आधे मंत्रियों की रिपोर्ट खराब, सीएम साय बोले सुधर जाओ वर्ना होंगे आउट
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में आधी रात को मंत्रियों की क्लास लगी। सीएम हाउस में हुई क्लास में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संगठन महामंत्री पवन साय मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक आधे मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड खराब हैं। ढाई साल बीतने के बाद अब मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी की जा रही है। इन मांयरियों की शिकायत मिली है कि वे पैसा कमाने में जुटे है। कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही। अवैध धंधे करने वालों से सांठ गांठ है। प्रभार वाले जिलों में दौरे नहीं हो रहे। सीएम ने साफ कहा कि अभी भी समय है सुधार जाइये वर्ना मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ेगा।।
सीएम हाउस में मैराथन बैठक:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी निवास में बुधवार रात आयोजित मंत्रियों की लंबी बैठक ने प्रदेश की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। करीब पांच घंटे तक चली इस बैठक का समापन रात दो बजे के बाद हुआ। देर रात तक चली इस मैराथन बैठक को लेकर सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी, मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसे कई मुद्दों पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि बैठक से बाहर निकलने वाले मंत्रियों ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए इसे नियमित समीक्षा बैठक बताया।
दौड़े दौड़े पहुंचे मंत्री:
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ प्रदेश सरकार के सभी प्रमुख मंत्री मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार बैठक में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की स्थिति, प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा और संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का समय और इसकी अवधि सामान्य बैठकों से अलग होने के कारण इसे लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
मंत्रिमंडल फेरबदल सीएम का अधिकार:
बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कोई असाधारण बैठक नहीं थी, बल्कि हर तीन महीने में आयोजित होने वाली नियमित समीक्षा बैठक थी। उन्होंने बताया कि मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में चल रहे विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्था और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
जब उनसे मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस संबंध में वही उचित टिप्पणी कर सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी बैठक को पूरी तरह नियमित बताया और किसी भी तरह के राजनीतिक संदेश या फेरबदल की अटकलों को निराधार बताया। मंत्री रामविचार नेताम ने भी मुस्कुराते हुए कहा कि सभी प्रकार की अटकलें बेबुनियाद हैं और लोगों को अनावश्यक कयास लगाने से बचना चाहिए।
मंत्रियों से संगठन नाराज़:
सूत्रों की मानें तो इस बैठक के पीछे केवल प्रशासनिक समीक्षा ही कारण नहीं थी। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में संगठन स्तर पर मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई गई। जानकारी के अनुसार 18 जून को बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने प्रदेश के महामंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली थी। इस बैठक में कई महामंत्रियों ने मंत्रियों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई थी। शिकायतों में कहा गया कि कई मंत्री संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे रहे हैं। फोन कॉल्स का जवाब नहीं मिलने और स्थानीय स्तर पर संवाद की कमी की वजह से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
अचानक मंत्रियों को किया तलाब:
सूत्रों के मुताबिक इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर मुख्यमंत्री निवास में मंत्रियों की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी भी रही। बताया जा रहा है कि उन्होंने बैठक के दौरान संगठन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कराई और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों को बैठक के लिए केवल एक पंक्ति का संदेश भेजा गया था।
संदेश में सिर्फ बैठक का समय और स्थान बताया गया था, जबकि एजेंडा की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यही कारण है कि बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में इसके महत्व को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। फिलहाल भाजपा सरकार और संगठन दोनों ही इसे सामान्य समीक्षा बैठक बता रहे हैं, लेकिन देर रात तक चली इस बैठक ने यह संकेत जरूर दिया है कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय को लेकर गंभीर मंथन जारी है। आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव और परिणामों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
बैठक में ये रहे मौजूद:
बैठक में सीएम साय के अलावा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, मंत्री रामविचार नेताम, केदार कश्यप, गुरु रुद्रकुमार, लक्ष्मी राजवाड़े, टंक राम वर्मा, लखनलाल देवांगन और अन्य मंत्री मौजूद रहे। बैठक देर रात तक चली, जिससे इसके राजनीतिक महत्व को लेकर अटकलें और तेज हो गईं।
कोरिया हत्याकांड पर भी चर्चा:
इस बीच कोरिया जिले में भाजपा नेता की हत्या का मामला भी बैठक के दौरान चर्चा का विषय बना। हाल ही में रेत माफियाओं द्वारा भाजपा नेता की हत्या की घटना के बाद सरकार की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर भी मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अवैध खनन और रेत कारोबार पर सख्ती बढ़ाने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मंत्रियों को मिलेगी ट्रेनिंग:
रायपुर में जुलाई के पहले हफ्ते (संभावित 4-5 जुलाई) को मंत्रियों के लिए एक विशेष चिंतन शिविर आयोजित होने जा रहा है। रायपुर IIM में होने वाले इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत सभी कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। इस शिविर में विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञ मंत्रियों को विशेष प्रशिक्षण देंगे, जिससे शासकीय कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों को बेहतर दिशा दी जा सके।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री कौन हैं और किस क्षेत्र से हैं?
उत्तर: विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, जो जशपुर जिले के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। - छत्तीसगढ़ के वर्तमान दो उपमुख्यमंत्रियों के नाम क्या हैं?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में वर्तमान में दो उपमुख्यमंत्री हैं— श्री विजय शर्मा (गृह मंत्री) और श्री अरुण साव (लोक निर्माण मंत्री)। - किस संवैधानिक अनुच्छेद के तहत मुख्यमंत्री मंत्रियों को हटा सकता है?
उत्तर: अनुच्छेद 164 के तहत मंत्रियों की नियुक्ति और बर्खास्तगी राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की लिखित सलाह पर ही की जाती है। - छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
उत्तर: 91वें संविधान संशोधन के 15% नियम के अनुसार, 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में अधिकतम 13 मंत्री हो सकते हैं।
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