570 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में आज EOW की अंतिम चार्जशीट, देवेंद्र यादव समेत 9 आरोपी कोर्ट में तलब

Harrison Masih | Oct 05, 2026, 11:42 IST
कोल लेवी घोटाले की चार्जशीट
कोल लेवी घोटाला में ईओडब्ल्यू आज स्पेशल कोर्ट में अंतिम चार्जशीट पेश करेगी। 570 करोड़ का कोल स्कैम में 9 आरोपियों को समन जारी हुआ है। इनमें देवेंद्र यादव, चंद्रदेव राय और आईएएस जयप्रकाश मौर्य शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि नेताओं को 65 करोड़ रुपए मिले। अफसरों को 36 करोड़ रुपए से ज्यादा मिले। अब तक 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अंतिम चार्जशीट आज स्पेशल कोर्ट में पेश की जाएगी।
  • 9 आरोपियों को आज कोर्ट में पेश होने का समन मिला है।
  • एजेंसी का दावा है कि नेताओं को 65 करोड़ रुपए मिले।
  • अफसरों को 36 करोड़ रुपए से ज्यादा मिलने का दावा है।
  • जांच में अब तक 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त हुई है।

कोल लेवी स्कैम: पैसा कहां से आता था?

आरोप है कि कारोबारी सूर्यकांत तिवारी इस घोटाले का मास्टरमाइंड है। चार्जशीट के मुताबिक वह कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से वसूली करता था। कोल वाशरी (कोयला धोने का प्लांट) से 100 रुपए प्रति टन लिए जाते थे। कोयला निकलने पर 25 रुपए प्रति टन अतिरिक्त ट्रांसपोर्टिंग शुल्क लगता था।



इस Coal levy scam का आरोप कोयला कारोबारियों से वसूली का है। कोरबा और रायगढ़ में वसूली के लिए अलग-अलग ऑफिस खोले गए थे। कारोबारियों को सूर्यकांत को दो बार कमीशन देना पड़ता था।




सूर्यकांत के कर्मचारी कैसे पहुंचाते थे रकम?

रकम सूर्यकांत तिवारी ही संभालता था। इसके बाद डील के मुताबिक नेताओं और अफसरों तक पैसा पहुंचता था। आरोप है कि वसूली की रकम कर्मचारियों के जरिए पहुंचाई जाती थी।



निखिल चंद्राकर ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई, ऐसा आरोप है। चार्जशीट के मुताबिक अधिकतर लोगों तक पैसे उसी ने पहुंचाए। सूर्यकांत तिवारी डायरी में 80 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन सामने आया।



सवाल यह है कि यह रकम आखिर किन तक पहुंची?



किसे मिले कितने करोड़ रुपए?

ईडी (ED - Enforcement Directorate) की चार्जशीट में 8 नेता-अफसर सबसे बड़े लाभार्थी बताए गए। आरोप है कि इन्होंने प्रॉपर्टी खरीदी और गहने लिए। चुनाव में भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए।



चार्जशीट के मुताबिक सौम्या चौरसिया ने 169 बार में 31 करोड़ रुपए लिए। रानू साहू निलंबित आईएएस (IAS - Indian Administrative Service) अफसर हैं। उन्होंने 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए लिए। दावा है कि जयप्रकाश मौर्य आईएएस ने प्रॉपर्टी में करोड़ों रुपए खर्च किए।



देवेंद्र यादव ने चुनाव में कितना लगाया?

आरोप है कि देवेंद्र यादव को 11 बार में 3 करोड़ रुपए मिले। चार्जशीट के अनुसार रकम खैरागढ़ उपचुनाव और यूपी चुनाव में खर्च हुई। ईडी के मुताबिक वह सीधे सूर्यकांत के संपर्क में थे। दोनों के बीच वॉट्सऐप पर बातचीत होती थी।



चैट में खैरागढ़ चुनाव, रायपुर आने और मिलने के समय का जिक्र है। एजेंसी ने स्क्रीनशॉट भी चार्जशीट में लगाए हैं।




चैट में देवेंद्र यादव ने क्या लिखा?

भैया, मैं शंकर नगर पहुंच गया हूं। कहां पर आना है।- देवेंद्र यादव, कांग्रेस विधायक



बाद में उन्होंने पूछा कि और कितना समय लगेगा, उन्हें खैरागढ़ पहुंचना है।- सूर्यकांत तिवारी ने क्या जवाब दिया?



रेडी होकर आता हूं भाई। 10 बजे अनुपम नगर पहुंचता हूं। - सूर्यकांत तिवारी, कारोबारी



आखिर में सूर्यकांत तिवारी का जवाब आया: DONE।



चंद्रदेव राय के 46 लाख रुपए का हिसाब

चंद्रदेव राय कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं। आरोप है कि उन्होंने सूर्यकांत से 2 बार में 46 लाख रुपए लिए। इनमें से 42 लाख रुपए यूपी चुनाव में खर्च हुए। 4 लाख रुपए से पत्नी के लिए 60 ग्राम सोने का हार खरीदा गया।



चैट में चंद्रदेव राय ने क्या लिखा?



भैया जी, आपकी बहू ने 60 ग्राम का सोने का हार पसंद किया है।



- चंद्रदेव राय, कांग्रेस के पूर्व विधायक



जवाब में सूर्यकांत ने खरीदने की सहमति दी। चैट के मुताबिक हार की कीमत 4 लाख 30 हजार रुपए थी। आरोप है कि ड्राइवर ने होटल से पैसे लेकर ज्वेलरी शॉप पर दिए।




विनोद तिवारी और आरपी सिंह पर आरोप

कांग्रेस नेता विनोद तिवारी पर कोल लेवी सिंडिकेट से रकम लेने का आरोप है। बताया गया कि उन्होंने 19 किश्तों में 1.87 करोड़ रुपए लिए। आरोप है कि रकम खैरागढ़ चुनाव और प्रॉपर्टी खरीद में लगी। एजेंसी ने दोनों की बातचीत सबूत के तौर पर कोर्ट में रखी है।



आरपी सिंह पर 2 करोड़ 1 लाख 40 हजार रुपए लेने का आरोप है। ईडी के मुताबिक पूछताछ में उन्होंने रकम लेने की बात मानी। बताया गया कि पैसा गाड़ियों और मीडिया के प्रबंध में खर्च हुआ।



छत्तीसगढ़ कोल स्कैम में आगे क्या?

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW - Economic Offences Wing) चार्जशीट पेश करेगा। एफआईआर (FIR - First Information Report) में नामजद आरोपियों के खिलाफ यह चार्जशीट पेश होगी। जांच में जुटाए गए सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई होगी।



बेनामी संपत्ति का मतलब है दूसरे के नाम पर खरीदी गई प्रॉपर्टी। Chhattisgarh coal scam में 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त हुई है। अभी सभी बातें आरोप हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।



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