LPG गैस संकट; मंदिर ट्रस्ट को भी राहत नहीं, चूल्हों पर चल रही व्यवस्थाएं
NEWS IN SHORT
- डोंगरगढ़ नवरात्र: कमर्शियल गैस की कमी से मंदिर और मेले की व्यवस्थाएं संकट में
- मंदिर ट्रस्ट को मिली आपूर्ति की अनुमति, लेकिन सिलेंडर अभी तक नहीं पहुँचे
- होटल-रेस्टोरेंट और अस्थायी दुकानें अब चूल्हों पर बना रही भोजन
- प्रशासन दावा कर रहा, जमीनी हकीकत में गैस की कमी जारी
- घरेलू सिलिंडर पर कोई संकट नहीं, पर कमर्शियल गैस की अनुपलब्धता बड़ी चुनौती
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ :डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्र जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के बीच कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मां बम्लेश्वरी मंदिर में इस बार भोजन व्यवस्था गंभीर चुनौती बन गई है। प्रशासन द्वारा मंदिर ट्रस्ट को 100 सिलिंडरों की आपूर्ति की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन बुधवार शाम तक एक भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पाया।
मंदिर ट्रस्ट में चूल्हे पर बन रहा भोजन
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि समय पर गैस मिलती तो व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलतीं, लेकिन फिलहाल हालात बेहद कठिन हैं। मजबूरी में ट्रस्ट को चूल्हों पर भोजन बनाने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रस्ट ने नौ दिनों के आयोजन के लिए 100 सिलिंडरों की मांग की थी, परंतु अब तक आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
आदेश कागजों तक सीमित
खाद्य विभाग का दावा है कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और मंगलवार को ही आपूर्ति की अनुमति जारी कर दी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। आदेश कागजों तक सीमित हैं और सिलिंडरों की आपूर्ति अब भी शुरू नहीं हो पाई है।
चूल्हे पर भोजन बनाएगा पुलिस प्रशासन
नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में लगभग 2500 कर्मचारियों और पुलिस जवानों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पिछले वर्ष यहां 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को संकट में डाल दिया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की मेस के लिए भी गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन ने भी चूल्हे पर भोजन बनाने की तैयारी कर ली है।
होटल व रेस्टोरेंट पर दिख रहा असर
इस संकट का असर सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे डोंगरगढ़ के होटल, रेस्टोरेंट और अस्थायी दुकानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कमर्शियल गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो चुकी है। नए निर्देशों के तहत होटल और रेस्टोरेंट को उनकी पिछली खपत का केवल 20 प्रतिशत गैस ही दी जा रही है, जो बढ़ती भीड़ के बीच दो दिन भी नहीं चल पा रही।
व्यापारियों ने खरीदी लकड़ी
स्थिति यह है कि छोटे-बड़े कारोबारी अब जलाऊ लकड़ी के सहारे काम चला रहे हैं। मेला ग्राउंड में दुकान लगाने वाले एक व्यापारी ने बताया कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें 17 हजार रुपये में ट्रैक्टर भर लकड़ी खरीदनी पड़ी। कई रेस्टोरेंट और होटल अब चूल्हों पर भोजन बनाकर ग्राहकों को परोस रहे हैं। मेले में लगी लगभग 200 अस्थायी दुकानों में से अधिकांश इसी संकट से जूझ रही हैं।
सेवा पंडालों और भंडारों पर असर
पदयात्रियों के लिए लगाए जाने वाले सेवा पंडालों और भंडारों पर भी इस समस्या का सीधा असर पड़ा है। हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार करने वाली समितियां अब वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने को मजबूर हैं। संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
सिलिंडर उपयोग के लिए निर्देश जारी
नई व्यवस्था के तहत आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, जेल और रेलवे स्टेशन को प्राथमिकता देते हुए बिना कटौती के गैस आपूर्ति की जा रही है। वहीं सरकारी कार्यालयों और कैंटीन को 50 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, कमर्शियल की जगह घरेलू सिलिंडर के उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
बुधवार को खाद्य विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंस में इस व्यवस्था की जानकारी दी गई और एजेंसियों को निर्देश जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। प्रशासनिक दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर साफ नजर आ रहा है।
हालांकि विभाग का कहना है कि घरेलू गैस कनेक्शनों पर कोई संकट नहीं है और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर नियमित आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद नवरात्र जैसे बड़े आयोजन के दौरान कमर्शियल गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को गहरे संकट में डाल दिया है। आस्था के इस महापर्व में अब चूल्हों से उठता धुआं प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने ला रहा है।
निष्कर्ष
चैत्र नवरात्र के दौरान डोंगरगढ़ माँ बम्लेश्वरी मंदिर में कमर्शियल गैस की कमी ने मंदिर, मेला और होटल-रेस्टोरेंट की व्यवस्थाओं को संकट में डाल दिया है। प्रशासन ने आपूर्ति की अनुमति तो दी, लेकिन जमीनी स्तर पर गैस नहीं पहुंची। इस स्थिति में वैकल्पिक रूप से चूल्हों पर भोजन बनाने की तैयारी की जा रही है।
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