमाखोरी या निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
खरीफ 2026 के दौरान देशभर में डीएपी की उपलब्धता सीमित रही है, इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में डीएपी का भंडारण किया गया है। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में खाद की उपलब्धता लगातार बनी हुई है और किसानों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
1.84 लाख मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ मौसम 2026 के लिए प्रदेश में डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। 21 जुलाई 2026 की स्थिति में छत्तीसगढ़ में 1 लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया जा चुका है। इसमें से किसानों को 1 लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। वितरण के बाद भी समितियों और गोदामों में 58 हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था। इस बार उपलब्धता की स्थिति बेहतर है।
डीएपी के साथ संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर जोर
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किसानों को डीएपी के साथ एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फसलों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराना और डीएपी पर ज्यादा निर्भरता कम करना है। कृषि विभाग का कहना है कि संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और फसल उत्पादन को भी लाभ मिलता है।
खाद की कालाबाजारी पर सरकार की नजर
कृषि विभाग लगातार उर्वरक विक्रय केंद्रों की जांच कर रहा है। सरकार ने साफ किया है कि किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लेना, खाद की कृत्रिम कमी पैदा करना या कालाबाजारी करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता प्रभावित हुई है। देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत और एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। वैश्विक बाजार में बदलाव का असर उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ा है। एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में भी आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने भारत सरकार की नीति और बाजार परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किया है। हालॉंकि कृषि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत न ली जाए।
किसानों से अधिकृत केंद्रों से ही खाद खरीदने की अपील
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे खाद केवल अधिकृत विक्रेताओं और सहकारी समितियों से ही खरीदें। यदि किसी स्थान पर अधिक कीमत वसूली, कालाबाजारी या किसी अन्य प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें। शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
बारिश से प्रभावित किसानों को भी मिलेगी मदद
प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण बुआई प्रभावित हुई है और कुछ किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ रही है। ऐसे क्षेत्रों में जिला प्रशासन और कृषि विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रभावित किसानों को तकनीकी सलाह, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ शासन के प्रावधानों के अनुसार जरूरी सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी है।
छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि खरीफ मौसम में किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। खाद की उपलब्धता से लेकर वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी पर कार्रवाई तक, हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसान समय पर खेती का काम पूरा कर सकें।
RO.13847/2