सीएम साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में तेज हुआ पीएम आवास निर्माण, 11 लाख से ज्यादा घर पूरे
Raipur. छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना तेजी से पूरा हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के काम को लगातार गति दी गई है। सरकार के प्रयासों का असर यह है कि प्रदेश में अब तक 11 लाख से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास पूरे किए जा चुके हैं। इनमें नए वित्तीय वर्षों के साथ पिछले वर्षों में स्वीकृत और अलग-अलग कारणों से लंबित रहे आवास भी शामिल हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर देने के संकल्प को जमीन पर उतारना उसकी प्राथमिकता है। इसी दिशा में आवास निर्माण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र परिवारों को समय पर अपना घर मिल सके।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आवास को लेकर एक और पहल की है, इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ में 7,230 नए आवासों को मंजूरी मिली है। 106 नगरीय निकायों में बनने वाले इन घरों के लिए पात्र हितग्राहियों को 2.50 लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। सीएम साय का कहना है कि हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर मिले, डबल इंजन सरकार इसी संकल्प को साकार कर रही है।
पहली कैबिनेट में लिया था बड़ा फैसला
नई सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पात्र परिवारों के लिए 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने और उनके निर्माण का संकल्प लिया गया था। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, इसी संकल्प के तहत पुराने और नए वित्तीय वर्षों में स्वीकृत आवासों के लिए जरूरी राशि उपलब्ध कराई गई और निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराया गया। प्रदेश में वर्ष 2011 और 2018 की पात्रता सूची के अंतर्गत पात्र पाए गए सभी आवासों को स्वीकृति दी जा चुकी है। कुल स्वीकृत आवासों में से अब तक 20 लाख 40 हजार मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है। करीब चार लाख आवास अभी निर्माणाधीन हैं।
एक साल में 5.92 लाख से ज्यादा घर पूरे
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 5 लाख 92 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूरे किए गए। यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है। राज्य सरकार आवास निर्माण की रफ्तार बनाए रखने के लिए जिला स्तर तक लगातार निगरानी कर रही है।
सरकार की कोशिश है कि जिन परिवारों को आवास की स्वीकृति मिल चुकी है, उन्हें निर्माण पूरा होने तक जरूरी सहयोग और राशि समय पर मिलती रहे। इसके लिए प्रशासनिक अमले और मैदानी कर्मचारियों को लगातार काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुराने लंबित मकान कराए जा रहे पूरे
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान कार्यकाल में पूरे हुए 11 लाख से अधिक आवासों में पिछले वित्तीय वर्षों में स्वीकृत मकान भी शामिल हैं। इनमें ऐसे कई आवास थे, जो अलग-अलग कारणों से लंबे समय से अधूरे पड़े थे। इन आवासों को भी जरूरी राशि उपलब्ध कराकर पूरा कराया गया। इस तरह पिछले ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवासों को मिलाकर 11 लाख से ज्यादा परिवारों को पक्के घर की सौगात मिल चुकी है।
गांवों में रोजगार और महिलाओं की आय भी बढ़ी
प्रधानमंत्री आवास योजना का असर घर बनने तक सीमित नहीं है। आवास निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है। बड़ी संख्या में महिला स्व-सहायता समूहों को निर्माण कार्य से जोड़ा गया है। इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति शुरू की है। इससे उन्हें काम और आय का नया साधन मिला है। कई महिलाएं इसी काम के जरिए लखपति दीदी के रूप में आत्मनिर्भर बनी हैं। गांवों में निर्माण गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
भुइरी बाई के लिए पक्का घर बना सुरक्षा का सहारा
सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कुंवरपुर निवासी भुइरी बाई के लिए पक्का घर किसी सपने के पूरा होने जैसा है। पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश में छत से पानी टपकता था और कमजोर दीवारों के कारण परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके पति काशीराम के नाम पक्का मकान स्वीकृत हुआ। परिवार ने घर बनाना शुरू किया, लेकिन निर्माण के दौरान उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद भी शासन की सहायता से मकान का निर्माण पूरा हुआ। आज भुइरी बाई अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मान के साथ रह रही हैं।
धरमपाल के परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत बादा निवासी धरमपाल का परिवार भी प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित हुआ है। उनके पिता रामसाय गांव के पटेल थे और खेती से परिवार का भरण-पोषण करते थे। माओवादी हिंसा की घटना में उनके पिता की हत्या के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट आ गया।
कई वर्षों तक परिवार मिट्टी और खपरैल से बने जर्जर मकान में रहा। बारिश और मौसम बदलने पर असुरक्षा बनी रहती थी। वर्ष 2024-25 में नक्सल पीड़ित परिवारों को प्राथमिकता देते हुए धरमपाल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान स्वीकृत हुआ। अब घर बन गया है और परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है। धरमपाल का कहना है कि पक्का मकान मिलने से परिवार को स्थिरता मिली है और बच्चों के भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ा है।
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